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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Loksabha Election 2024: See the ground report of Amethi.

अमेठी तो खास...यहां के मुद्दे आम: जानें- क्या है जनता के मन में, आखिर कितनी बदली जिले की तस्वीर, एक रिपोर्ट

Fri, 22 Mar 2024 05:13 PM IST
ishwar ashish नंदलाल तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
नंदलाल तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 22 Mar 2024 05:13 PM IST
सार

हर लोकसभा चुनाव में अमेठी की सीट पर पूरे देश की नजर रहती है। आखिर बीते वर्षों में यहां कितने बदलाव हुए हैं और क्या है जनता का मूड...। पढ़ें एक रिपोर्ट: 
 

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Loksabha Election 2024: See the ground report of Amethi.
अमेठी की वर्तमान सांसद स्मृति ईरानी व बाजार शुकुल का अधूरा पड़ा पुल। - फोटो : amar ujala

विस्तार

मैं अमेठी हूं...। मेरे अतीत में भगवान राम की यादें हैं। द्वापर से भी गहरा जुड़ाव है। नंदमहर धाम में भगवान श्रीकृष्ण और नंद बाबा ने प्रवास किया। पद्मावत जैसे काव्य की रचना करने वाले सूफी संत मलिक मोहम्मद जायसी मेरे आंगन में ही पले बढ़े। जायस में गुरु गोरखनाथ ने तप किया। कालिकन धाम, दुर्गन भवानी, समसेरियन भवानी, देवीपाटन, अहोरवा भवानी सहित कई अन्य सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विरासतों की अनमोल थाती है मेरे पास।

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पहले मैं सुल्तानपुर का एक अंग था। वर्ष 1967 में संसदीय सीट के रूप में पहचान मिली। इसके बाद से कुछ ऐसा हुआ कि मुझ पर सभी की निगाहें टिक गईं। हो भी क्यों न, हमारी धरा से जीतने वाले सांसद ने प्रधानमंत्री तक का मुकाम जो हासिल किया। तमाम उतार चढ़ाव के बीच वर्ष 2010 में मुझे जिले का रूप दिया गया। इसके बाद विकास की योजनाएं बनीं, कुछ पर काम हुआ तो कुछ अभी फाइलों में ही लटकी हुई हैं। कुछ मुद्दे चुनाव में खूब उछले, लोगों की जुबां पर आए लेकिन, बाद में खामोश हो गए। मेरा सबसे बड़ा दर्द अनियोजित विकास से जुड़ा है। पेश है नंदलाल तिवारी की रिपोर्ट...।
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विकास: रिंग रोड का निर्माण फाइलों में है। बाजार शुकुल के पाली गांव से गुजरने वाली गोमती नदी के घाट पर करीब पांच वर्ष पहले 1167.73 लाख रुपये से शुरू हुआ पुल का निर्माण भी अधूरा है। इस कारण यहां के लोगों को 15 किलोमीटर की दूरी तय कर अयोध्या जाना पड़ रहा है। पूरे बोधी, समदा, पूरे सूचित, बढ़इन का पुरवा, पूरे काबरियन व पूरे कुर्मी समेत 25 से अधिक गांवों के लोग परेशान हैं। यही नहीं, कलेक्ट्रेट तहसील में चल रही है। एसपी कार्यालय सहित कई अन्य सरकारी कार्यालय उधार के भवन में संचालित हैं।
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उद्योग: 1980 के दशक में औद्योगिक घरानों ने अमेठी के ऊसर की तस्वीर बदलने के लिए कारखानों की स्थापना की। इनमें इंडोगल्फ, बीएचईएल, सम्राट साइकिल फैक्ट्री, ऊषा इलेक्ट्रीफायर, सीमेंट फैक्ट्री, सूर्या माल्टेक प्राइवेट लिमिटेड, वेस्पा स्कूटर सहित दो सौ से अधिक औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं। वर्ष 1991 के बाद से एक-एक करके ये बंद होती चली गईं। इनमें ऊषा, वेस्पा, सम्राट, मालविका स्टील की इमारतें खंडहर हो गईं। हालांकि जगदीशपुर उतलेवा, कौहार, टिकरिया व त्रिशुंडी चमक बिखेर रही हैं।

