राफेल में हुआ आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला : मनप्रीत सिंह बादल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि केंद्र सरकार ने राफेल विमान सौदे के मामले देश की जनता के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट और संसद को भी गुमराह किया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट उन तथ्यों पर ही अपना फैसला सुनाता है, जो उसके सामने रखे गए हों।
रक्षा मंत्रालय ने गलत तथ्यों को कोर्ट के समक्ष रखा था, इसलिए उसी आधार पर कोर्ट का फैसला आया है। जिसे भाजपा व केंद्र सरकार क्लीनचिट मान रही है। अगर केंद्र सरकार मानती है इसमें किसी तरह का घोटाला नहीं हुआ है तो संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन कर पूरे मामले की जांच कराए।
राफेल को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत लखनऊ पहुंचे पंजाब के वित्त मंत्री बृहस्पतिवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश का सबसे रक्षा घोटाला राफेल विमान खरीद है।
जिस विमान को कांग्रेस सरकार ने 560 करोड़ रुपये में खरीदने के लिए निविदा आमंत्रित की थी, उसी विमान को भाजपा नीति सरकार ने 1670 करोड़ रुपये में खरीदा है। सरकार को यह बताना चाहिए कि करीब तीन गुना महंगी कीमत पर जो विमान खरीदा गया है, उस विमान की गुणवत्ता, उपकरण आदि में क्या कोई बदलाव किया गया है?
उन्होंने कहा कि आजादी केबाद से ही रक्षा मंत्रालय द्वारा खरीदे जाने वाले विमानों के रखरखाव की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार के उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की होती थी, लेकिन इस बार पहली बार केन्द्र सरकार ने यह जिम्मेदारी मात्र 13 दिन पुरानी रिलायंस कंपनी को दिया है। इससे सरकार को करीब 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। केंद्र सरकार को जनता को इस फैसले की वजह भी बतानी चाहिए।
1000 से अधिक बार हो चुका है जीएसएटी कानून में बदलाव
पंजाब के वित्त मंत्री ने जीएसटी और नोटबंदी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिना तैयारी के किसी भी कानून को लागू करने का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। नकल करने का भी तरीका आना चाहिए। केन्द्र सरकार ने आनन-फानन में व्यवहारिक दिक्कतों का अध्ययन किए बगैर ही जीएसटी कानून को लागू कर दिया। यही वजह है कि अब तक करीब 1000 से अधिक बार इस कानून में संशोधन किया जा चुका है। जाते-ताजे कई और संशोधन होने की संभावना है। इसी तरह नोटबंदी करके भी जनता को मुसीबत में डाल दिया गया। आने वाले चुनाव में जनता को इस तरह कार्यों का हिसाब देना होगा। केन्द्र के इन दोनों फैसलों से देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दर में गिरावट आई है।