अमर उजाला संवाद: एमएसएमई को देर से पेमेंट करना यूपी में होगा अपराध, मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने की घोषणा
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इसके लिए एमएसएमई एक्ट में बदलाव किया जा रहा है। ‘कोरोना काल व आर्थिक चुनौतियां’ विषय पर अमर उजाला द्वारा आयोजित वेबिनार में उद्यमियों से विचार साझा करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक, आपसी सहयोग और सरकार से संवाद के जरिए ही इन चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।
सिद्धार्थनाथ ने कहा कि कोरोना से पैदा हुई चुनौतियां वास्तव में प्रदेश की ताकत बढ़ाने का एक अवसर है। एमएसएमई उद्योग ऐसा करके दिखा सकता है। क्योंकि कोविड-19 के दौरान केंद्र ने इस सेक्टर को बहुत जोर दिया है। प्रदेश सरकार भी इसे आगे बढ़ाने के लिए तकनीक से लेकर वित्तीय व्यवस्था तक करने को तत्पर है।
बिजली व कैश संबंधी मांगों पर प्रयास जारी
मंत्री ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार ने महामारी के इस दौर में एमएसएमई सेक्टर की ओर और भी अधिक मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। इसकी कुछ आलोचनाएं भी हो रही हैं और कुछ कठिनाइयां भी हैं। बिजली और कैश से संबंधित कुछ मांगें है, जिनके लिए प्रयास कर रहे हैं।
यह भी घोषणा
- फार्मा व मेडिकल डिवाइस पार्क की स्थापना होगी
- सहारनपुर के फर्नीचर व मुरादाबाद के ब्रासवेयर उद्योग नई तकनीक से लैस होंगे
- संभल में हड्डियों के पाउडर से बटन बनाने को मदद देंगे।
- हैंडीक्राफ्ट लिए नोएडा में दो सौ एकड़ जमीन चिह्नित
यहां देखें वेबिनार का पूरा वीडियो
1600 एकड़ में बनेगा फार्मा पार्क
एमएसएमई मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि फार्मा और मेडिकल डिवाइस पार्क के प्रस्ताव पर केंद्र के साथ विचार-विमर्श चल रहा है। फार्मा पार्क की स्थापना पीलीभीत या ललितपुर में और मेडिकल डिवाइस पार्क की स्थापना उन्नाव या प्रयागराज में करने पर विचार किया जा रहा है। लखनऊ में फार्मा पार्क की की मांग पर उन्होंने कहा कि इसके लिए 1600 एकड़ जमीन चाहिए, जोकि यहां उपलब्ध नहीं है।
सिद्धार्थनाथ ने ‘कोरोना काल व आर्थिक चुनौतियां’ अमर उजाला वेबिनार में कहा कि पहली बार इतना खुलकर किसी वेबिनार में बात रख रहा हूं। मेरा यह मानना है कि यह प्रदेश की ताकत बढ़ाने का एक अवसर है। हम सबके पास जो बेहतरीन है, उसे सामने रखें और सबसे अच्छा करके दिखाएं। कोविड-19 संकट से पहले इस तरह की आवाजें नहीं उठ रही थीं, हालांकि कठिनाइयां उस समय भी थीं। ऐसा नहीं है कि उस समय एमएसएमई सेक्टर के साथ बहुत अच्छा चल रहा था। कोविड-19 के दौरान केंद्र ने एमएसएमई सेक्टर को बहुत बल दिया है। इसके चलते बरसों से दबी आवाजें भी उभरकर आईं।
हमें देखना होगा कि केंद्र की इन घोषणाओं के तहत हम क्या सुधार कर सकते हैं। पहले भी आपने जो सुझाव दिए, उन पर हमने अमल किया। उद्यमियों की मांग पर ही नोएडा में एमएसएमई एक्सपोर्ट पार्क दिया। एपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन के मामले में लैंड को लेकर पेमेंट को रिशेड्यूल की मांग को माना। एपैरल पार्क बनाया है। उसके बगल में ही दो सौ एकड़ जमीन चिह्नित की है, जिसे हैंडीक्राफ्ट वालों को देने के लिए तैयार हैं। केंद्रीय लघु उद्योग मंत्री नितिन गडकरी ने एमएसएमई के लिए नई तकनीक पर बल दिया। सहरानपुर के फर्नीचर उद्योग को इटली की तकनीक के साथ जोड़ा जा सकता है। इसके लिए हम कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाएंगे।
कानपुर में बनेगा लेदर क्लस्टर पार्क
