फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Lucknow News

Lucknow News : बेटों ने पिता को पहले घर से निकाला, अर्थी को कंधा देने से भी किया इनकार

Fri, 28 Oct 2022 10:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Fri, 28 Oct 2022 10:16 AM IST
सार

पिता को उम्मीद थी कि जीते जी न सही, मरने के बाद तो बेटों का दिल पसीजेगा। पर, निष्ठुर औलादों ने उनकी अर्थी को कंधा देने तक से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद 181 वन स्टॉप सेंटर और वृद्धाश्रम की टीम ने मानवीय धर्म निभाते हुए उनका अंतिम संस्कार करवाया।

विज्ञापन
Lucknow News
रामेश्वर प्रसाद (फाइल फोटो)

विस्तार

जिसने कंधे पर बिठाकर दुनिया दिखाई थी।

विज्ञापन

उसे कंधा देने में बेटों को शर्म आई थी।
आखिरी वक्त में घुट-घुटकर मरा था वो,
उसकी चिता को गैरों ने आग लगाई थी।


ये पंक्तियां रामेश्वर प्रसाद पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। जिनकी अंगुली पकड़कर बेटों ने चलना सीखा, शरीर से लाचार हो जाने पर उन्हें घर से निकाल दिया। 85 साल के बुजुर्ग को वृद्धाश्रम ने पनाह तो दे दी, लेकिन बेटों और बहुओं की यातनाओं को जेहन में लिए घुटते रहे रामेश्वर प्रसाद ने आखिरकार बृहस्पतिवार को दम तोड़ दिया। उम्मीद थी कि जीते जी न सही, मरने के बाद तो बेटों का दिल पसीजेगा। पर, निष्ठुर औलादों ने उनकी अर्थी को कंधा देने तक से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद 181 वन स्टॉप सेंटर और वृद्धाश्रम की टीम ने मानवीय धर्म निभाते हुए उनका अंतिम संस्कार करवाया।

181 वन स्टॉप सेंटर की मैनेजर अर्चना सिंह ने बताया कि बुजुर्ग रामेश्वर प्रसाद अस्थमा से पीड़ित थे। लगातार बीमार चल रहे थे, उनका इलाज करवाया गया, पर कोई फायदा नहीं हुआ। बृहस्पतिवार को सुबह साढ़े पांच बजे सूचना मिली कि उनका देहांत हो गया। बेटों को सूचना दी गई, लेकिन जवाब मिला कि वे नहीं आ पाएंगे। खैर दो-तीन घंटे इंतजार के बाद सेंटर के चालक दिनेश और कम्प्यूटर ऑपरेटर सुनील व एसएस वृद्धाश्रम सरोजनीनगर के स्टाफ कुलदीप द्विवेदी और आर्यन पांडे ने उनकी अर्थी को कंधा दिया। विद्युत शवदाह गृह में हिंदू रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार करवाया गया।
विज्ञापन


कमाई बंद होते ही बोझ बन गए थे पिता
शरीर और कमाई से लाचार हो जाने के बाद 85 साल के रामेश्वर प्रसाद को बेटों ने घर से निकाल दिया था। वे यूरिन बैग हाथ में पकड़े भटक रहे थे। तब उन्हें वन स्टॉप सेंटर ने वृद्धाश्रम में आश्रय दिलवाया था। सेंटर की पहल पर ही बेटों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था। बाजारखाला पुलिस ने दोनों बेटों विजय और बृजेश के खिलाफ केस दर्ज किया था। अमर उजाला ने प्रमुखता से इस खबर को प्रकाशित कर बुजुर्ग पिता की वेदना को जग जाहिर किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए पहुंच गई बहू
बेटों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है इसलिए बहू ने फोन कर रामेश्वर प्रसाद का मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा। इसके बाद बहू वृद्धाश्रम भी गई जिससे मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने के बाद बेटों पर दर्ज केस को खत्म कराया जा सके।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed