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लखनऊ : श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा, पांच वर्ष में प्रदेश को कर देंगे बाल श्रम से मुक्त

Sun, 12 Jun 2022 08:04 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 12 Jun 2022 08:04 PM IST
सार

श्रम मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सरकार ने बाल श्रम मुक्त अभियान को अपने संकल्प पत्र में शामिल किया है। लक्ष्य है कि अगले पांच सालों में पूरे प्रदेश को बाल श्रम से मुक्त कर दिया जाए पर इसके लिए आम जन की भागीदारी आवश्यक है।

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Lucknow: Labor and Employment Minister Anil Rajbhar said, will make the state free from child labor in five years
अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर आयोजित कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रम और सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि बाल श्रम अभिशाप है। अगले पांच वर्ष में पूरे प्रदेश को बाल श्रम से मुक्त कर दिया जाएगा लेकिन इसके लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा। यह कार्य जनजागरण से ही पूरा हो सकता है। राजभर अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर यूनिसेफ के सहयोग से चल रही नया सवेरा योजना में 20 जनपदों के 275 ग्राम पंचायतों व शहरी वार्डों को बाल श्रम मुक्त घोषित किया गया।

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इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में श्रम मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सरकार ने बाल श्रम मुक्त अभियान को अपने संकल्प पत्र में शामिल किया है। लक्ष्य है कि अगले पांच सालों में पूरे प्रदेश को बाल श्रम से मुक्त कर दिया जाए पर इसके लिए आम जन की भागीदारी आवश्यक है। प्रधानों, जिला पंचायत सदस्यों, विधायकों, सांसदों सभी मिलकर पूरा प्रयास करें। आम लोगों को इससे जोड़ें तो यह लक्ष्य शत प्रतिशत पूरा हो सकेगा। यह जनजागरण का विषय है। इसके लिए सामाजिक चेतना जरूरी है। कहा कि सरकार इसके लिए इतनी गंभीर है कि गरीब परिवारों के भरण पोषण का तो इंतजाम किया ही जा रहा है साथ साथ उनके बच्चों की शिक्षा के लिए नवोदय विद्यालयों की तर्ज पर अटल आवासीय विद्यालय भी बनाए जा रहे हैं।
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उप्र भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार राज्य परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष रघुराज सिंह ने कहा कि हमें इस तरह के प्रयास करने होंगे कि यह दिवस मनाने की आवश्यकता ही न पड़े। कहा कि सरकार ने प्रदेश में सभी धर्म जाति की दो लाख से ज्यादा कन्याओं का विवाह कराया। इसी तरह से बाल श्रम को मुक्त करने का संकल्प लिया है पर इसमें सभी का सहयोग आवश्यक है। श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुनील भराला ने कहा कि अभी प्रदेश को बाल श्रम मुक्त घोषित करने की चाल धीमी है। एक लाख से ज्यादा गांवों में काम करना है तो हम सभी को गति तेज करनी होगी। कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्रों का वितरण किया गया। साथ ही इस काम में लगे प्रतिनिधियों को भी प्रमाणपत्र बांटे गए।
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लक्ष्य 200 का था, 275 किया : चंद्रा
अपर मुख्य सचिव श्रम सुरेश चंद्रा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य था कि सौ दिन में 200 हॉट स्पॉट को बाल श्रम से मुक्त किया जाए लेकिन सभी का सहयोग रहा कि 275 स्थानों को बाल श्रम मुक्त घोषित करने में सफलता मिली। अब और तेजी से काम होगा। पांच सालों का लक्ष्य पूरा करने के लिए सभी विभागों का सहयोग एवं सामंजस्य जरूरी होगा। श्रमायुक्त शकुंतला गौतम ने कहा कि 12 जून 2017 को यह अभियान शुरू हुआ और इसमें अब तक 36004 बच्चों एवं उनकेपरिवारों को पुनर्वासित कराया गया। इससे पहले 365 ग्राम पंचायतों को बाल श्रम मुक्त घोषित किया जा चुका है।


हर बच्चे का शिक्षा का अधिकार : लाना कटाउ
कार्यक्रम में यूनिसेफ इंडिया कंट्री ऑफिस की उप प्रतिनिधि लाना कटाउ ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। बाल श्रम बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य से वंचित कर देता है। सभी को मिलकर यह प्रण लेना होगा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा एवं सुरक्षित भविष्य मिल सके। कार्यक्रम में अपर श्रम आयुक्त अंजूलता, बोर्ड सचिव विपिन जैन, अपर श्रमायुक्त सरजू राम, अपर श्रमायुक्त एसपी शुक्ल, अपर श्रमायुक्त मधुर सिंह, उप श्रमायुक्त शमीम अख्तर, दिनेश मेहरोत्रा, अमित कुमार आदि यूनिसेफ के भी प्रतिनिधि शामिल थे।

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