उन्होंने कहा कि आगरा में जमीन उपलब्ध न होने के कारण लेदर क्लस्टर पार्क कानपुर नगर में बनाने की योजना बनाई गई। वहां बिजली की समस्या के बाबत ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से बात करेंगे। सिद्धार्थनाथ ने कहा कि लेदर सेक्टर के बाबत अधिसूचना में वियर के स्थान पर फुटवियर किए जाने के बाबत कार्यवाही की जाएगी। एफएआर बढ़ाने पर विचार हो रहा है। कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर यह काम होगा।
पेमेंट में देरी पर जारी होगी आरसी
वेबिनार में उद्यमियों की ओर से देरी से भुगतान का मामला उठाए जाने पर मंत्री ने कहा कि इसके लिए एमएसएमई एक्ट में प्रावधान किया जा रहा है। जल्द ही इसे पारित करेंगे। 45 दिन या निश्चित समयसीमा के भीतर पेमेंट न करने पर संबंधित बकाएदार के खिलाफ राजस्व विभाग के माध्यम से रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी करवाने का प्रावधान होगा। बकाएदार को नोटिस भेजा जाएगा। इन मामलों में आपराधिक केस की तरह कार्यवाही भी की जा सकती है।
सिद्धार्थनाथ ने कहा, फिरोजाबाद में हमने कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाया है, पर मंत्री होते हुए भी मैं काम से संतुष्ट नहीं हूं। मुझे पीड़ा है कि वहां के ग्लासवेयर की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान क्यों नहीं बना पा रही है। चीन के उत्पादों को कैसे मात दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि बाजार व तकनीक के मामले में आपके पास सरकार से ज्यादा इनपुट्स हैं, इसलिए इस बारे में अपने सुझाव दें। केंद्र से लेकर प्रदेश तक की सरकार मदद को तैयार है। सामूहिक रूप से क्या कर सकते हैं, इस पर सोचना चाहिए। आयात को प्रतिस्थापित करने वाली तकनीक पर ध्यान देना होगा।
डिफेंस सेक्टर मे एंसिलरी लगाने का अवसर
सिद्धार्थनाथ ने कहा कि दुनिया की निवेश कंपनियों से बात हो रही है। थाइलैंड और डेनमार्क का डेलीगेशन भी आने वाला है। वे एमएसएमई सेक्टर में नई तकनीक लेकर आना चाहते हैं। कैसे बेहतर उपयोग हो सकता है, योजना बनानी होगी। ये कंपनियां निवेश की दृष्टि से भी आ रही हैं। केंद्र सरकार ने डिफेंस इंडस्ट्री में 74 प्रतिशत तक एफडीआई का स्पेस दिया है। डिफेंस कॉरीडोर हमारे पास है। एमएसएमई के तहत एंसिलरी यूनिट्स लगाना चाहते हैं, तो आ सकते हैं। इसमें उद्यमियों की पूरी मदद की जाएगी।
वेबिनार में बताई गईं दिक्कतें होंगी दूर
अमर उजाला वेबिनार में उद्यमियों के सवालों का जवाब देते हुए सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि जीएसटी रिफंड के लिए जो सूची दी गई है, उस पर तत्काल अग्रिम कार्यवाही होगी। उन्होंने फिरोजाबाद में सैंड स्क्रीनिंग मशीन लगाए जाने पर विचार करने का आश्वासन दिया। इंडस्ट्रियल एरिया में जमीन को फ्री होल्ड करने और उद्योग बंधु के बाबत निर्णय उद्योग विभाग से संबंधित हैं। इस बारे में औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना के साथ चर्चा करेंगे। सरकार ने इंडस्ट्रियल जमीन को फ्री होल्ड करने के मामले में प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी की रिपोर्ट आने पर इस बारे में विचार किया जाएगा। उद्यमियों को कृषि भूमि का लैंड यूज चेंज करवाने में अगर कहीं कोई दिक्कत आती है तो तत्काल संपर्क करें।
नीति तय करने में मदद दें एसोसिएशन
उन्होंने कहा कि हेल्थ सेक्टर में काम कर रहे एमएसएमई उद्यमियों को तकनीक में मदद देने के प्रयास किए जा रहे हैं। जरूरी है कि विभिन्न एसोसिएशन आपस में और सरकार के साथ संवाद बढ़ाएं। दक्षिण कोरिया और जापान में उद्यमी एसोसिएशन सरकार की नीतियां तय करने में मदद करती हैं। योगी सरकार का प्रयास उसी दिशा में आगे बढ़ने का है।
उत्तर प्रदेश को बनाना है एमएसएमई हब
