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Lucknow Triple Murder: खेल करने वाला लेखपाल अंडरग्राउंड, वारदात के बाद से ड्यूटी से नदारद, मोबाइल भी बंद
Tue, 06 Feb 2024 03:19 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 06 Feb 2024 03:19 PM IST
सार
मलिहाबाद के मोहम्मदनगर में तिहरे हत्याकांड के मामले में पुलिस मुख्य आरोपी पिता-पुत्र समेत तीन को जेल भेज चुकी है। एक अन्य की तलाश जारी है। नियम ताक पर रख पैमाइश कराने वाला लेखपाल वारदात के बाद से ड्यूटी से नदारद है। उसका मोबाइल बंद है।
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Lucknow Triple Murder
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लखनऊ के मलिहाबाद के मोहम्मदनगर में हुए तिहरे हत्याकांड में पैमाइश में खेल करने वाला लेखपाल अंडरग्राउंड हो गया है। वह वारदात के बाद से मेडिकल लगाकर गायब है। उसका मोबाइल भी बंद है। इससे उसकी संदिग्धता और पुख्ता हो रही है। फिलहाल उस पर विभागीय मेहरबानी अभी भी बरकरार है।
उधर पुलिस अब आरोपियों की मदद करने व शरण देने वालों की तलाश कर रही है। चार से पांच लोगों की भूमिका जांची जा रही है। मलिहाबाद के मोहम्मदनगर में दो फरवरी को जमीन विवाद में हिस्ट्रीशीटर लल्लन खान और उसके बेटे फराज खान ने अपने साथी फुरकान व अशरफी के साथ मिलकर फरहीन, उनके बेटे हंजला और मुनीर ताज की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
वारदात के कुछ ही घंटे बाद पुलिस ने अशरफी को गिरफ्तार कर लिया था। रविवार को लल्लन व फराज को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। फुरकान की तलाश अभी भी जारी है। वारदात के पहले दोनों पक्षों में पैमाइश के दौरान विवाद हुआ था। जिसके बाद तिहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया था।
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पुलिस व प्रशासन के संबंधित अफसरों को जानकारी दिए बगैर ही लेखपाल रघुवीर सिंह यादव पैमाइश कराने पहुंचा था। यही विवाद की जड़ बना है। सूत्रों के मुताबिक वारदात के बाद से ही लेखपाल काम पर नहीं गया। वह मेडिकल अवकाश पर है। पुलिस ने भी इस संबंध में साफ कर दिया था कि लेखपाल ने थाने में कोई सूचना नहीं दी थी। इसकी एक रिपोर्ट भी प्रशासन को भेजी गई है।
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उधर पुलिस अब आरोपियों की मदद करने व शरण देने वालों की तलाश कर रही है। चार से पांच लोगों की भूमिका जांची जा रही है। मलिहाबाद के मोहम्मदनगर में दो फरवरी को जमीन विवाद में हिस्ट्रीशीटर लल्लन खान और उसके बेटे फराज खान ने अपने साथी फुरकान व अशरफी के साथ मिलकर फरहीन, उनके बेटे हंजला और मुनीर ताज की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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वारदात के कुछ ही घंटे बाद पुलिस ने अशरफी को गिरफ्तार कर लिया था। रविवार को लल्लन व फराज को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। फुरकान की तलाश अभी भी जारी है। वारदात के पहले दोनों पक्षों में पैमाइश के दौरान विवाद हुआ था। जिसके बाद तिहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया था।
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पुलिस व प्रशासन के संबंधित अफसरों को जानकारी दिए बगैर ही लेखपाल रघुवीर सिंह यादव पैमाइश कराने पहुंचा था। यही विवाद की जड़ बना है। सूत्रों के मुताबिक वारदात के बाद से ही लेखपाल काम पर नहीं गया। वह मेडिकल अवकाश पर है। पुलिस ने भी इस संबंध में साफ कर दिया था कि लेखपाल ने थाने में कोई सूचना नहीं दी थी। इसकी एक रिपोर्ट भी प्रशासन को भेजी गई है।
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मददगारों में कई बड़े लोग, भूमिका की जांच जारी
वारदात के बाद लल्लन ने कई लोगों से संपर्क किया था। इसमें एक-दो अधिकारी, नेता व व्यापारी शामिल हैं। कुछ ने मदद की तो कुछ ने शरण दी। पुलिस को इससे संबंधित कई अहम जानकारियां मिली हैं। पुलिस इन सभी की भूमिका की जांच कर रही है। जिन-जिन के खिलाफ साक्ष्य मिलेंगे पुलिस उन पर कार्रवाई करेगी। अफसरों का कहना है कि केवल फोन करना ही पर्याप्त साक्ष्य नहीं है। जिन्होंने आरोपियों को भगाने में मदद की या शरण दी, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
