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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP Election 2022: Modi's Third Visit To Purvanchal In Four Months, Eyes On Political Siege

UP Vidhan Sabha Chunav 2022: चार माह के भीतर तीसरी बार पूर्वांचल के दौर पर पीएम मोदी, सियासी घेरेबंदी पर टिकी नजर

Mon, 25 Oct 2021 03:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा अखिलेश वाजपेयी, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 25 Oct 2021 03:44 AM IST
सार

वर्तमान परिस्थितियों में 2022 के मद्देनजर भाजपा के लिए पूर्वांचल की अहमियत ज्यादा बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह किसान आंदोलन और पश्चिमी यूपी के समीकरण हैं।

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UP Election 2022: Modi's Third Visit To Purvanchal In Four Months, Eyes On Political Siege
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंच रहे हैं। एक सप्ताह में उनका पूर्वांचल का यह दूसरा दौरा होगा। चार महीने के भीतर पीएम तीसरी बार पूर्वांचल में होंगे। अगर उनके संसदीय क्षेत्र की बात करें तो यह दूसरी बार है। प्रधानमंत्री के पूर्वांचल के दौरे न सिर्फ महत्वपूर्ण हैं, बल्कि सत्तारूढ़ दल की राजनीतिक जरूरतों की भी कहानी कह रहे हैं।

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सभी को याद होगा कि 2013 में पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर गोरखपुर और वाराणसी में भाजपा की विजय शंखनाद रैली को संबोधित करने पहुंचे मोदी ने पूर्वांचल की बदहाली का मुद्दा उठाया था। इस बदहाली के लिए उन्होंने तत्कालीन गैर भाजपा केंद्र और राज्य सरकारों को दोषी ठहराया था। उन्होंने इसमें आमूल-चूल बदलाव का वादा किया था। इसका असर भी दिखा और 2014 में भाजपा को अपने सहयोगी अपना दल सहित पूर्वांचल में आने वाली लोकसभा की 22 में 21 सीटों पर जीत मिली।
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विपक्ष को मौका नहीं देना चाहते
जिस पूर्वांचल में चार-पांच सीटों को छोड़कर भाजपा के लिए लोकसभा की एक-एक सीट किसी चुनौती से कम नहीं रहती हो उस इलाके में 2014 में भाजपा की प्रचंड जीत मोदी पर भरोसे का संदेश थी। इसे आधार बनाकर पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में इलाके के विकास के लिए भाजपा सरकार की जरूरत का मुद्दा बनाया। इसका नतीजा भी काफी उत्साह जनक रहा। भाजपा को 2017 में इस इलाके में आने वाली विधानसभा की 124 सीटों में से ज्यादातर पर सहयोगी पार्टियों अपना दल और तत्कालीन सहयोगी सुभासपा के साथ सफलता मिली। 
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प्रदेश में सरकार बनी तो भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने गोरखपुर से पांच बार पार्टी के सांसद रहे योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर पूर्वांचल को ही नेतृत्व सौंपा। साथ ही पूर्वांचल की बदहाली को खुशहाली में बदलने के अपने संकल्प का भरोसा दिलाने की कोशिश की। सड़कों के निर्माण से लेकर सुविधाओं व सरोकारों पर कई काम हुए। चिकित्सा से लेकर शिक्षण संस्थानों की स्थापना एवं उनके स्वरूप को बदलने के अभियान से भाजपा ने इस इलाके में अपनी पकड़ व पहुंच को लगातार मजबूत बनाया। पूर्वांचल विकास बोर्ड का गठन कर क्षेत्र के विकास पर प्रतिबद्धता का संदेश दिया गया। सांस्कृतिक विरासत व सरोकारों के साथ जनता को जोड़कर पर्यटन की सुविधाएं बढ़ाने का काम हुआ। 

पूर्वांचल की राजनीतिक अहमियत
बीते तीन चुनाव के नतीजों से यह बात तो साफ हो गई है कि राजनीतिक रूप से कभी भाजपा के लिए बंजर माने जाने वाले इस इलाके को पीएम मोदी और सीएम योगी ने अपनी सक्रियता और कामों से काफी हद तक उपजाऊ बना दिया है। वर्तमान परिस्थितियों में 2022 के मद्देनजर भाजपा के लिए पूर्वांचल की अहमियत ज्यादा बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह किसान आंदोलन और पश्चिमी यूपी के समीकरण हैं। किसान आंदोलन भाजपा के लिए चिंता का विषय है, इसका असर पश्चिम में ज्यादा है। पश्चिमी यूपी में जाट और मुसलमानों के बीच पहले की तुलना में जिस तरह नजदीकी बढ़ने की खबरें हैं, उसको लेकर भी भाजपा नेतृत्व चौकन्ना है।

पश्चिम की भरपाई पूरब से करने की कोशिश
भाजपा को 2022 में भी सपा-बसपा से ही मुख्य मुकाबला नजर आ रहा है। प्रियंका की सक्रियता कांग्रेस को कितनी मजबूती दे पाएगी, यह तो भविष्य में ही पता चलेगा। वहीं, पश्चिम में रालोद नेता चौधरी अजित सिंह के निधन के बाद जाट समाज के लोग जयंत के साथ खड़े दिखते हैं। राकेश टिकैत भी सरकार के खिलाफ मुखर हैं। इससे पश्चिम के सियासी समीकरणों पर असर पड़ सकता है। यही नहीं, अखिलेश यादव और मायावती की सियासी जड़ें पूरब के बजाए पश्चिम में ज्यादा गहरी हैं। 

ऐसे में भाजपा को यदि पश्चिम में कुछ नुकसान होता है तो उसकी भरपाई के लिए उसके सामने पूर्वांचल का ही विकल्प है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रतनमणि लाल कहते हैं कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में भाजपा के पास पश्चिमी यूपी की तुलना में मध्य और पूर्वी यूपी में ही सीटों की संख्या बढ़ाने का विकल्प है। एक तो पूर्वांचल में जाट और मुस्लिम गठजोड़ जैसा कोई मजबूत समीकरण नहीं है और दूसरे किसान आंदोलन का इस इलाके में खास प्रभाव नहीं है। 


उनके मुताबिक ऐसा नहीं है कि पूर्वांचल में मुस्लिम नहीं है, लेकिन फर्क यह है कि पूर्वी यूपी का मुस्लिम आर्थिक और राजनीतिक तौर पर चुनावी समीकरणों को उतना प्रभावित नहीं करता जितना पश्चिम का। सीएम योगी आदित्यनाथ भी शायद पश्चिमी यूपी और पूर्वांचल के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को समझ रहे हैं। यही कारण है कि उन्होंने फरवरी में ही पूर्वांचल विकास बोर्ड की बैठक में चुनाव तक पूर्वी जिलों पर खास फोकस की बात कही थी। जाहिर है कि भाजपा विपक्ष को पूर्वांचल में घुसने का मौका नहीं देना चाहेगी।

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