सांसद मनोज तिवारी ने किए मनकामेश्वर मंदिर में दर्शन
- अध्यक्ष पद के लिए भी लॉबिंग तेज
- केंद्रींय नेतृत्व तिवारी को हटाने के मूड में नहीं
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दिल्ली भाजपा अध्यक्ष व भोजपुरी कलाकार मनोज तिवारी ने भी महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवालय में माथा टेका। शुक्रवार को उन्होंने अपने समर्थकों के साथ लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर पहुंच भगवान शिव की आराधना की।इस दौरान मंदिर के पुजारी ने उन्हें फूलमाला पहनाकर व प्रसाद देकर आशीर्वाद दिया।
जलाभिषेक के बाद तिवारी ने कहा कि महादेव सबको सद्बुद्धि दे। साथ ही उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र विरोधी हैं उनको सद्बुद्धि मिले। तिवारी यहां वीआईपी के रूप में नहीं बल्कि आम भक्त की तरह ही कतार में लगकर पहुंचे थे। गौरतलब है कि बीते दिनों दिल्ली विधानसभा के चुनावी रण में तिवारी अपने बयानों को लेकर काफी चर्चा में रहे थे। यही कारण था कि चुनावी नतीजे आने के बाद विपक्षी पार्टियों ने भी उनके बयानों को लेकर तिवारी को जमकर घेरा था।
केंद्रीय नेतृत्व मनोज तिवारी को हटाने के मूड में नहीं, प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए लॉबिंग तेज
दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भाजपा अब संगठन मजबूत करने की कवायद में जुट गई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी का कार्यकाल समाप्त होने की वजह से नए अध्यक्ष पद के लिए भी लॉबिंग तेज हो गई है। कई नेता इस पद के लिए अपनी जुगत लगा रहे हैं। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल वर्तमान अध्यक्ष मनोज तिवारी को हटाने के मूड में नहीं दिख रहा है।
चुनाव परिणाम के बाद मनोज तिवारी ने भी साफ कर दिया था कि न तो उन्हें केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से पद छोड़ने के लिए कहा गया है और न ही उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की है। राजनीतिक विश्लेषक इसके कई मायने निकाल रहे हैं।
सूत्रों का कहना है दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रदेश के अलावा केंद्रीय नेतृत्व भी पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में उतरी थी। ऐसे में सिर्फ प्रदेश नेतृत्व पर हार का ठीकरा नहीं फोड़ा जा सकता। तिवारी के नेतृत्व में भाजपा ने एमसीडी और लोकसभा चुनाव में जीत का परचम फहराया था।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, मनोज तिवारी अपनी टीम में फेरबदल कर दूसरी पारी शुरू कर सकते हैं। दरअसल, तिवारी को अगर प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाता है तो उन्हें दूसरी बड़ी जिम्मेदारी देनी होगी। क्योंकि, वह पार्टी के स्टार प्रचारक हैं और दिल्ली में पूर्वांचली चेहरा भी हैं। हालांकि, विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद चल रहे मंथन के बाद ही पार्टी यह तय करेगी कि दिल्ली का कमान किसे सौंपा जाए। वहीं, एमसीडी चुनाव में अभी दो साल बचे हैं।