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Lucknow News: महाकुंभ का अध्ययन करेगा लविवि, भविष्य में छात्रों के आएगा काम
Mon, 30 Dec 2024 01:46 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 30 Dec 2024 01:46 AM IST
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज और मानवशास्त्र विभाग की ओर से प्रयागराज में महाकुंभ-2025 पर आधारित दो प्रोजेक्ट पर अध्ययन किया जाएगा। पहले प्रोजेक्ट में वहां की तैयारी और सुरक्षा से जुड़ी चीजें शामिल होंगी तो वहीं दूसरे में महाकुंभ में भारतीय संस्कृति की नई तस्वीर और वहां होने वाले कार्यक्रमों को शामिल किया जाएगा।
लविवि के कुलपति प्रो. आलोक राय ने बताया कि महाकुंभ एक बड़ा आयोजन है। इसकी तैयारियों व कार्यक्रम पर अध्ययन से जो जानकारियां मिलेंगी, वह भविष्य में छात्रों के भी बहुत काम आएगा। महाकुंभ 2025 में पांच से छह करोड़ लोगों के पहुंचने की उम्मीद है जिसमें देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी तादाद में सैलानी पहुंचेंगे। इतने सारे लोगों को सुरक्षित व्यवस्था प्रदान करना बड़ी चुनौती होगी। इसका अध्ययन करने की जरूरत है। इसमें फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज की डीन संगीता साहू को प्रोजेक्ट का निरीक्षक बनाया गया है।
अध्ययन में कार्यबल का मूल्यांकन, रणनीतिक कार्यबल योजना और दृष्टिकोण, कार्यस्थल पर तैनाती, संचालन और अनुपालन, पर्यावरण संस्कृति, संचार और नेतृत्व जैसे विषय शामिल होंगे। इसके विस्तृत विश्लेषण के साथ एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
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शोध पत्रों के रूप में होगी प्रथाओं की पहचान
केस स्टडी और शोध पत्रों के रूप में सर्वोत्तम प्रथाओं की पहचान की जाएगी जो भविष्य में होने वाले ऐसे आयोजनों के लिए सीख प्रदान करेंगी। प्रयागराज में महाकुंभ-2025 की शुरुआत 13 जनवरी से होगी जो 26 फरवरी तक चलेगा। 45 दिनों की इस अवधि में नियमित अध्ययन किया जाएगा। इसमें पर्यटकों की इतनी बड़ी संख्या की यात्रा के प्रबंधन पर फोकस रहेगा।
तीर्थयात्रा और भौगोलिकता पर होगा मानवशास्त्रीय अध्ययन
लखनऊ विश्वविद्यालय के मानव शास्त्र विभाग की ओर से महाकुंभ मेले के सांस्कृतिक, सामाजिक और संगठनात्मक पहलुओं का अध्ययन भी किया जाएगा। यह तीर्थयात्रा और पवित्र भौगोलिकता पर एक मानवशास्त्रीय अध्ययन होगा जो सांस्कृतिक स्मृति और संचार, यानी किस प्रकार कुंभ मेला की कथाएं, मिथक और अनुभव पीढ़ी दर पीढ़ी प्रसारित होते हैं, इसका अध्ययन किया जाएगा। इस अध्ययन में प्रोफेसर केया पांडेय की भूमिका अहम होगी। यह शोध मानवशास्त्र, धार्मिक अध्ययन और भूगोल के क्षेत्र में योगदान देगा, जिससे हम पवित्र स्थानों और मानव अनुभवों के बीच के संबंध को और अधिक समझ सकेंगे। यह नीति निर्माताओं, शहरी योजनाकारों और पर्यावरणविदों के लिए भी अहम जानकारियां देगा, जो बड़े पैमाने पर धार्मिक आयोजनों के प्रबंधन पर काम कर रहे हैं।
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लविवि के कुलपति प्रो. आलोक राय ने बताया कि महाकुंभ एक बड़ा आयोजन है। इसकी तैयारियों व कार्यक्रम पर अध्ययन से जो जानकारियां मिलेंगी, वह भविष्य में छात्रों के भी बहुत काम आएगा। महाकुंभ 2025 में पांच से छह करोड़ लोगों के पहुंचने की उम्मीद है जिसमें देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी तादाद में सैलानी पहुंचेंगे। इतने सारे लोगों को सुरक्षित व्यवस्था प्रदान करना बड़ी चुनौती होगी। इसका अध्ययन करने की जरूरत है। इसमें फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज की डीन संगीता साहू को प्रोजेक्ट का निरीक्षक बनाया गया है।
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अध्ययन में कार्यबल का मूल्यांकन, रणनीतिक कार्यबल योजना और दृष्टिकोण, कार्यस्थल पर तैनाती, संचालन और अनुपालन, पर्यावरण संस्कृति, संचार और नेतृत्व जैसे विषय शामिल होंगे। इसके विस्तृत विश्लेषण के साथ एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
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शोध पत्रों के रूप में होगी प्रथाओं की पहचान
केस स्टडी और शोध पत्रों के रूप में सर्वोत्तम प्रथाओं की पहचान की जाएगी जो भविष्य में होने वाले ऐसे आयोजनों के लिए सीख प्रदान करेंगी। प्रयागराज में महाकुंभ-2025 की शुरुआत 13 जनवरी से होगी जो 26 फरवरी तक चलेगा। 45 दिनों की इस अवधि में नियमित अध्ययन किया जाएगा। इसमें पर्यटकों की इतनी बड़ी संख्या की यात्रा के प्रबंधन पर फोकस रहेगा।
तीर्थयात्रा और भौगोलिकता पर होगा मानवशास्त्रीय अध्ययन
लखनऊ विश्वविद्यालय के मानव शास्त्र विभाग की ओर से महाकुंभ मेले के सांस्कृतिक, सामाजिक और संगठनात्मक पहलुओं का अध्ययन भी किया जाएगा। यह तीर्थयात्रा और पवित्र भौगोलिकता पर एक मानवशास्त्रीय अध्ययन होगा जो सांस्कृतिक स्मृति और संचार, यानी किस प्रकार कुंभ मेला की कथाएं, मिथक और अनुभव पीढ़ी दर पीढ़ी प्रसारित होते हैं, इसका अध्ययन किया जाएगा। इस अध्ययन में प्रोफेसर केया पांडेय की भूमिका अहम होगी। यह शोध मानवशास्त्र, धार्मिक अध्ययन और भूगोल के क्षेत्र में योगदान देगा, जिससे हम पवित्र स्थानों और मानव अनुभवों के बीच के संबंध को और अधिक समझ सकेंगे। यह नीति निर्माताओं, शहरी योजनाकारों और पर्यावरणविदों के लिए भी अहम जानकारियां देगा, जो बड़े पैमाने पर धार्मिक आयोजनों के प्रबंधन पर काम कर रहे हैं।