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मिल्कीपुर उपचुनाव: आधे मन से लड़ती दिखी सपा, प्रत्याशी को लेकर भी कार्यकर्ताओं में नहीं था उत्साह

Sun, 09 Feb 2025 08:51 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 09 Feb 2025 08:51 AM IST
सार

Milkipur by-election: मिल्कीपुर उपचुनाव में सपा की करारी हार हुई है। सासंद अवधेश प्रसाद की सीट को उनके पुत्र अजीत प्रसाद बचाकर नहीं रख पाए।

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Milkipur by-election: SP was seen fighting half-heartedly, there was no enthusiasm among the workers about the
मिल्कीपुर उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मिल्कीपुर उपचुनाव में हार का ठीकरा सपा मुखिया अखिलेश यादव भले ही चुनाव आयोग और पुलिस-प्रशासन पर फोड़ रहे हों, लेकिन सियासी बिसात पर सपा की हर चाल नाकाम हाे गई। चुनावी शतरंज में सपा को अपनी ही चली कुछ चालों से भी नुकसान हुआ। अजीत की छवि भी उतनी लोकप्रिय नहीं है, जितनी उनके सांसद पिता अवधेश प्रसाद की है। इसका भी नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा।

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उपचुनाव में हार के बाद सपा अध्यक्ष ने खुलकर कहा कि चुनाव आयोग मर गया है और सरकार ने धांधली कराई। सपा समर्थक वोटरों को घर में कैद करने के भी आरोप लगाए, लेकिन मिल्कीपुर की चुनावी तस्वीर देखें तो कई बातें शीशे की तरह साफ दिखाई देंगी। लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के तुरंत बाद ही सीएम योगी डैमेज कंट्रोल में जुट गए थे। मिल्कीपुर में विकास कार्य कराए। फिर उन्होंने उपचुनाव की कमान खुद संभाली और छह बार प्रचार के लिए गए। यही नहीं मंत्रियों की फौज लगातार वहां डेरा डाले रही।
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वहीं, सपा हाईकमान लड़ाई में दिखा ही नहीं। अखिलेश आखिर में सिर्फ एक बार प्रचार के लिए गए। पिछले उपचुनावों में भाजपा की एकतरफा जीत को देख सपा कार्यकर्ता पहले ही हताश था। इस मनोदशा से कार्यकर्ताओं को बाहर निकालने की भी पार्टी की ओर से कोई कोशिश नहीं हुई। यही वजह रही कि सपा कार्यकर्ता जमीन पर उस तरह से लड़ते नहीं दिखे, जिसे लेकर उनकी पहचान है।

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अति आत्मविश्वास और यादव मतों में बिखराव पड़ा भारी

Milkipur by-election: SP was seen fighting half-heartedly, there was no enthusiasm among the workers about the
मिल्कीपुर चुनाव में जीत के बाद एक-दूसरे को मिठाई खिला खुशी मनाते

पुलिस ने सपा के एससी-एसटी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष के साथ कथित रूप से अभद्रता की। इससे समर्थकों में संदेश गया कि सपा फिलहाल नेताओं का सम्मान बचा पाने में भी सक्षम नहीं है। दलित की बेटी की मौत पर सपा प्रत्याशी अजीत प्रसाद के पिता और सांसद अवधेश प्रसाद खूब रोए, फिर भी मतदाताओं पर असर नहीं हुआ। रही सही कसर शुरुआत में सपा के अति आत्मविश्वास ने पूरी कर दी। इसी वजह से ‘मथुरा न काशी, मिल्कीपुर में अजीत पासी’ की नारा भारी पड़ गया। हिंदुत्व समर्थकों को इस नारे ने एकजुट कर दिया। मिल्कीपुर में 50 हजार से ज्यादा यादव वोटर हैं। सपा इस सीट को अपने लिए सुरक्षित मानती थी, लेकिन इस बार यादव वोट में भी सेंध लग गई। यादव मतदाता इस बार बड़ी संख्या में छिटक कर भाजपा के पाले में चले गए।

दलितों का भरोसा जीतने में सफल नहीं रही सपा

पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक के बुलंद नारे के साथ चुनाव मैदान में उतरी सपा सिर्फ परंपरागत मतों के इर्द-गिर्द ही सिमट गई। यहां तक कि दलितों का भरोसा जीतने में भी वह कामयाब नहीं रही। इस चुनाव में बढ़त बनाना तो दूर पिछले चुनावों में मिले जनाधार को थामने में भी असफल दिखी।

मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर लगभग 70,000 यादव और 35,000 मुस्लिम मतदाता हैं। लगभग एक लाख दलित मतों में मजबूत बंटवारे व सवर्ण मतों में सेंध लगाने के ख्वाब देखते हुए सपा चुनाव मैदान में कूदी। पूरे चुनाव भर हर बिरादरी के मत हासिल करने का सपा नेता व पदाधिकारी दंभ भरते रहे, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव व 2024 के लोकसभा चुनाव में मिला जनमत भी वह नहीं थाम सके। सपा प्रत्याशी को 84,687 वोट मिले, जो कि 2022 के चुनाव से 19,218 वोट कम रहे। वहीं, लोकसभा चुनाव में भी लगभग 7,000 मतों से सपा ने जीत दर्ज की थी।

इस चुनाव परिणाम को देखकर साफ है कि सपा मूल मतों के अलावा अन्य जातियों का भरोसा नहीं जीत सकी है। पासी समाज की देश भर में ब्रांडिंग करने वाले सांसद भी सजातीय मतों को अपनी तरफ लामबंद भी नहीं कर सके। जबकि वह पासी समेत अन्य दलित मतों को बटोरने का दावा कर रहे थे।

गुल नहीं खिला सकी ब्राह्मण नेताओं की फौज
ब्राह्मण मतों में सेंध लगाने के लिए सपा ने भी ब्राह्मण नेताओं की फौज उतारी। पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय पूरे समय जनसंपर्क में जुटे रहे। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, प्रदेश महासचिव व पूर्व विधायक जयशंकर पांडेय, पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी आदि नेताओं ने जनसंपर्क किया, लेकिन ब्राह्मण मतदाता टस से मस नहीं हुए। वहीं, क्षत्रिय मतों को साधने के लिए सुल्तानपुर के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू भी लगातार जनसंपर्क करते रहे, लेकिन कोई करिश्मा नहीं दिखा सके।
 
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