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सूबे में एक बार फिर विवाह पंजीकरण को अनिवार्य करने की कवायद चल रही है। इसके लिए महिला कल्याण विभाग प्रस्ताव को अंतिम रूप दे रहा है।
इस पर वित्त, न्याय, कार्मिक, पंचायतीराज, नगर विकास सहित सभी संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया जा रहा है।
ताकि इस प्रस्ताव को कैबिनेट में रखा जा सके। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद सूबे में विवाह पंजीकरण कराना अनिवार्य हो जाएगा।
अखिलेश सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले विवाह पंजीकरण अनिवार्य करने की तैयारी शुरू की थी।
विरोध में है मुस्लिम समुदाय
लेकिन चुनाव में नफा-नुकसान का आकलन करते हुए इसे फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया। दरअसल मुस्लिम समुदाय इस पंजीकरण का विरोध कर रहा है।
विवाह पंजीकरण अनिवार्य होने के बाद जब लोग पंजीकरण नहीं कराएंगे तो सरकार को उनके खिलाफ सरकार कार्रवाई करनी होगी। ऐसे में सरकार लोस चुनाव में कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती थी।
लिहाजा तत्कालीन मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने विवाह पंजीकरण अनिवार्यता के प्रस्ताव को चुनाव खत्म होने तक ठंडे बस्ते में रखने के निर्देश दिए थे।
अब चुनाव भी खत्म हो गए हैं और मुख्य सचिव भी बदल चुके हैं। नतीजतन विभाग ने एक बार विवाह पंजीकरण की अनिवार्यता की कवायद शुरू कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट का भी है दबाव
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2006 में सभी राज्यों को विवाह पंजीकरण अनिवार्य करने के निर्देश दिए थे। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट लगातार राज्यों की मॉनीटरिंग भी कर रहा है।
लेकिन यूपी सरकार इसे लागू करने के लिए कोर्ट से लगातार समय मांग लेती है। वह हर बार कोर्ट में शपथ पत्र देकर कहती रही है कि उसके यहां इसे लागू करने की प्रक्रिया चल रही है।
लेकिन सरकार कोर्ट को कब तक यह कहती रहेगी कि कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इसलिए सरकार अब हरकत में आ गई है।
कौन सा विभाग संभालेगा जिम्मेदारी
सूबे में विवाह पंजीकरण अनिवार्य होने पर इसकी जिम्मेदारी कौन सा विभाग संभालेगा, यह तय नहीं है। फिलहाल शहरों में होने वाली कोर्ट मैरिज स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में पंजीकृत होती है।
विवाह पंजीकरण अनिवार्य किए जाने के बाद यह काम जन्म व मृत्यु पंजीकरण की तर्ज पर किया जा सकता है। इसके लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग व्यवस्था है।
शहरों में इसकी जिम्मेदारी नगर विकास विभाग और ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज विभाग के पास है।
अब सरकार को यह तय करना है कि विवाह पंजीकरण अनिवार्य करने के बाद यह काम किस विभाग को सौंपा जाए।