आंखें आ सकती थीं बाहर, 12 हजार में कर दी 1.5 लाख की सर्जरी
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दिल से दिमाग को खून पहुंचाने वाली नस में उभरे एक अन्य हिस्से के कारण खून का आदान-प्रदान बंद हो गया। इसके चलते मरीज की आंखें लाल होने के साथ-साथ उनमें सूजन बढ़ने लगी।
केजीएमयू के सीवीटीएस विभाग के डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला कि मरीज ‘कैरोटिडो कैवरनस फिस्टुला’ नामक बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी में दिल से दिमाग को रक्त पहुंचाने वाली नस में असाधारण कनेक्शन हो जाता है। खून का आदान-प्रदान नहीं होने से मरीज को ब्रेनहैमरेज का खतरा तक हो जाता है। 27 मई को डॉक्टरों ने मरीज के गले में छोटा चीरा लगाकर उसे इस बीमारी से निजात दिला दी।
आजमगढ़ निवासी उमा देवी (60)को दो माह से आंखें लाल होने के साथ असहनीय दर्द था। आंखों में सूजन होने की वजह से वह बंद होने लगीं। आसपास इलाज कराने के बाद परिवारीजन उमा को नाजुक हालत में केजीएमयू के कार्डियो वैस्कुलर थोरेसिक सर्जरी (सीवीटीएस) विभाग लाए।
यहां जांच में पता चला कि उमा ‘कैरोटिडो कैवरनस फिस्टुला’ बीमारी से पीड़ित है। डॉ. अम्ब्रीश कुमार ने बताया कि इस बीमारी में दिल से दिमाग तक खून पहुंचाने वाली मुख्य धमनी (कैरोटिड आर्टरी और कैवरनस साइनस) के बीच असाधारण कनेक्शन बनने से आंखों में सूजन के साथ तेजी से लाल होती हैं।
बीमारी को नजरअंदाज करने पर पीड़ित की आंखें तक बाहर आ जाती हैं। डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी जांच में पता चला कि जिन नसों से आंख को रक्त सप्लाई होती है वह रक्त दूसरी नसों से वापस नहीं आ रहा है।
शुक्रवार, 27 मई को एक घंटे चली सर्जरी के दौरान मरीज के गले में छोटा चीरा लगाकर (कैरोटिड आर्टरी और कैवरनस साइनस) के बीच असाधारण कनेक्शन को हटा दिया गया। इससे मरीज को सही कोशिकाओं की मदद से दिल से दिमाग तक शुद्ध रक्त का आदान-प्रदान होने लगा। सर्जरी के बाद उमा पूरी तरह से ठीक हैं।
जरा सी चूक पर जा सकती थी जान
डॉ. अम्ब्रीश कुमार ने बताया कि इस बीमारी से पीड़ित मरीज को अपंगता का खतरा रहता है। दिल से शुद्ध रक्त दिमाग की अलग-अलग कोशिकाओं में जाता है।
लेकिन इस बीमारी की वजह से दिमाग में अशुद्ध रक्त पहुंचने पर ब्रेन हैमरेज होने के साथ मरीज की रोशनी जाने का खतरा बना रहता है। रक्त प्रवाह में दिक्कत होने पर पल भर में पीड़ित की जान भी जा सकती है। इस तरह की समस्या होने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
डॉ. अम्ब्रीश ने बताया कि पीड़ित मरीज के ऑपरेशन पर महज 12 हजार रुपये का खर्च आया। निजी संस्थान में ये ऑपरेशन होता तो करीब 1.5 लाख खर्च करने पड़ते एक घंटे की सर्जरी के दौरान मरीज को क्रिटिकल केयर की सुविधा दी गई थी। क्योंकि सर्जरी के दौरान जरा सी चूक मरीज की जान पर भारी पड़ सकती थी। क्योंकि दिल और दिमाग की नसों को सही करना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।
उमा की जान बचाने वाली टीम में डॉ. शैलेंद्र यादव के नेतृत्व में डॉ. अम्ब्रीश कुमार, डॉ. शिवपाल और डॉ. श्रद्धा समेत रेजिडेंट और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ रहा। इस सर्जरी के लिए केजीएमयू वीसी प्रो. रविकांत, सीएमएस डॉ. एससी तिवारी, एमएस डॉ. विजय कुमार और डिप्टी एमएस डॉ. वेद प्रकाश ने सभी को बधाई दी।