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लविवि : स्वतंत्र भारत के इतिहास में अर्थशास्त्र विभाग को मिली पहली महिला मुखिया

Fri, 14 Aug 2026 02:22 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 02:22 AM IST
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Lucknow University: Economics Department gets its first female head in the history of independent India
प्रोफेसर रोली मिश्रा।
लखनऊ। स्वतंत्र भारत और लखनऊ विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार अर्थशास्त्र विभाग की कमान किसी महिला को मिली है। 105 साल पुराने अर्थशास्त्र विभाग में प्रो. रोली मिश्रा ने आगामी तीन वर्ष के लिए विभागाध्यक्ष का कार्यभार संभाल लिया है। इसके साथ ही विभाग में महिला नेतृत्व का नया अध्याय शुरू हुआ है।
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प्रो. रोली मिश्रा अर्थशास्त्र की विशेषज्ञ हैं और उन्होंने विभिन्न शोध कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी विशेषज्ञता और शोध अनुभव को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। कुलपति ने विवि की प्रथम परिनियमावली के प्रावधानों के तहत उनकी नियुक्ति को स्वीकृति दी है। यह पदभार आगामी तीन वर्ष की अवधि के लिए सौंपा गया है। उनका कार्यकाल अधिवर्षता आयु प्राप्ति या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, रहेगा। विश्वविद्यालय की कुलसचिव भावना मिश्रा ने इस संबंध में जानकारी दी।
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लविवि से ही पढ़ी हैं प्रो. रोली मिश्रा

गोमतीनगर निवासी प्रो. रोली मिश्रा ने लविवि से अपनी पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने 1995 में यहां से स्नातक किया था। 1997 में परास्नातक की परीक्षा पास की थी। इसके बाद 2003 में पीएचडी। फिर कानपुर डीवीएस कॉलेज में शिक्षक के पद पर सेवाएं दीं। वर्ष 2016 में लविवि में अर्थशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर जॉइन किया था।
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1921 में शुरू हुआ था अर्थशास्त्र विभाग का सफर
लखनऊ विश्वविद्यालय की आधिकारिक स्थापना 25 नवंबर 1920 को हुई थी। अर्थशास्त्र विभाग की स्थापना वर्ष 1921 में विश्वविद्यालय के औपचारिक शिक्षण की शुरुआत के साथ ही हुई थी। प्रो. राधाकमल मुखर्जी 1921 में विभाग के पहले अध्यक्ष बने थे। उनके नेतृत्व और प्रो. डीपी मुखर्जी जैसे प्रख्यात विद्वानों के मार्गदर्शन में विभाग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘लखनऊ स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड सोशियोलॉजी’ के नाम से विख्यात हुआ।

विभाग की खासियत अर्थशास्त्र को सामाजिक मूल्यों, पर्यावरण और मानव कल्याण से जोड़ने की रही। उस दौर में जब अर्थशास्त्र को मुख्य रूप से सांख्यिकी और गणितीय आंकड़ों तक सीमित माना जाता था, तब लखनऊ विश्वविद्यालय के इस विभाग ने मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखकर अध्ययन की परंपरा विकसित की। इसी परंपरा ने विभाग को वैश्विक पहचान दिलाई। आज भी विभाग अपनी ऐतिहासिक विरासत और समृद्ध परंपरा के साथ आगे बढ़ रहा है।
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