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Lucknow: 30 हजार से अधिक आवासीय भूखंडों पर बने कॉम्प्लेक्स, इंजीनियरों और अफसरों की मिलीभगत से हुआ निर्माण
Wed, 24 Jun 2026 12:33 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Wed, 24 Jun 2026 12:33 PM IST
सार
एलडीए प्रशासन कह रहा है इमारत का मानचित्र आवासीय में पास कराया गया था और उसका इस्तेमाल व्यावसायिक में किया जा रहा था। वहां सेटबैक की जगह भी नहीं थी और भवन निर्माण में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था।
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अलीगंज के बेलीगारद चौराहे के पास घरों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठान।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
आम आदमी अपने घर की टूटी छत भी ठीक कराना शुरू करे तो लखनऊ विकास प्राधिकरण के कर्मचारी आ धमकते हैं। उधर, करीब तीन दशकों में शहर में एलडीए की ही कॉलोनियों में मुख्य सड़क और उससे लगी चौड़ी सड़कों के किनारे घर तोड़कर 30 हजार से अधिक आवासीय प्लॉटों पर होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल, कोचिंग सेंटर और कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स तन गए हैं। इन्हें तोड़ा जाना चाहिए, पर एलडीए के अफसर इन पर मेहरबान हैं। यही वजह है कि छह हजार से अधिक ध्वस्तीकरण के आदेश फाइलों में डंप हैं।
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अलीगंज में सोमवार को हुए अग्निकांड के बाद एलडीए प्रशासन कह रहा है इमारत का मानचित्र आवासीय में पास कराया गया था और उसका इस्तेमाल व्यावसायिक में किया जा रहा था। वहां सेटबैक की जगह भी नहीं थी और भवन निर्माण में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था। हालांकि, शहर में एलडीए की सभी कॉलोनियों में मुख्य सड़क पर मकानों को तोड़कर इसी तरह वर्षों से व्यावसायिक इमारतें बनाकर इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
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शहर में अवैध निर्माण की यह स्थिति तब है जब क्षेत्रीय इंजीनियर और सुपरवाइजर क्षेत्र में निरीक्षण करने का दावा भी करते हैं। एलडीए प्रशासन की ओर से निरीक्षण की डिजिटल डायरी बनाने के साथ रोजाना रिपोर्ट देने के आदेश भी जारी किए जाते हैं। एलडीए सूत्रों के अनुसार इंजीनियरों की मिलीभगत से शहर में 30 हजार से अधिक आवासीय भूखंडों पर कॉम्प्लेक्स बन गए हैं।
एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार का कहना है कि अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार कार्रवाई चल रही है। जिन इंजीनियरों की लापरवाही सामने आती है उन पर कार्रवाई होती है। दो सप्ताह पहले ही एक कर्मचारी पर कार्रवाई की गई। ध्वस्तीकरण के लंबित मामलों को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है कि वे क्यों और किस आधार पर रोके गए हैं।
यहां घर तोड़कर खड़े कर दिए कॉम्प्लेक्स
पुरनिया चौराहा से सेक्टर-के होते हुए बेलीगारद (श्याम स्वाद) होते चौराहा तक, सेक्टर-क्यू और इंजीनियरिंग कॉलेज तक, छन्नी लाल चौराहे से कपूरथला होते हुए अलका तिराहे तक। यही हाल अलका तिराहे से पुरनिया चौराहा और चंद्रलोक कॉलोनी का भी है। यहां पर इन दिनों रोजाना एक घर टूट रहा है और कॉम्प्लेक्स, रेस्टोरेंट खुल रहे हैं। संगम चौराहा, केंद्रीय भवन के सामने, सेक्टर-ई अलीगंज, गोमतीनगर पत्रकारपुरम, व आशियाना और एलडीए कॉलोनी में खुलेआम व्यावसायिक निर्माण चल रहे हैं।
तय है अवैध निर्माण कराने का रेट
मानचित्र के विपरीत इमारत बनाने के लिए एलडीए इंजीनियरों का रेट तय है। एक जानकार ने बताया कि मानचित्र के विपरीत निर्माण पर जब तक बिल्डिंग बनती है, इंजीनियर हर महीना तय रकम के अलावा प्रति स्लैब रुपये अलग वसूलते हैं। एक चार मंजिला बिल्डिंग पर 20 से 25 लाख रुपये इंजीनियर वसूल लेता है। सील बिल्डिंग में निर्माण करने पर रेट दोगुना हो जाता है।