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मोबाइल कंपनियों पर चला लोक अदालत का डंडा

Sat, 03 May 2014 01:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 03 May 2014 01:47 AM IST
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mobile companies to pay compensation

उपभोक्ता की इच्छा के बिना वैल्यू एडेड सर्विस लाग कर पैसे काटना मोबाइल कंपनियों को भारी पड़ा।

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स्थायी लोक अदालत ने मोबाइल सर्विस मुहैया कराने वाली कंपनियों की ओर से उपभोक्ता के मोबाइल पर जबरन वैल्यू एडेड सर्विस एक्टिवेट करना और रिचार्ज कराने के बाद अमाउंट न आने को गलत मानते हुए हर्जाना भरने का आदेश दिया है।

आईपीएल स्कोर से लेकर गाने, कॉलर ट्यून जैसी कई वैल्यू एडेड सर्विस एक्टिवेट करने से लेकर रिचार्ज करने में मोबाइल कंपनियों की ओर से गड़बड़ी की जा रही है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां वेल्यू एडेड सर्विस और दूसरी तरकीबों से करोड़ों रुपये बना रही हैं। एक बार में कुछ रुपये में होने वाली कटौती पर ग्राहक भी ध्यान नहीं देता।
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खुद ही सर्विस सब्सक्राइब, खुद ही रिन्य

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मौलवीगंज चारबाग निवासी अरविंद तिलहरी एयरसेल मोबाइल कंपनी के उपभोक्ता हैं। अरविंद ने स्थाई लोक अदालत में शिकायत की कि कंपनी उनके बैलेंस में से 23 नवंबर 2013 को खेल जगत की अपडेट सब्सक्राइब कर दी।

इसके लिए 30 दिन की वैधता की दर से 30 रुपये भी बैलेंस से काट लिए गए। अनसब्क्राइब करने के लिए मैसेज करने के बाद भी नवीनीकरण के नाम पर दिसंबर माह में कटौती कर ली गई।

इस कटौती से बचने के लिए शिकायतकर्ता ने बैलेंस रिचार्ज ही नहीं कया। इससे उसे आउटगोइंग कॉल करने में असुविधा हुई।

कंपनी अब सेवा जारी रखने के लिए रिचार्ज कराने का दबाव बना रही है। स्थाई लोक अदालत में शिकायत के बाद 29 जनवरी 2014 को क्रिकेट अपडेट को अनसब्सक्राइब कर दिया गया। बिना सब्सक्राइब किए ही जबरदस्ती उपभोक्ता के अकाउंट से 41 रुपये काट लिए गए।

अदालत का डंडा

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स्थायी लोक अदालत ने कहा कि यह मोबाइल कंपनी की तरफ से उपेक्षापूर्ण व्यवहार एवं अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस है।

कंपनी की वजह से शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी और असुविधा हुई।

ऐसे में कंपनी को कटौती के 41 रुपये रिफंड करना होगा। वहीं क्षतिपूर्ति की भरपाई के लिए 2500 रुपये हर्जाना चुकाना होगा।

बिना रिचार्ज काटे पैसे

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राजाजीपुरम निवासी अभिषेक भटनागर ने स्थायी लोक अदालत में शिकायत की कि स्मार्टफोन में इंटरनेट के इस्तेमाल के लिए उन्होंने आइडिया कनेक्शन पर रिचार्ज कराया।

पे-टीएम पोर्टल से यह रिचार्ज कराया। कंपनी से रिचार्ज की पुष्टि नहीं होने पर दुबारा रिचार्ज करा लिया। दोनों बार के लिए पेमेंट कटने के बाद शिकायतकर्ता ने कंपनी से संपर्क किया।

कस्टमर केयर से उसे बताया गया कि दुबारा रिचार्ज होने की वजह से पहले रिचार्ज के लाभ उसे नहीं मिल सकेंगे। वहीं 126 रुपये रिफंड करने से भी मना कर दिया गया।

स्थायी लोक अदालत ने पाया कि कंपनी को एसएमएस से रिचार्ज की पुष्टि करनी चाहिए थी। ऐसा नहीं होने पर शिकायतकर्ता के 126 रुपये रिफंड होने चाहिए थे। कंपनी की तरफ से रिचार्ज ओवरराइड होने के तर्क को भी अदालत ने नहीं माना।

अदालत का आदेश

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कंपनी की गलती की वजह से 25 मिनट बाद दुबारा रिचार्ज शिकायतकर्ता को कराना पड़ा। ऐसे में कंपनी को पहले रिचार्ज की वैल्यू को रिफंड करना ही होगा। इसके अलावा 500 रुपये हर्जाने के तौर पर कंपनी को देने का आदेश दिया।

ऐसे हो रही लूट

- क्रिकेट अपडेट सब्सक्राइब
- कॉलर ट्यून सब्सक्राइब
- रिचार्ज में गड़बड़ी
- लिंक भेजकर सर्विस ऑटो-एक्टिवेट करना
- सर्विस रिन्यूवल के नाम पर कटौती
- अचानक स्कीम बदल देना

स्‍थायी लोक अदालत के अध्यक्ष डीएन अग्रवाल का कहना है कि मोबाइल कंपनियों की ज्यादती के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं। छोटे अमाउंट की शिकायत के मामले के चलते अक्सर लोग आने से बचते हैं। वह शिकायत करें। अब तक आए मामलों में कंपनी की गलती मिलने पर रिफंड के साथ क्षतिपूर्ति अदा करने केभी आदेश दिए गए हैं।

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