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Lucknow News: नियमों को ताक पर रख निजी अस्पतालों में बिक रहीं दवाएं

Mon, 05 Oct 2026 02:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 02:48 AM IST
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Medicines being sold in private hospitals in violation of rules.
लखनऊ। निजी अस्पतालों की आड़ में शहर में लगभग 200 मेडिकल स्टोर अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। बड़े और मझोले अस्पतालों को छोड़कर अधिकांश के पास मेडिकल स्टोर का लाइसेंस नहीं है। निजी अस्पताल में बने इन मेडिकल स्टोरों से मरीजों को बिना बिल के दवाएं बेची जी रही हैं। स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के अधिकारी पंजीकृत मेडिकल स्टोरों की संख्या तक नहीं बता पा रहे हैं।
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सीएमओ कार्यालय के अधीन 1000 से अधिक निजी अस्पताल चल रहे हैं। इनमें से ज्यादातर के पास मेडिकल स्टोर संचालन के लिए लाइसेंस नहीं है या उनका नवीनीकरण नहीं हुआ है। ऐसे में अस्पताल अवैध तरीके से मेडिकल स्टोर चला रहे हैं। यहां कंपनी के सप्लायरों के माध्यम से दवाएं पहुंचती हैं। मरीजों को अस्पताल के परचे पर ही दवाओं का बिल दिया जाता है। दवाओं की बिक्री प्रिंट रेट पर होती है जबकि उनकी वास्तविक कीमत बहुत कम होती है। इस प्रकार अस्पताल संचालक मरीजों की जेब और सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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दुबग्गा-कुर्सी रोड पर भरमार दुबग्गा क्षेत्र में करीब 150 निजी अस्पताल और क्लीनिक संचालित हैं। इनमें से कुछ बड़े संस्थानों को छोड़कर अधिकांश के पास मेडिकल स्टोर का लाइसेंस नहीं है। गुडंबा कुर्सी रोड, डालीगंज, मड़ियांव आईआईएम रोड, बीकेटी रोड, काकोरी, माल, मलिहाबाद, मोहनलालगंज और गोसाईंगंज में भी ऐसे ही बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर चल रहे हैं। इन अवैध मेडिकल स्टोरों में जीएसटी की कटौती नहीं की जाती है। ये हर माह लाखों रुपये के जीएसटी का गबन कर जाते हैं।
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विभाग के पास रिकॉर्ड तक नहीं एएफएसडीए के अधिकारियों के पास निजी अस्पतालों में चल रहे मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस का कोई रिकॉर्ड नहीं है। सहायक मंडल आयुक्त ब्रजेश ने बताया कि संचालक अस्पताल के नाम से लाइसेंस लेने के बजाय दूसरे नाम से जारी करा लेते हैं। इस कारण अवैध मेडिकल स्टोरों की पहचान मुश्किल हो जाती है। गहन जांच के बाद ही ऐसे अवैध स्टोरों का पता चल पाएगा।

जारी है टालामटोल
निजी अस्पतालों में खुले मेडिकल स्टोरों का एफएसडीए के पास अलग से कोई रिकॉर्ड नहीं है। एफएसडीए के पास सभी थोक और फुटकर दवा विक्रेताओं के लाइसेंस का रिकॉर्ड मौजूद है। एफएसडीए के ड्रग इंस्पेक्टर इस मामले को स्वास्थ्य विभाग के पास रिकॉर्ड होने का हवाला देकर टाल देते हैं और स्वास्थ्य विभाग ड्रग विभाग पर मामला डाल देता है।



सीएमओ डॉ. एनबी सिंह के अनुसार, विभाग के पास निजी अस्पताल-क्लीनिक के पंजीकरण का अधिकार है। अस्पताल की फार्मेसी का लाइसेंस ड्रग विभाग से जारी होता है।
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