सिंह ने कहा- उद्यमियों के साथ मिलकर यूपी को एमएसएमई हब बनाना है। साउथ कोरिया, जापान और चीन के उद्यमियों ने मिलकर सप्लाई चेन बनाई है। इसी तरह हमें भी का करना होगा। कोरोना काल में हमें एक मौका मिला है। अगर सही दिशा में आगे नहीं बढ़े तो अटककर रह जाएंगे।
एमएसएमई साथी दूर करेगा दिक्कतें
सिद्धार्थनाथ ने कहा कि स्टेल लेवल बैंकर्स कमेटी के माध्यम से उद्यमियों को लोन की दिक्कत दूर करने के लिए तैयार हैं। विदेशी पूंजी लेकर आ सकते हैं। ‘एमएसएमई साथी’ एप बनाया है। एक महीने से भी कम समय में तीन हजार शिकायतें आईं। इनमें से 1118 का निस्तारण कर दिया गया।
जीएसटी रिफंड के लिए मांगी सूची
जीएसटी रिफंड के बारे में लघु उद्योग भारती व सीआईआई से वार्ता की। सूची मांगी, जो अभी तक नहीं मिली है। केंद्र सरकार भी चाहती है कि आपका कैश फ्लो बेहतर हो।
प्रोफेशनल्स को दी जाएगी लैटलर एंट्री
सिद्धार्थनाथ ने कहा कि एक्सपोर्ट प्रमोशन आदि क्षेत्रों में काम करने के लिए प्रोफेशनल्स की आवश्यकता है। इस मामले में हम सिर्फ अधिकारियों पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी यही कहना है कि प्रोफेशनल्स को लैटलर एंट्री दी जाए।
लॉकडाउन न होता तो मुरादाबाद सीएफसी का कट गया होता रिबन
सिद्धार्थनाथ ने कहा, करीब छह माह पहले मुरादाबाद के ब्रासवेयर उद्यमी मुझसे मिलने आए। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उपस्थिति बढ़ाने के लिए ब्रास प्लेटिंग तकनीक की मांग की। इसके लिए सरकार ने तत्काल 10 करोड़ रुपये के शत-प्रतिशत अनुदान से कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाने का निर्णय लिया। लॉकडाउन नहीं हुआ होता तो शायद अभी तक हमने रिबन भी काट दिया होता। इसी तरह से संभल में उद्यमी स्लॉटर हाउस से हड्डियां खरीदकर पाउडर बनाते हैं। यह पाउडर वे चीन के लिए निर्यात करते हैं, जहां बटन बनते हैं। अब बटन बनाने की यह तकनीक हम संभल में ही कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाकर देंगे।
वैकल्पिक ऊर्जा अपनाने पर मदद देगी सरकार
भदोही में कार्पेट बुनकरों की बिजली बिल समस्या पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेशन का 22 हजार करोड़ रुपये का बकाया है। इसमें बुनकरों का ही 9 हजार करोड़ रुपये है। हमें वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा। सोलर पैनल लगाने पर बिजली पर निर्भरता खत्म होगी। सरकार अनुदान देने के लिए भी तैयार है और आसान ईएमआई की व्यवस्था के लिए भी। इस काम में एसोसिएशनों को भी आगे आना होगा। कार्पेट इंडस्ट्री को लेकर सरकार चिंतित है। जो संभव है, सरकार करने को तैयार है। अगर आप कहते हैं कि प्रधानमंत्रीजी के दरवाजे पर ही यह समस्या हल होगी। तो मैं वहां भी जाऊंगा।
वेबिनार में ये उद्यमी भी हुए शामिल
लघु उद्योग भारती के प्रदेश उपाध्यक्ष भारत थरड, मिर्जापुर मेटल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के सचिव मोहन दास अग्रवाल, ऑटो पार्ट्स निर्माता पुनीत अरोरा, फार्मा उद्यमी रितेश श्रीवास्तव और विशाल गुप्ता।
उद्यमियों ने दिए ये सुझाव: फिरोजाबाद को सैंड स्क्रीनिंग मशीन की दरकार
अगर हम ग्लासवेयर में चीन और जापान को मात देना चाहते हैं तो आधुनिकतम तकनीक की सैंड स्क्रीनिंग मशीन उपलब्ध करानी होगी। जीएसटी रिफंड के लिए वाणिज्य कर विभाग का दिया गया नंबर कभी नहीं उठता है। यूपी में मेंथा पर 12 प्रतिशत जीएसटी है, जबकि अन्य प्रदेशों में 4 प्रतिशत। इससे काफी दिक्कत है। यमुनानगर (हरियाणा) में प्लाईवुड फैक्ट्रियां चल सकती हैं, तो उससे एकदम सटे यूपी के सहारनपुर में क्यों नहीं? नक्शा पास न होने से यूपीएसआईडीसी से लिए गए प्लॉटों में भी समस्या आ रही है। इन दिक्कतों पर हमें तत्काल ध्यान देना होगा, ताकि केंद्र व प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप एमएसएमई सेक्टर आगे बढ़ सके। -जनक भाटिया, प्रदेश अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती
