फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Mayawati replied back to ramdas athawale.

बौद्घ धर्म अपनाने की सलाह पर भड़क उठीं मायावती, दिया करारा जवाब

Sat, 30 Jul 2016 10:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 30 Jul 2016 10:50 PM IST
विज्ञापन
Mayawati replied back to ramdas athawale.
बसपा सुप्रीमो मायावती - फोटो : amar ujala

बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बौद्ध धर्म अपनाने की आरपीआई नेता व केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की सलाह पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है। उन्होंने कहा कि गुलाम मानसिकता वाले अठावले भाजपा के हाथों में खेल रहे हैं। उनका बयान डॉ. अंबेडकर के मानवतावादी मूवमेंट के प्रति अज्ञानता का नतीजा है।

विज्ञापन


मायावती ने कहा कि अठावले को भाजपा के बहकावे में आकर बौद्ध धर्म अपनाने के संबंध में बाबा साहब की भावना को आहत करने वाली बात नहीं बोलनी चाहिए। उन्हें दलितों को अपने पांव पर खड़ा होकर अपने नेतृत्व में आगे बढ़ने के संघर्ष में बाधा नहीं बनना चाहिए।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दलितों के वोटों को बांटकर गुलाम बनाए रखने की मानसिकता के तहत ही गुलाम मानसिकता के कुछ लोगों को मंत्री बनाया है। इनमें रामदास अठावले एक हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्हें इस बात का गहन अध्ययन करना चाहिए कि डॉ. अम्बेडकर ने काफी सालों पहले तहैया करने के बावजूद अपने देहांत के ठीक पहले ही बौद्ध धर्म को अपनाने का संकल्प क्यों पूरा किया था?

'कांशीराम ने वही रणनीति अपनाई जो अंबेडकर की ‌थी'

Mayawati replied back to ramdas athawale.

उन्होंने कहा कि कांशीराम ने जीवन भर लोगों को जागरूक करने का काम किया। डॉ. अंबेडकर के सपनों को साकार करते हुए देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सत्ता की मास्टर चाबी अपने हाथ में लेकर सरकार बनाई। उन्होंने भी बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के मामले में वही रणनीति अपनाई जो डा. अंबेडकर ने अपनाई थी।

उन्होंने कहा, कांशीराम लोगों को जागरूक बनाने में लगे रहे ताकि सही समय पर जब उनकी उत्तराधिकारी (मायावती) जब बौद्ध धर्म अपनाएं तो देश भर के करोड़ों लोग उनका अनुसरण करें। ताकि यह घटना एक इतिहास बने और देश में सामाजिक परिवर्तन के वास्तविक युग की शुरूआत हो।

धर्म की आड़ में राजनीति कर रही भाजपा
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि भाजपा को आने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी बाजी हारती हुई साफ  नजर आ रही है। इस कारण अब वह धर्म की आड़ में राजनीति करने का प्रयास कर रही है।

पर्दे के पीछे से ‘बौद्ध धर्म यात्रा’ शुरू की है। इसके जबरदस्त विरोध को देखते हुए अब भाजपा ने गुलामी की मानसिकता रखने वाले कुछ दलित व पिछड़े वर्ग के नेताओं को आगे करके अपनी स्वार्थ की राजनीति शुरू कर दी है।

गौरक्षा के नाम पर दलित उत्पीड़न क्या जायज है?

Mayawati replied back to ramdas athawale.

मायावती ने कहा कि बौद्ध धर्म के मानवतावादी लक्ष्यों को प्राप्त करना, बौद्ध धर्म के उपदेशों पर चलना ज़्यादा जरूरी है। बौद्ध धर्म की प्रशंसा तो आरएसएस व उसके स्वयंसेवक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी राजनीतिक स्वार्थवश हमेशा करते हैं। लेकिन, वह बौद्ध धर्म के ठीक विपरीत काम कर रहे हैं।

लोगों का शोषण व अत्याचार करने वालों को संरक्षण देते हैं। उन्होंने अठावले से पूछा है कि गुजरात के ऊना में गौरक्षा के नाम पर दलितों का उत्पीड़न या हत्या करना क्या जायज है?

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed