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शहीद पथ बना लूट-अपहरण-हादसों की डगर
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 27 Dec 2013 04:22 PM IST
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शहीद पथ राजधानी के बाशिंदों के लिए अग्निपथ बन गया है।
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अमौसी से शुरू होकर चिनहट पर खत्म होने वाला करीब 22 किलोमीटर लंबा शहीद पथ लूट, अपहरण और हादसों के लिए बदनाम होता जा रहा है। जगह-जगह पर अराजकता है। बावजूद यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नही हैं।
कानपुर रोड से फैजाबाद रोड तक शहीद पथ पहले ही खून से लथपथ था, लेकिन चिरैयाबाग के पास मंगलवार को छात्रा के अपहरण के बाद स्पष्ट हो गया है कि इस मार्ग से गुजरना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
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अमौसी से शुरू होते ही लखनऊ-कानपुर हाइवे पर अवैध मौरंग मंडी होने से दर्जनों ट्रक सड़क किनारे ही खड़े रहते हैं। यहां बने ढाबों में खुलेआम शराब परोसी जाती है।
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ट्रक चालक नशे में धुत होकर अराजकता और मारपीट करते हैं। सड़क पर फैली मौरंग और ट्रकों की लापरवाही के चलते रोज कोई न कोई हादसा होता है। ट्रैफिक और सरोजनीनगर थाना की पुलिस यहां वसूली में ही व्यस्त रहती है।
शहीद पथ के कई हिस्से सुनसान हैं, जहां सवारियों से लूटपाट की वारदातें होती हैं। शहीद पथ पर पुलिस की व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। गश्त के नाम पर भी खानापूरी होती है।
सरोजनीनगर, आशियाना, पीजीआई, गोसाईंगंज और गोमतीनगर थाना की पुलिस भी यहां सक्रियता से ड्यूटी निभाने के बजाए वसूली में व्यस्त रहती है।
पुलिस ने भगवान भरोसे छोड़ा
कहने को शहीद पथ पर छह चौकी हैं, लेकिन सिर्फ रमाबाई स्थल की चौकी ही मेन रोड पर है। बाकी चौकियां शहीद पथ से दूर हैं। इनमें भी पुलिस शायद ही कभी नजर आती हो।
पीजीआई थाना क्षेत्र की रमाबाई चौकी, एल्डिको और साउथ सिटी, गोसाईंगंज की अहिमामऊ चौकी, गोमतीनगर की हुसेड़िया और चिनहट की कमता चौकी की पुलिस से लोगों को मदद की कोई उम्मीद नहीं है।
गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के उतरेठिया में एक पिकेट लगती है, लेकिन इसका भी हाइवे से कोई लेनादेना नहीं है। अहिमामऊ के ऊपरी हिस्से पर भी सन्नाटा रहता है।
सिर्फ एक इंटरसेप्टर पूरे शहीद पथ के लिए है, जिसके लिए गश्त करना संभव नहीं है। इस मार्ग पर लगभग रोजाना गंभीर हादसे होते हैं। बावजूद घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एक एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं की गई है।
अवैध कट और डिवाइडर बने जान के दुश्मन
शहीद पथ पर बने अवैध कट और डिवाइडर जानलेवा साबित हो रहे हैं। औरंगाबाद गांव, उतरेठिया, रमाबाई चौकी, सेक्टर सात, अंसल एपीआई सहित दर्जनों ऐसे स्थान हैं, जहां की दीवारें टूटी हुई हैं।
ग्रामीणों ने शहीद पथ पर उतरने के लिए यह दीवारें तोड़ दी हैं। इन अवैध कट से अचानक सड़क पर ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहन शहीद पथ पर आ जाते हैं। कई बार पीछे से आ रहे तेज रफ्तार वाहन इनसे टकरा चुके हैं।
स्पीड ब्रेकर के न होने से शहीद पथ पर वाहन अंधाधुंध गति से चलते हैं। अवैध कट के चलते शहीद पथ पर चलने वालों को सतर्क रहना पड़ता है। पलक झपकते ही यह अवैध कट हादसे का सबब बन जाते हैं। अपनी सुविधा के लिए लोगों ने डिवाइडर भी बीचबीच में तोड़ दिए हैं।
इंटरसेप्टर में तैनात दरोगा आनंद ओझा बताते हैं कि डिवाइडर का गैप कई किमी लंबा है, जिससे अनजाने में गलत दिशा में जाने वालों की मुसीबत रहती है। एक तरफ से दूसरी तरफ जाने के लिए उन्हें कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। ज्यादातर हादसे इसी कारण होते हैं।
एसयूवी के लिए डिवाइडर बना खेल
शहीद पथ पर बने डिवाइडर लगभग छह से आठ इंच ऊंचे हैं। इन डिवाइडरों से गलत दिशा में घुसे स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) आराम से फांद जाते हैं। कई बार रईसजादे खिलवाड़ में एसयूवी डिवाइडर से इधर से उधर फंदाते रहते हैं। इससे सामान्य वाहन चालकों को खतरा रहता है।
सर्विस लेन न होने से टू व्हीलर की मुसीबत
शहीद पथ पर कहीं भी सर्विस लेन नहीं है। दोपहिया-तिपहिया सभी प्रकार के वाहन एक साथ ही चलते हैं। सर्विस लेन न होने से साइकिल और अन्य दोपहिया वाहन चालकों को हमेशा तेज रफ्तार ट्रक व अन्य बड़े वाहनों से संकट रहता है।