सूची देने के बावजूद जीएसटी रिफंड नहीं
प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने की दिशा में एमएसएमई सेक्टर लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकार ने प्राइस एंड पर्चेज पॉलिसी लाकर इस सेक्टर को काफी बढ़ावा दिया है। कोलैट्रल गारंटी के लिहाज से दी गई राहत भी ठीक है। लेकिन अभी एमएसएमई का पहिया चल नहीं रहा है, सिर्फ सरक रहा है। लखनऊ में यूपीपीडीएल की अमौसी में 40 एकड़ जमीन खाली है, जहां फार्मा पार्क बनाना चाहिए। इंडस्ट्रियल एरिया की जमीन को फ्री होल्ड किया जाए जिससे उद्यमियों को कैश की दिक्कत खत्म हो। एमएसएमई उद्यमियों का सरकारी इकाइयों और विभागों पर काफी बकाया है। 150 लोगों के करीब 300 करोड़ रुपये बकाया की सूची भी दी गई है। लेकिन 40 दिन बाद भी कोई प्रगति नहीं है। इलेक्ट्रिकल व्हीकल को भी प्रोत्साहन देने की जरूरत है। ये कार्य करेंगे, तभी केंद्र के 10 हजार करोड़ रुपये के पैकेज का हमें फायदा मिलेगा। - पंकज गुप्ता, अध्यक्ष, आईआईए
मानसिकता बदलें अधिकारी
एक समय था कि कोई सवर्ण हिंदू जूता उद्योग को छूना नहीं चाहता था। आज जूता उद्योग देश के 10 बड़े निर्यात उत्पादों में है और 20 बिलियन डालर का उद्योग है। 6 बिलियन डालर निर्यात है, जिसमें यूपी की हिस्सेदारी 30 फीसदी है। अभी आगे बढ़ने की असीम संभावनाएं हैं। उद्यमियों को सोच माइक्रो से मैक्रो बनानी है। वहीं, अधिकारियों को भी मानसिकता बदलनी होगी। उद्योगों को आगे बढ़ने में मदद करनी होगी। उद्योग पनपने के लिए उन्मुक्त वातावरण चाहते हैं, किसी सब्सिडी या अनुदान की कतई अपेक्षा नहीं है। विडंबना यह है की सरकार एक ओर सब्सिडी देती है, दूसरी ओर 2.40 रुपये प्रति यूनिट बिजली के उद्योगों से 9 रुपये चार्ज करती है। निर्बाध बिजली मिलने में दिक्कत आ रही है। औद्योगिक क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था निजी क्षेत्र में हो। बड़ा बजट डीजल में खर्च होता है। इससे प्रदूषण भी बढ़ता है। प्रदेश सरकार ने नोटिफिकेशन में फिनिश्ड मैटीरीयल से बने जूता उद्योग को वाइट कैटेगरी में रखा है, टाइपिंग की गलती से फुटवियर के स्थान पर वियर रह गया। इससे काफी दिक्कतें आ रही हैं। निजी औद्योगिक पार्कों की व्यवस्था की स्पष्ट नीति की भी जरूरत है। - पूरन डावर, अध्यक्ष, आगरा फुटवियर एक्सपोर्टर्स एंड मैन्युफैक्चरर्स चैंबर
लखनऊ में ही बने फार्मा पार्क
लखनऊ में फार्मा पार्क के लिए परिस्थितियां काफी अनुकूल हैं। दवाइयों से संबंधित प्रमुख संगठन हैं। जाने-माने मेडिकल कॉलेज और एसजीपीजीआई जैसे संस्थान हैं। कच्चे माल के परिवहन के लिए अंतर्राष्ट्रीय सुविधाओं से युक्त एयरपोर्ट भी है। - प्रशांत भाटिया, अध्यक्ष, उप्र. दवा निर्माता संघ
भदोही में बने एसईजेड
केंद्र सरकार ने बहुत पहले भदोही में स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) बनाने की घोषणा की थी, पर अभी तक कोई काम नहीं हुआ। इससे कॉर्पेट निर्यातकों को लाभ नहीं मिल पा रहे हैं। 20 लाख आर्टिजन कॉर्पेट उत्पादन से जुड़े हुए हैं। सोलर पैनल लगाने की योजना में जरूर शामिल होंगे। - ओंकारनाथ मिश्रा, अध्यक्ष, ऑल इंडिया कॉर्पेट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन व रवि पटौदिया, कालीन निर्यातक
उद्योग बंधु व्यवस्था को प्रभावी बनाने की जरूरत
औद्योगिक क्षेत्रों की व्यवस्थाएं सुधारने की आवश्यकता है। त्रिस्तरीय उद्योग बंधु व्यवस्था को प्रभावी बनाए जाने की भी जरूरत है। उद्योगों को मिलने वाली महंगी बिजली पर विचार करना होगा। - आरके चौधरी, पेपर एवं स्टील उद्योग, वाराणसी