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Lucknow News: कोहरा नहीं, कमाई के लिए कैंसिल की ट्रेनें
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लखनऊ। जनता, डबलडेकर, शहीद, कुंभ एक्सप्रेस... ये कुछ ऐसी ट्रेनें हैं, जिन्हें रेलवे ने फरवरी तक कैंसिल कर दिया है। इससे हजारों यात्री परेशान हैं। अभी तक 78 ट्रेनों को कोहरे के नाम पर निरस्त किया गया है, लेकिन इसकी असल वजह कोहरा नहीं, कमाई है। मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की जगह मालगाड़ियों की संख्या बढ़ाकर चलाने से रेलवे आमदनी बढ़ाएगा।
कोहरे के नाम पर रेलवे हर साल दर्जनों ट्रेनों को दिसंबर शुरू होने से पहले ही कैंसिल कर देता है। यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल तंज कसते हुए कहते हैं, रेलवे के पास रद्द होने वाली ट्रेनों की सूची तैयार रखी रहती है, जिसे दिसंबर शुरू होने से पहले जारी कर दिया जाता है। इससे यात्रियों को क्या मुश्किलें होंगी, उस पर ध्यान नहीं दिया जाता। उधर, मालगाड़ियों की संख्या और बढ़ा दी जाती है। दरअसल, पूरा समीकरण कमाई का है। रेलवे अफसरों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2021-22 में यात्री ट्रेनों से कुल 39,214 करोड़ रुपये कमाई हुई, जबकि मालगाड़ियों से 1,41,096 करोड़ की आमदनी हुई। इस वर्ष अगस्त तक रेलवे ने यात्री ट्रेनों से 25,276 करोड़ और मालगाड़ियों से 65,505 करोड़ कमाए हैं।
घने कोहरे में काम नहीं करती फॉग डिवाइस
अधिकारियों के मुताबिक उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे की 876 ट्रेनों में फॉग डिवाइस लगी हैं। जीपीएस आधारित ये डिवाइस कोहरे में सिग्नलों व फाटकों की सटीक जानकारी लोको पायलट को देती हैं, ताकि हादसा न हो। बावजूद इसके कोहरे के नाम पर बड़ी संख्या में ट्रेनों को कैंसिल करना इन डिवाइस के औचित्य पर सवाल उठाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि विजिबिलिटी कम होने पर इस डिवाइस का भी लाभ नहीं मिलता। लखनऊ से 195 के करीब मालगाड़ियों की आवाजाही होती है। इनसे कोयले, उर्वरक, नमक, सीमेंट आदि की लोडिंग-अनलोडिंग होती है। लखनऊ के आलमनगर व मोहनलालगंज गुड्स शेड से करीब 45 मालगाड़ियां चलती हैं।
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रेलवे अफसरों की यह भी दलील
कोहरे में मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने के पीछे रेलवे अफसर यह दलील भी देते हैं कि कैंसिलेशन के दौरान ट्रैक, सिग्नल व अन्य तरह के मेंटेनेंस वर्क आसानी से हो जाते हैं। इसके लिए ब्लॉक नहीं लेना पड़ता है। ऐसे में उप्पल सवाल उठाते हैं कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मेंटेनेंस के लिए कोहरे के नाम पर हर साल ट्रेनों को निरस्त कर दिया जाता है।
मांग पर ट्रेनों को बहाल भी करते हैं
डीआरएम पूर्वोत्तर रेलवे आदित्य कुमार का कहना है कि कोहरे में दृश्यता शून्य रहने से सुरक्षा के मद्देनजर हर साल ट्रेनों को कैंसिल किया जाता है। इस दौरान मेंटेनेंस के भी काम हो जाते हैं। यात्रियों की मांग पर ट्रेनों को बहाल भी किया जाता है।
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कोहरे के नाम पर रेलवे हर साल दर्जनों ट्रेनों को दिसंबर शुरू होने से पहले ही कैंसिल कर देता है। यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल तंज कसते हुए कहते हैं, रेलवे के पास रद्द होने वाली ट्रेनों की सूची तैयार रखी रहती है, जिसे दिसंबर शुरू होने से पहले जारी कर दिया जाता है। इससे यात्रियों को क्या मुश्किलें होंगी, उस पर ध्यान नहीं दिया जाता। उधर, मालगाड़ियों की संख्या और बढ़ा दी जाती है। दरअसल, पूरा समीकरण कमाई का है। रेलवे अफसरों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2021-22 में यात्री ट्रेनों से कुल 39,214 करोड़ रुपये कमाई हुई, जबकि मालगाड़ियों से 1,41,096 करोड़ की आमदनी हुई। इस वर्ष अगस्त तक रेलवे ने यात्री ट्रेनों से 25,276 करोड़ और मालगाड़ियों से 65,505 करोड़ कमाए हैं।
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घने कोहरे में काम नहीं करती फॉग डिवाइस
अधिकारियों के मुताबिक उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे की 876 ट्रेनों में फॉग डिवाइस लगी हैं। जीपीएस आधारित ये डिवाइस कोहरे में सिग्नलों व फाटकों की सटीक जानकारी लोको पायलट को देती हैं, ताकि हादसा न हो। बावजूद इसके कोहरे के नाम पर बड़ी संख्या में ट्रेनों को कैंसिल करना इन डिवाइस के औचित्य पर सवाल उठाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि विजिबिलिटी कम होने पर इस डिवाइस का भी लाभ नहीं मिलता। लखनऊ से 195 के करीब मालगाड़ियों की आवाजाही होती है। इनसे कोयले, उर्वरक, नमक, सीमेंट आदि की लोडिंग-अनलोडिंग होती है। लखनऊ के आलमनगर व मोहनलालगंज गुड्स शेड से करीब 45 मालगाड़ियां चलती हैं।
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रेलवे अफसरों की यह भी दलील
कोहरे में मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने के पीछे रेलवे अफसर यह दलील भी देते हैं कि कैंसिलेशन के दौरान ट्रैक, सिग्नल व अन्य तरह के मेंटेनेंस वर्क आसानी से हो जाते हैं। इसके लिए ब्लॉक नहीं लेना पड़ता है। ऐसे में उप्पल सवाल उठाते हैं कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मेंटेनेंस के लिए कोहरे के नाम पर हर साल ट्रेनों को निरस्त कर दिया जाता है।
मांग पर ट्रेनों को बहाल भी करते हैं
डीआरएम पूर्वोत्तर रेलवे आदित्य कुमार का कहना है कि कोहरे में दृश्यता शून्य रहने से सुरक्षा के मद्देनजर हर साल ट्रेनों को कैंसिल किया जाता है। इस दौरान मेंटेनेंस के भी काम हो जाते हैं। यात्रियों की मांग पर ट्रेनों को बहाल भी किया जाता है।