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PM बने मोदी तो अपने 20 नेताओं को भेजेंगे जेल!

Wed, 23 Apr 2014 10:02 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 23 Apr 2014 10:02 AM IST
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modi trapped in his own statement

भले ही भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने सरकार में आने के बाद संसद को दागियों से मुक्त कराने का ऐलान किया हो पर यह काम बहुत आसान नहीं दिखता।

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उन्हें अपने ही घर से इस काम की शुरुआत करनी होगी। भले ही संख्या कम हो लेकिन यूपी में भाजपा ने इस बार भी जो 78 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, उनमें भी सभी पाक-साफ नहीं हैं।
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कुछ के चेहरे पर अपराधों के दाग दिखाई दे रहे हैं। यह बात अलग है कि अभी ये मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।

नेशनल इलेक्शन वॉच ने तीसरे चरण तक की जो सूची जारी की है, उसके अनुसार यूपी में 14 दागी भाग्य आजमा रहे हैं।

देश भर में 20 दागी चेहरे उतारे

modi trapped in his own statement

रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने पूरे देश में 20 दागी चेहरों को मैदान में उतारा है।

भाजपा के प्रदेश में 78 उम्मीदवारों पर नजर दौड़ाएं तो आजमगढ़ से उम्मीदवार बनाए गए रमाकांत यादव, कैसरगंज से उम्मीदवार बृजभूषण शरण सिंह, फतेहपुर सीकरी से चुनाव लड़ रहे बाबू लाल, फूलपुर से मैदान में उतरे केशव मौर्य और उन्नाव से मैदान में उतरे स्वामी सच्चिदानंद उर्फ साक्षी महराज पर गंभीर धाराओं में आपराधिक मामले दर्ज हैं।

इनमें रमाकांत यादव व केशव प्रसाद पर प्राणघातक हमले से लेकर हत्या तक मुकदमे दर्ज हैं। शेष पर प्राणघातक हमला करने के मामले दर्ज हैं। हालांकि इनके मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।

इन दो नेताओं पर ही 18 मुकदमे

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रमाकांत यादव (आजमगढ़): नौ मुकदमे।
हत्या, हत्या का प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा, धमकी, जान से मारने की धमकी, मारपीट, बलवा और जबरन किसी के घर में घुसकर अपराध करने जैसे गंभीर मामले।

केशव प्रसाद (फूलपुर): नौ मुकदमे।
हत्या और हत्या का प्रयास, षडयंत्र, कानूनी प्रतिबंधों का उल्लंघन,  सरकारी कर्मचारी व अधिकारी से मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा, हथियारों का इस्तेमाल करते हुए सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ना, धमकी, मारपीट, जान से मारने की धमकी, चोरी, आर्थिक क्षति पहुंचाने, जोर-जबरदस्ती, धार्मिक तनाव पैदा करना, धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे गंभीर मामले।

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हत्या के प्रयास और बलवा करवाने वाले हैं ये!

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बृजभूषण शरण सिंह (कैसरगंज): दो मुकदमे। हत्या का प्रयास, बलवा, हथियारों के साथ सांप्रदायिक हिंसा फैलाना, सरकारी कार्य में बाधा, सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों से मारपीट व उन्हें गंभीर चोट पहुंचाना, धार्मिक स्थल में जबरिया प्रवेश और तोड़फोड़, बलवा, डकैती और डकैती के दौरान प्राणघातक हमला करने के मामले।

बाबू लाल (फतेहपुर सीकरी): तीन मुकदमे। आपराधिक मामले। हत्या का प्रयास, बलवा, सरकारी कार्य में बाधा, कर्मचारियो व अधिकारियों से मारपीट, उन्हें जान से मारने की धमकी देना। विस्फोटक के साथ संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, मारपीट व सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों पर हमला बोलने जैसे मामले।

स्वामी सच्चिदानंद साक्षी (उन्नाव): तीन आपराधिक मामले। बलवा, सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ना, सरकारी कार्य में बाधा और अधिकारियों व कर्मचारियों से मारपीट, डकैती व मारपीट, धमकी और जान से मारने की धमकी देने के मामले।

