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डीजल चोरी की जांच से असंतुष्ट प्रबंध निदेशक
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डीजल चोरी की जांच से असंतुष्ट प्रबंध निदेशक
परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक धीरज साहू लखनऊ में चारबाग, कैसरबाग और हैदरगढ़ डिपो में डीजल चोरी की स्थानीय स्तर पर हुई जांच और कार्रवाई से असंतुष्ट हैं।
प्रबंध निदेशक इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने पर विचार कर रहे हैं। प्रबंध निदेशक लखनऊ जोन के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक वित्त की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
प्रबंध निदेशक के इस कदम से उन डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों की हवाइयां उड़ गईं जो कार्यशाला कर्मियों के साथ में साठगांठ करके बस के डीजल के औसत का खेल करके डीजल बिकवा रहे थे। प्रबंध निदेशक ने इस डीजल चोरी प्रकरण में एक अफसर से विस्तार से जानकारी भी हासिल की है।
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यह है मामला
कैसरबाग, चारबाग और हैदरगढ़ डिपो की बसों ने जनवरी और अप्रैल में एनआरसी आंदोलनकारियों और करोना के दौरान श्रमिकों को सफर कराया था। इस दौरान जो बसें वर्कशॉप से डीजल लेकर जाती थीं तो चालक वापस आने से पहले उसमें डीजल की हेरा फेरी करते थे। चालक कार्यशाला कर्मियों की साठगांठ से डीजल बेच रहे थे, लेकिन खुलासे पर सिर्फ 27 चालकों को बर्खास्त किया गया और 13 चालकों से रिकवरी के आदेश दिए गए, लेकिन जो कार्यशाला के कर्मचारी इन इस खेल में शामिल थे उनको अफसरों ने बख्श दिया है।
कैसरबाग में सबसे अधिक गड़बड़ी
परिवहन निगम मुख्यालय के एक अफसर ने बताया कि डीजल चोरी के दौरान जांच करने और कार्रवाई करने में सबसे ज्यादा गड़बड़ी कैसरबाग डिपो में की गई। एक तो सात महीने तक जांच को दबाए रखा, उसके बाद डीजल चोरी का न तो सही आकलन किया गया और न ही जुर्माने का। इस दौरान कई चालकों को बचाया भी गया है। इसे प्रबंध निदेशक एक सतही जांच मान रहे हैं।
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परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक धीरज साहू लखनऊ में चारबाग, कैसरबाग और हैदरगढ़ डिपो में डीजल चोरी की स्थानीय स्तर पर हुई जांच और कार्रवाई से असंतुष्ट हैं।
प्रबंध निदेशक इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने पर विचार कर रहे हैं। प्रबंध निदेशक लखनऊ जोन के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक वित्त की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
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प्रबंध निदेशक के इस कदम से उन डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों की हवाइयां उड़ गईं जो कार्यशाला कर्मियों के साथ में साठगांठ करके बस के डीजल के औसत का खेल करके डीजल बिकवा रहे थे। प्रबंध निदेशक ने इस डीजल चोरी प्रकरण में एक अफसर से विस्तार से जानकारी भी हासिल की है।
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यह है मामला
कैसरबाग, चारबाग और हैदरगढ़ डिपो की बसों ने जनवरी और अप्रैल में एनआरसी आंदोलनकारियों और करोना के दौरान श्रमिकों को सफर कराया था। इस दौरान जो बसें वर्कशॉप से डीजल लेकर जाती थीं तो चालक वापस आने से पहले उसमें डीजल की हेरा फेरी करते थे। चालक कार्यशाला कर्मियों की साठगांठ से डीजल बेच रहे थे, लेकिन खुलासे पर सिर्फ 27 चालकों को बर्खास्त किया गया और 13 चालकों से रिकवरी के आदेश दिए गए, लेकिन जो कार्यशाला के कर्मचारी इन इस खेल में शामिल थे उनको अफसरों ने बख्श दिया है।
कैसरबाग में सबसे अधिक गड़बड़ी
परिवहन निगम मुख्यालय के एक अफसर ने बताया कि डीजल चोरी के दौरान जांच करने और कार्रवाई करने में सबसे ज्यादा गड़बड़ी कैसरबाग डिपो में की गई। एक तो सात महीने तक जांच को दबाए रखा, उसके बाद डीजल चोरी का न तो सही आकलन किया गया और न ही जुर्माने का। इस दौरान कई चालकों को बचाया भी गया है। इसे प्रबंध निदेशक एक सतही जांच मान रहे हैं।