परिवहन: कहने को गौरीगंज जिला मुख्यालय है लेकिन अभी तक एक अदद बस स्टेशन नहीं है। तिलोई हो या बाजार शुकुल जैसे इलाके, जहां आज तक परिवहन निगम की बसें नहीं पहुंच सकीं हैं। दशकों से अमेठी वासियों ने ऊंचाहार अमेठी रेल लाइन परियोजना का ख्वाब संजो रखा है। 966 करोड़ की इस परियोजना का शिलान्यास भी हुआ, लेकिन धरातल पर सन्नाटा है। वैसे यह रेल परियोजना तहसील के रायपुर फुलवारी, जंगलरामनगर, उमापुर, गानापट्टी, कटरा हुलासी, सुंदरपुर, दरखा और गौरीगंज को भी जोड़ेगी।

स्वास्थ्य: तिलोई में राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण चल रहा है, लेकिन जिला मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। हृदय, न्यूरो सहित कई अन्य बीमारियों के चिकित्सक ही नहीं हैं। यही नहीं, जिला अस्पताल में अभी तक एक ब्लड बैंक नहीं शुरू हो सका, जबकि उपकरण आ चुके हैं। ऐसे में मरीजों को सुल्तानपुर या रायबरेली का चक्कर काटना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों के अस्पताल भी चिकित्सकों व कर्मियों की कमी से जूझ रहे हैं।

शिक्षा: जिला मुख्यालय पर उच्च शिक्षा के लिए एक भी सरकारी महाविद्यालय नहीं है। इससे यहां के विद्यार्थियों को निजी कॉलेजों का सहारा लेना पड़ता है। जगदीशपुर में राजकीय महिला डिग्री कॉलेज का निर्माण चल रहा है। अमेठी में एक भी सरकारी महाविद्यालय नहीं है।

पब्लिक के बोल

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डॉ. अर्जुन पांडेय व कंचन गुप्ता। - फोटो : amar ujala

रिटायर्ड प्रवक्ता समाज सेवी डॉ. अर्जुन पांडेय का कहना है कि अमेठी जिला मुख्यालय पर उच्च शिक्षा के लिहाज से एक भी सरकारी महाविद्यालय नहीं है। ऐसे में युवाओं की उच्च शिक्षा में समस्या आती है। वनों व नदियों को संवारने की पहल भी की जानी चाहिए, जिससे पर्यावरण व जल संरक्षण को मजबूती मिले।

उद्योग व्यापार मंडल महिला प्रकोष्ठ अमेठी की जिलाध्यक्ष कंचन गुप्ता का कहना है कि औद्योगिक इकाइयों के विकास को लेकर ठोस प्रयास की आवश्यकता है। पुराने उद्योगों को शुरू कराया जाय, जिससे लोगों को रोजगार मिल सके। दरअसल, उद्योग स्थापना से न सिर्फ रोजगार बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।

जनता की मांग, परिवहन सेवा का विस्तार हो

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संदीप पांडेय, लालता प्रसाद और राजेश कुमार। - फोटो : amar ujala

जिले के एक युवाक संदीप पांडेय का कहना है कि परिवहन सेवा बहुत ही आवश्यक है। इसका विस्तार किया जाना चाहिए। गौरीगंज जिला मुख्यालय है। कम से कम बस स्टेशन होना चाहिए, जिससे आवागमन सुगम हो सके।

तिलोई के लालता प्रसाद का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं। उन्हें रायबरेली और बीएचएल जाना पड़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करना ही होगा।

बाजार शुकुल के राजेश कुमार का कहना है कि पांच साल से पुल का निर्माण अधूरा है। समय का ख्याल रखना चाहिए। पुल का निर्माण अगर हो जाता तो 15 किलोमीटर का चक्कर नहीं लगाना पड़ता। सहूलियत मिल जाती।

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