दागियों से भाजपा का पुराना है लगाव

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इसे विडंबना ही कहेंगे कि राजनीति के अपराधीकरण का विरोध करने वाली भाजपा भी आपराधिक छवि वालों से लगाव में पीछे नहीं है।

बृजभूषण शरण सिंह को सियासी संसार में उतरने का अवसर भाजपा ने दिया। भले ही मोदी को आज सपा और बसपा में अपराधियों व भ्रष्टाचारियों को गले लगाने की होड़ दिख रही हो लेकिन भाजपा भी पीछे नहीं रही है।

वर्ष 1997 के बाद तो यह रफ्तार काफी तेज रही है। बसपा के दांव देने के बाद तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राजनाथ सिंह और तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने बसपा और कांग्रेस को तोड़कर बहुमत का आंकड़ा हासिल किया।

दागियों की मदद से बचाई सरकार

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इस मुसीबत में भाजपा ने सरकार बचाने को दागी छवि वालों का सहारा लेने में भी परहेज नहीं किया। इनमें रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया, हरिशंकर तिवारी, अमरमणि त्रिपाठी व मार्कण्डेय चंद जैसे चेहरे उल्लेखनीय हैं।

भाजपा की कथनी-करनी में अंतर को बताने वाला दिलचस्प तथ्य यह भी है कि इनमें कई को पहली बार मंत्री बनाने वाली भी भाजपा ही है।

राजा भैया को पहली बार मंत्री पद भाजपा सरकार में मिला। हरिशंकर तिवारी को भाजपा ने ही मंत्री बनाया। मधुमणि हत्याकांड में जेल में सजा भुगत रहे अमरमणि को भी लालबत्ती का तमगा भाजपा ने दिया।

मार्कण्डेय चंद को भी लालबत्ती से भाजपा ने नवाजा। रामआसरे कुशवाहा की कद-काठी भी भाजपा ने बढ़ाई।

डीपी यादव को दो बार लगाया गले

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आपराधिक छवि वाले स्व.अजीत सिंह भाजपा से एमएलसी रहे। माफिया डॉन कहे जाने वाले बृजेश सिंह के भाई चुलबुल सिंह भाजपा के टिकट पर एमएलसी रहे।

आपराधिक छवि के स्व. रमेश कालिया की पत्नी को भाजपा ने विधानपरिषद का चुनाव लड़ाया। डीपी यादव को भाजपा ने एक बार नहीं दो-दो बार गले लगाया।

बसपा के निष्कासित सांसद धनंजय सिंह के भाजपा के कुछ नेताओं से प्रेम के किस्से सत्ता के गलियारे में अब ढकी-छिपी बात नहीं हैं।

कई मामलों में आरोपी रविशंकर सिंह ‘पप्पू’ को दूसरे दल से टिकट दिलाकर भाजपा के सहयोग से चुनाव लड़ाने का आरोप भी भाजपा के एक नेता पर लग चुका है।

हुकुम सिंह और प्रदेश अध्यक्ष पर भी केस

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नेशनल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट में भाजपा के मौजूदा 47 विधायकों में 25 को गंभीर मामलों में आरोपी बताया गया है। पर इनमें अधिकतर को आपराधिक छवि वाला नहीं कहा जा सकता।

इनमें केशव प्रसाद मौर्य, उपेंद्र तिवारी, योगेंद्र उपाध्याय, अगयश रामसरन वर्मा, बावन सिंह, सावित्री बाई फूले, उमाभारती, रामचंद्र, मनीष असीजा, अजय कुमार, जन्मेजय सिंह, कृष्णा पासवान, श्यामदेव राय चौधरी, कुंवर सर्वेश कुमार, संगीत सिंह सोम, रवि शर्मा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, लोकेंद्र सिंह, सत्यप्रकाश, ज्योत्सना श्रीवास्तव, धर्मपाल सिंह, हुकुम सिंह, सीमा द्विवेदी, डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल।

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