भूमिगत रूट पर अप व डाउन लाइन पर एक साथ दौड़ी मेट्रो, तीन मिनट में हजरतगंज
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मेट्रो ने बृहस्पतिवार को भूमिगत रूट पर 3.5 किमी लंबाई में ट्रायल रन कराया। दूसरे दिन चली ट्रेनों की स्पीड भी बढ़ाकर लखनऊ मेट्रो ने 30 किमी प्रतिघंटा तक पहुंचा दी। भूमिगत रूट में ट्रायल के बाद अब हजरतगंज से आगे मुंशीपुलिया तक एलीवेटेड सेक्शन पर तेजी के साथ ट्रेनों को दौड़ाया जाएगा।
लखनऊ मेट्रो के अधिकारियों ने बताया कि बुधवार के ट्रायल रन के बाद देर शाम ट्रेनों को भूमिगत सेक्शन में वापस ले जाया गया था। इसके बाद बृहस्पतिवर को सुबह से ट्रायल रन सुरंगों के अंदर ही शुरू करा दिए गए। यहां हुसैनगंज के अलावा सचिवालय और हजरतगंज स्टेशनों पर ट्रेनों को रोका भी गया।
इस बीच देखा गया कि पूरे संचालन के समय ट्रैक्शन और सिग्नल सिस्टम किस तरह काम कर रहा है। अलस्टॉम ने बढ़ी तेजी पर पूरा डाटा जुटाया है। इसमें यह भी देखा गया है कि एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुंचने में औसतन कितना समय ट्रेनों को लग रहा है।
तीन मिनट में पहुंच गई सचिवालय से हजरतगंज
30 किमी प्रतिघंटा के आसपास की गति से जब ट्रेनों का संचालन किया गया तो सचिवालय से हजरतगंज के बीच की दूरी केवल तीन मिनट में पूरी हो गई। दोनों स्टेशनों के बीच करीब 1.20 किमी की दूरी है। वहीं हुसैनगंज से सचिवालय की 850 मीटर की दूरी केवल दो मिनट में ट्रेन ने पूरी की। कॉमर्शियल रन के समय भी यही गति ट्रेनों की होना प्रस्तावित है।
मेट्रो के अधिकारी भी रहे मौजूद
बृहस्पतिवार को भूमिगत सेक्शन में ट्रायल के समय मेट्रो के अधिकारी भी मौजूद रहे। खुद निदेशक रॉलिंग स्टॉक महेंद्र कुमार और निदेशक ऑपरेशंस सुशील कुमार ने पूरे समय ट्रायल रन की निगरानी की। निदेशक महेंद्र कुमार कई बार तो ड्राइवर केबिन के अंदर ही मौजूद रहे जिससे कि किसी भी गलती की आशंका को खत्म किया जा सके। करीब पांच राउंड ट्रेन ने शाम तक यहां किए।
अंधेरे में हुआ भूमिगत सेक्शन में ट्रायल
अभी स्टेशनों के ऑक्जीलरी सबस्टेशन से नहीं जुड़ पाने के चलते यहां बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से बृहस्पतिवार को अंधेरे में ही ट्रेनों का संचालन कर ट्रायल मेट्रो स्टेशनों पर भूमिगत कराए गए। अधिकारियों का कहना है कि अगले 48 से 72 घंटे में स्टेशनों को ऑक्जीलरी सबस्टेशन से बिजली आपूर्ति कर रौशन कर लिया जाएगा।
मेट्रो के अधिकारी भी रहे मौजूद
बृहस्पतिवार को भूमिगत सेक्शन में ट्रायल के समय मेट्रो के अधिकारी भी मौजूद रहे। खुद निदेशक रॉलिंग स्टॉक महेंद्र कुमार और निदेशक ऑपरेशंस सुशील कुमार ने पूरे समय ट्रायल रन की निगरानी की। निदेशक महेंद्र कुमार कई बार तो ड्राइवर केबिन के अंदर ही मौजूद रहे जिससे कि किसी भी गलती की आशंका को खत्म किया जा सके। करीब पांच राउंड ट्रेन ने शाम तक यहां किए।
अंधेरे में हुआ भूमिगत सेक्शन में ट्रायल
अभी स्टेशनों के ऑक्जीलरी सबस्टेशन से नहीं जुड़ पाने के चलते यहां बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से बृहस्पतिवार को अंधेरे में ही ट्रेनों का संचालन कर ट्रायल मेट्रो स्टेशनों पर भूमिगत कराए गए। अधिकारियों का कहना है कि अगले 48 से 72 घंटे में स्टेशनों को ऑक्जीलरी सबस्टेशन से बिजली आपूर्ति कर रौशन कर लिया जाएगा।