बनने से पहले ही कमजोर हुआ मोदी विरोधी मोर्चा
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सपा नेता जनता परिवार के छह दलों का विलय कर नई पार्टी बनाने को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं दिख रहे। उन्हें लगता है कि इस विलय से कोई खास सियासी लाभ होने वाला नहीं है।
बिहार में सपा का जनाधार नहीं है तो यूपी में लालू का राष्ट्रीय जनता दल और नीतीश का जनता दल (यू) खाली हाथ हैं। ऐसे में जनता परिवार की एकता को ग्रहण लग सकता है।
पिछले तीन महीने से जनता परिवार का हिस्सा रहे राजनीतिक दलों की एकता की कोशिशें चल रही हैं। फिलहाल छह दलों को मिलाकर समाजवादी जनता दल नाम से नई पार्टी के गठन की कवायद जारी है। इनमें सपा का यूपी में, जद (यू) और राजद का बिहार, जद (एस) का कर्नाटक तथा इनेलो का हरियाणा में जनाधार है। समाजवादी जनता दल का विशेष जनाधार नहीं है।
इन छह दलों का विलय कर नई पार्टी बनाने के लिए सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव अधिकृत किए गए हैं। इन दलों के नेताओं की दो-तीन दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं।
शनिवार को सपा मुखिया ने दिल्ली स्थित निवास पर जद यू और राजद नेताओं के साथ बैठक की थी। सोमवार को वे राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इनेलो नेता ओमप्रकाश चौटाला से मिलने भी गए।
बिहार के विधानसभा चुनाव हैं बड़ा मुद्दा
जद एस मुखिया देवगौड़ा से भी मिलने का उनका कार्यक्रम है। भले ही मुलायम के पौत्र तेजप्रताप सिंह और लालू यादव की बेटी राजलक्ष्मी जल्द ही विवाह बंधन में बंधने जा रहे हों लेकिन जनता परिवार के नए गठबंधन को लेकर सपा में बहुत ज्यादा उत्साह नहीं है।
वे ऑफ द् रिकॉर्ड कहते हैं, बिहार में इसी साल चुनाव होने हैं। सपा का वहां जनाधार नहीं है। यूपी में लालू और नीतीश का असर नहीं है। ऐसे में सपा को विलय से क्या लाभ होगा?
हालांकि, दिल्ली में सपा नेता रामगोपाल यादव ने गुरुवार को कहा कि जनता परिवार के विलय में कोई बाधा नहीं है। देर-सवेर विलय की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
पहले हो सकता है लालू-नीतीश की पार्टियों का विलय
ऐसा माना जा रहा है कि जनता परिवार की एकता से पहले लालू और नीतीश साथ आ सकते हैं।
राजद और जद यू का विलय करके नई पार्टी बनाई जा सकती है। इसी साल चुनाव के चलते बिहार के नेताओं को विलय की जल्दबाजी है। दोनों दलों का विलय करके वे साझी सरकार बना सकते हैं।