वारदात के बाद लल्लन ने कई लोगों से संपर्क किया था। इसमें एक-दो अधिकारी, नेता व व्यापारी शामिल हैं। कुछ ने मदद की तो कुछ ने शरण दी। पुलिस को इससे संबंधित कई अहम जानकारियां मिली हैं। पुलिस इन सभी की भूमिका की जांच कर रही है। जिन-जिन के खिलाफ साक्ष्य मिलेंगे पुलिस उन पर कार्रवाई करेगी। अफसरों का कहना है कि केवल फोन करना ही पर्याप्त साक्ष्य नहीं है। जिन्होंने आरोपियों को भगाने में मदद की या शरण दी, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
आर्म्स एक्ट की धारा बढ़ाई
लल्लन के पास दो शस्त्र लाइसेंस हैं। 90 के दशक में डीएम ने ये लाइसेंस निरस्त कर दिए थे लेकिन कोर्ट से स्टे लेकर लल्लन ने लाइसेंस बहाल करा लिए थे। अब उसी शस्त्र लाइसेंस पर ली गई राइफल से लल्लन व फराज ने गोलियां मारकर तीन की हत्या कर दी। पुलिस ने राइफल व डीबीबीएल गन बरामद की है। केस में आर्म्स एक्ट बढ़ाया है।
लल्लन के पास दो शस्त्र लाइसेंस हैं। 90 के दशक में डीएम ने ये लाइसेंस निरस्त कर दिए थे लेकिन कोर्ट से स्टे लेकर लल्लन ने लाइसेंस बहाल करा लिए थे। अब उसी शस्त्र लाइसेंस पर ली गई राइफल से लल्लन व फराज ने गोलियां मारकर तीन की हत्या कर दी। पुलिस ने राइफल व डीबीबीएल गन बरामद की है। केस में आर्म्स एक्ट बढ़ाया है।
तीनों आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज
जमीन विवाद के चलते भतीजी समेत तीन रिश्तेदारों की हत्या करने के आरोपी सिराज खान उर्फ लल्लन, फराज और अशरफी की जमानत अर्जी को सीजीएम हृषिकेश पांडेय ने खारिज कर दिया। अभियोजन की ओर से बताया गया कि वादी फरीद अहमद ने दो फरवरी को मलिहाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि वादी दिन में अपने परिवार के साथ घर में था। तभी आरोपी सिराज खान उर्फ लल्लन, उसका पुत्र फराज, ड्राइवर अशरफी व साथी फुरकान थार गाड़ी से आए और गालियां देते हुए धमकाने लगे। वादी के चचेरे भाई मुनीर ने समझाने का प्रयास किया। इस पर लल्लन और फराज ने वादी के पुत्र हंजला, पत्नी फरहीन और मुनीर को गोली मार दी। इससे तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।
जमीन विवाद के चलते भतीजी समेत तीन रिश्तेदारों की हत्या करने के आरोपी सिराज खान उर्फ लल्लन, फराज और अशरफी की जमानत अर्जी को सीजीएम हृषिकेश पांडेय ने खारिज कर दिया। अभियोजन की ओर से बताया गया कि वादी फरीद अहमद ने दो फरवरी को मलिहाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि वादी दिन में अपने परिवार के साथ घर में था। तभी आरोपी सिराज खान उर्फ लल्लन, उसका पुत्र फराज, ड्राइवर अशरफी व साथी फुरकान थार गाड़ी से आए और गालियां देते हुए धमकाने लगे। वादी के चचेरे भाई मुनीर ने समझाने का प्रयास किया। इस पर लल्लन और फराज ने वादी के पुत्र हंजला, पत्नी फरहीन और मुनीर को गोली मार दी। इससे तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।
मामले में अभी तक नहीं आई किसी राजस्वकर्मी की भूमिका
जिलाधिकारी डॉ. सूर्यपाल गंगवार ने तिहरे हत्याकांड के आरोपी लल्लन उर्फ सिराज के दोनों शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिए। उन्होंने बताया कि हसनगंज और मलिहाबाद पुलिस से मामले में रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। अब तक पड़ताल में इस प्रकरण में किसी राजस्वकर्मी की भूमिका नहीं मिली है। अगर किसी कर्मचारी की लापरवाही पाई जाएगी तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
जिलाधिकारी डॉ. सूर्यपाल गंगवार ने तिहरे हत्याकांड के आरोपी लल्लन उर्फ सिराज के दोनों शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिए। उन्होंने बताया कि हसनगंज और मलिहाबाद पुलिस से मामले में रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। अब तक पड़ताल में इस प्रकरण में किसी राजस्वकर्मी की भूमिका नहीं मिली है। अगर किसी कर्मचारी की लापरवाही पाई जाएगी तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
डीएम का कहना है कि प्रकरण में आरोपी और पीड़ित पक्ष के बीच जमीन को लेकर कोई विवाद ही नहीं है। दोनों पक्ष एक ही परिवार के हैं और आरोपियों ने विवाद के बाद घटना को अंजाम दिया। पीड़ित पक्ष ने भी जमीन विवाद से इंकार किया है। उधर, छानबीन में सामने आया है कि सिराज ने वर्ष 1979 में डीबीबीएल गन का लाइसेंस हसनगंज से बनवाया था। एक साल बाद उसने दूसरी एनपी बोर रायफल का लाइसेंस मलिहाबाद से बनवाया।
आरोपी के हिस्ट्रीशीटर होने के बावजूद पुलिस की ओर से शस्त्र लाइसेंसों के नवीनीकरण की रिपोर्ट लगाई गई। बताया जा रहा है कि आरोपी विदेश यात्रा पर भी गया था। अब सवाल ये है कि आखिर किसकी शह पर यह सब हुआ? क्या आम आदमी पर अगर एफआईआर हो तो पुलिस शस्त्र लाइसेंस के लिए ऐसे ही रिपोर्ट लगाती? सवाल कई हैं, जिनके जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।