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देश के सबसे बूढ़े बाघ ‘गुड्डू किलर’ ने कहा अलविदा
आशुतोष मिश्रा/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 17 Jan 2014 11:22 AM IST
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कानपुर जू में गुरुवार को अंतिम सांस लेने वाले 26 साल के बाघ ‘गुड्डू किलर’ से कभी लखनऊ जू थर्राता था।
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जानकारों का मानना है कि पूरे एशिया में किसी प्राणि उद्यान में इतनी उम्र तक कोई बाघ नहीं जी सका।
लखनऊ जू में रहने के दौरान बाघिन शेफाली को मार डालने और एक को गंभीर रूप से घायल करने के कारण ही उसे यह टाइटिल मिला था।
लगातार आठ सालों तक लखनऊ जू में अपने दबदबे से पहचाना जाने वाला गुड्डू 2009 में यहां से कानपुर भेजा गया था।
गुड्डू की मौत से यहां उसका खयाल रखने वाले कीपर और उसके चहेते दुखी नजर आए। गुड्डू को दरअसल पहले चंडीगढ़ से कानपुर जू लाया गया था। कानपुर में भी उसने एक बाघिन को मार डाला था।
अप्रैल 2001 में उसे लखनऊ जू लाया गया था। जोड़े के प्रति बेहद आक्रामक तेवर वाले गुड्डू को यहां टाइगर हाउस में रखा गया था।
एक दिन उसने बगल की कोठरी में रखी बाघिन तारा पर सीखचों के अंदर से ही हमला कर दिया। तारा इस हमले के बाद अपंग हो गई थी।
तारा पर हमले के बाद हालांकि जू प्रशासन सतर्क हो चला था। उसे बाघिन शेफाली के साथ लाया गया तो उसने हमला बोल उसकी जान ले ली।
सालों तक गुड्डू की देखभाल करने वाले टाइगर हाउस के रिटायर्ड कीपर वारिस बताते हैं कि इसके बाद उसे हमेशा के लिए अलग कर दिया गया।
उसके साथी के प्रति बेहद आक्रामक रुख के कारण ही उसे ‘गुड्डू किलर’ नाम मिला। कानपुर जू में बाघों का बाड़ा खाली होने के कारण एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत लाए गए गुड्डू को वापस वहां भेज दिया गया।
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कीपर भी दुखी
गुड्डू की बरसों तक देखभाल वाले कीपर उसकी मौत की खबर सुनकर दिन भर उदास रहे। गुड्डू का यहां वारिस, जलील, रामवीर बेहद खयाल रखते थे।
पूर्व मुख्य सुरक्षा प्रभारी नियाज ने बताया कि दर्शक गेट पर आने से पहले अक्सर मुझसे ही उसके बारे में पूछा करते थे, ये उसका क्रेज था।
पूरे एशिया में नहीं सुनी इतनी लंबी उम्र
दशकों से वाइल्ड लाइफ क्षेत्र में एक्टिव उत्तराखंड वाइल्ड लाइफ बोर्ड के मेंबर रहे कौशलेंद्र सिंह की मानें तो प्राणि उद्यानों में 26 साल तक किसी बाघ के जीने की मिसाल भारत ही क्या पूरे एशिया में नहीं सामने आई।
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उन्होंने बताया कि बाघ औसतन 18-20 सालों तक ही जी पाते हैं। जंगलों में रहने केदौरान आयु और घटती है। हालांकि जानकारों का कहना है कि 1992 में लखनऊ जू में ही मोहन बाघ की करीब 24 साल की उम्र में मौत हुई थी।
फिलहाल किशन का दबदबा
गुड्डू के जाने के बाद से लखनऊ जू में किशन ने अपना दबदबा बनाया है। किशनपुर रेंज से वर्ष 2009 से पकड़कर आए इस आदमखोर बाघ को वहीं रखा गया है जहां कभी गुड्डू रहता था।
किशन भी इस कदर खूंखार है कि उसके नजदीक किसी भी बाघ या बाघिन को कभी नहीं छोड़ा गया।
अभी जू में 6 टाइगर
लखनऊ जू में फिलहाल 6 बाघ हैं। इनमें रॉयल बंगाल टाइगर शिशिर, किशन, बाघिन इप्शिता, जू हॉस्पिटल में रह रही मैलानी और सफेद बाघ आर्यन और सोना शामिल हैं।