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Lucknow News : हाईकोर्ट ने कहा, आजीवन कारावास नियम है और मृत्युदंड अपवाद
Fri, 28 Oct 2022 10:07 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 28 Oct 2022 10:07 PM IST
सार
इस अहम टिप्पणी के साथ कोर्ट ने सुल्तानपुर व फैजाबाद (अब अयोध्या) के दो अलग-अलग हत्या के मामलों में सत्र अदालतों से फांसी की सजा पाए लईक व गोविंद पासी की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया।
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लखनऊ हाईकोर्ट
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने फांसी की सजा के दो अलग-अलग मामलों में दिए फैसलों में कहा कि आजीवन कारावास नियम है और मृत्युदंड अपवाद है। जब अपराध के अनुपात में वैकल्पिक उम्रकैद की सजा पूरी तरह अपर्याप्त हो तभी फांसी की सजा देनी चाहिए।
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इस अहम टिप्पणी के साथ कोर्ट ने सुल्तानपुर व फैजाबाद (अब अयोध्या) के दो अलग-अलग हत्या के मामलों में सत्र अदालतों से फांसी की सजा पाए लईक व गोविंद पासी की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया।
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न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रेनू अग्रवाल की खंडपीठ ने दोनों फैसले लईक व गोविंद पासी की तरफ से फांसी की सजा के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनाए। इनमें दोनों को उक्त संबंधित जिलों की सत्र अदालतों से सुनाई गई फांसी की सजा के फैसलों को चुनौती दी गई थी।
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पहला मामला सुल्तानपुर जिले के चांदा थाने से संबंधित था। इसमें अभियोजन का आरोप था कि 7 अक्तूबर 2015 को वादी के घर के सामने लघुशंका करने से टोकने पर लईक ने अपने साथी मोहम्मद उमर के साथ गौहर अली व जावेद अहमद की चापड़ मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में 9 मार्च 2021 को सुल्तानपुर की सत्र अदालत ने लईक को फांसी व मोहम्मद उमर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने लईक को सुनाई गई फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया जबकि उमर की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। दोनों जेल में हैं।
दूसरा मामला अयोध्या के इनायत नगर थाने से संबंधित है। इसमें वादी ने 29 जनवरी 2013 को प्राथमिकी दर्ज करवाकर कहा कि उसकी 10 साल की भतीजी स्कूल पढ़ने गई थी जो वापस नहीं लौटी। तलाश करने पर उसकी लाश खेत में मिली। पता चला कि उसके दुपट्टे से ही गला घोंट कर उसकी हत्या की गई। दौरान विवेचना अभियुक्त गोविंद पासी का नाम प्रकाश में आया। 17 मई 2018 को अयोध्या की सत्र अदालत ने हत्या के जुर्म में गोविंद पासी को फांसी की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील की थी।