मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वालों को सरकारी अस्पतालों में करना होगा काम, भरवाया जाएगा बांड
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शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में बेपटरी हो चुकी चिकित्सा सेवा को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला किया है। अब उन छात्रों के लिए दो साल तक सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज करना अनिवार्य कर दिया गया है, जो सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पढ़ाई पूरी करेंगे। इससे संबंधित प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। प्रस्ताव के मुताबिक प्रवेश के समय ही छात्रों से दो साल की सेवा का बांड भरवाया जाएगा।
प्रदेश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज या विश्वविद्यालय में एमबीबीएस, बीडीएस, एमडी व एमएस, किसी स्नातकोत्तर व पीजी डिप्लोमा कोर्स और सुपर स्पेशियलिटी कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्रों से सरकार दो साल का बांड भरवाएगी।
इसमें यह अनिवार्य किया गया है कि संबंधित कोर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे शासकीय सेवक की तरह दो साल तक ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं देंगे। बांड के तहत मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को सीएचसी तथा पीएचसी में अपनी सेवा अनिवार्य रूप से देनी होगी।
बांड तोड़ने पर 20 लाख से 1 करोड़ तक हर्जाना
किसी कोर्स में प्रवेश लेने से पहले भरवाए जाने वाले दो साल के बांड का उल्लंघन करने पर छात्रों से भारी हर्जाना वसूला जाएगा। चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने बताया कि बांड की शर्तों के मुताबिक एमबीबीएस व बीडीएस समेत स्नातक कोर्स के लिए 20 लाख, पीजी डिप्लोमा कोर्स केलिए 30 लाख, पीजी डिग्री कोर्स के लिए 40 लाख और सुपर स्पेशियलिटी कोर्स के छात्रों को बांड की शर्त तोड़ने पर 1 करोड़ रुपये चुकाने होंगे।
अब तक यह थी व्यवस्था
अब तक की व्यवस्था में यह शर्त सिर्फ उन एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉक्टरों के लिए थी जो सरकारी सेवा में चयन होने केबाद एमडी या एमएस करना चाहते थे। दरअसल, इन डॉक्टरों को सरकारी खर्च पर स्नातकोत्तर कोर्स कराया जाता है। इसलिए सरकार उनसे एक साल का बांड भरवाती थी। इसमें शर्त थी कि वे एमडी या एमएस करने के बाद एक साल तक ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में अनिवार्य रूप से अपनी सेवाएं देंगे। सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव किया है।