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सेहत की बात: बांझपन के मामलों में आधे पुरुष, नसों में सूजन बड़ी वजह; इलाज से हो सकती है ठीक
Tue, 21 Jul 2026 03:30 PM IST
Bhupendra Singh
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Tue, 21 Jul 2026 03:30 PM IST
सार
बांझपन के मामलों में आधे पुरुष हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की इंफर्टिलिटी क्लीनिक में आए पुरुषों की जांच में यह खुलासा हुआ है। अंडकोष की नसों में सूजन की वजह से शुक्राणु न बनने की समस्या होती है। यह इलाज से ठीक हो सकती है।
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बांझपन के मामलों में आधे पुरुष। (सांकेतिक)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
बांझपन के हर दूसरे मामले में पुरुष जिम्मेदार होते हैं। पुरुष बांझपन में शुक्राणुओं की कमी एक बड़ा कारण है और आधे मामलों की वजह अंडकोष की नसों में सूजन (वैरिकोसील) है। इसका इलाज भी संभव है। राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की इंफर्टिलिटी क्लीनिक में आए पुरुषों पर हुए अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। इसे स्प्रिंगर नेचर के क्यूरस जर्नल के ताजा अंक में स्थान मिला है।
यह अध्ययन डॉ. मालविका मिश्रा और डॉ. शुभी श्रीवास्तव ने किया। अध्ययन में बांझपन से जूझ रहे 90 पुरुषों शामिल किया गया। इनमें 45 पुरुष वैरिकोसील से पीड़ित थे और 45 में यह समस्या नहीं थी। अध्ययन में पाया गया कि वैरिकोसील वाले पुरुषों में शुक्राणु पूरी तरह न बनने (एजोस्पर्मिया) की समस्या 46.7 प्रतिशत रही, जबकि अन्य पुरुषों में यह मात्र 20 प्रतिशत थी। इसी तरह शुक्राणुओं की संख्या कम होने (ओलिगोजोस्पर्मिया) की समस्या 60 प्रतिशत मरीजों में मिली, जबकि नियंत्रण समूह में यह 35.6 प्रतिशत ही थी।
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यह अध्ययन डॉ. मालविका मिश्रा और डॉ. शुभी श्रीवास्तव ने किया। अध्ययन में बांझपन से जूझ रहे 90 पुरुषों शामिल किया गया। इनमें 45 पुरुष वैरिकोसील से पीड़ित थे और 45 में यह समस्या नहीं थी। अध्ययन में पाया गया कि वैरिकोसील वाले पुरुषों में शुक्राणु पूरी तरह न बनने (एजोस्पर्मिया) की समस्या 46.7 प्रतिशत रही, जबकि अन्य पुरुषों में यह मात्र 20 प्रतिशत थी। इसी तरह शुक्राणुओं की संख्या कम होने (ओलिगोजोस्पर्मिया) की समस्या 60 प्रतिशत मरीजों में मिली, जबकि नियंत्रण समूह में यह 35.6 प्रतिशत ही थी।
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15 फीसदी पुरुषों में समस्या
डॉ. मालविका मिश्रा के अनुसार वैरिकोसील की समस्या आम पुरुष आबादी में करीब 15 फीसदी तक हो सकती है। वैरिकोसील जितनी गंभीर होती है, शुक्राणुओं की गुणवत्ता पर उसका असर भी उतना ज्यादा पड़ता है। कलर डॉप्लर अल्ट्रासाउंड से इस बीमारी की सटीक पहचान की जा सकती है। समय रहते जांच और उचित उपचार कराने से काफी मरीजों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार संभव है।
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कब कराएं बांझपन की जांच
अगर एक वर्ष तक नियमित और असुरक्षित दांपत्य जीवन के बावजूद गर्भधारण नहीं हो रहा है तो केवल महिला ही नहीं, पुरुषों को भी जांच करानी चाहिए। कई पुरुष संकोच या जागरूकता की कमी के कारण जांच नहीं कराते, जिससे उपचार में देरी हो जाती है।पुरुष बांझपन के प्रमुख कारण
- वैरिकोसील (अंडकोष की नसों का फूलना)
- शुक्राणुओं की संख्या या गुणवत्ता में कमी
- धूम्रपान, शराब और नशीले पदार्थों का सेवन
- मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता
- मधुमेह, हार्मोन संबंधी गड़बड़ी
- जननांगों में संक्रमण