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हिंदुत्व को धार, सामाजिक सरोकार, आंकड़ा 50 प्रतिशत पार, भाजपा ने इस तरह फेल किया गठबंधन का गणित

अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: देव कश्यप Updated Mon, 27 May 2019 04:02 AM IST
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भाजपा - फोटो : amar ujala

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पिछले विधानसभा चुनाव के बाद ही लोकसभा सीटों पर 50 फीसदी से अधिक वोट पाने की रणनीति पर काम करना भाजपा को सफलता दिला गया। हिंदुत्व को धार, सामाजिक सरोकारों पर काम, अगड़ों-पिछड़़ों के साथ अनुसूचित जाति को लामबंद करने की रणनीति से भाजपा ने प्रदेश में गठबंधन के गणित में सेंधमारी कर अपनी सीटों का नुकसान बचा लिया। सपा, बसपा और रालोद गठबंधन करके मुस्लिम मतों में बिखराव रोकने में तो काफी हद तक कामयाब रहे, लेकिन कहीं न कहीं अपने मूल वोट में सेंधमारी नहीं रोक पाए। गठबंधन के प्रत्याशी वहीं सफल हुए जिन सीटों पर मुस्लिम आबादी अधिक थी या कुछ स्थानीय कारणों से मुस्लिम वोटों के साथ पिछड़ा या अनुसूचित जाति का वोट उनके साथ जुड़ा।
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तभी तो बसपा को प्रदेश में 10 सीटें जरूर मिलीं लेकिन मत प्रतिशत में 2014 की तुलना में बढ़ोतरी नहीं दिखी। सपा को 2014 की तरह सिर्फ 5 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। पर, बदायूं, फिरोजाबाद और कन्नौज जैसी प्रतिष्ठापूर्ण सीटें उसके हाथ से निकल गईं। साथ ही सपा का मत प्रतिशत भी लगभग 4 प्रतिशत घट गया। वहीं, भाजपा को पिछली बार की तुलना में सीटें तो नौ कम मिलीं, पर वोट 7.26 प्रतिशत बढ़ गया। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को प्रदेश में 42.30 प्रतिशत वोट मिला था। इस बार यह 49.56 प्रतिशत हो गया। पार्टी ने गठबंधन सहित जो 64 सीटें जीतीं, उनमें 40 से ज्यादा सीटों पर भाजपा को 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिल गए। करीब आधा दर्जन सीटों पर भाजपा को मिले वोट 50 प्रतिशत को छूते-छूते रह गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी सहित छह सीटों पर भाजपा के वोटों का आंकड़ा 60 प्रतिशत को भी पार कर गया। भाजपा को पिछली बार की तुलना में सीटें भले ही कम मिली हों, लेकिन गठबंधन का गणित बिगाड़कर उनके वोटों को अपने पाले में  लाने की रणनीति सफल होती दिख रही है। 


इस तरह बनी रणनीति 
2014  के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद ही भाजपा के रणनीतिकारों को इस बात का एहसास हो गया था कि विपक्ष अब उनके खिलाफ मिलकर लड़ेगा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जून 2017 में लखनऊ दौरे में कार्यकर्ताओं से यह बात कही भी थी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि भाजपा को रोकने के लिए विरोधी दल आपसी मतभेद भूलकर एकजुट होकर लड़ने की कोशिश करेंगे। इसलिए भाजपा को प्रत्येक बूथ पर पड़ने वाले मतों में आधे से ज्यादा लेने की रणनीति पर काम करना होगा। इसके लिए उन्होंने न सिर्फ ‘गैर यादव व गैर जाटव जोड़ो’ अभियान चलाया बल्कि लड़ाई को 60 बनाम 40 बनाने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। इस गणित को और प्रभावी बनाने के लिए इस पर राष्ट्रवाद व हिंदुत्व के रंग को गाढ़ा किया गया ताकि जाति के खांचे न दिखें। पिछड़ों, अनुसूचित जाति और गरीबों पर फोकस करते हुए मोदी और योगी सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारा गया। गांवों में रात में चौपाल लगाकर, पिछड़ों, अनुसूचित जाति और गरीबों के घर भोजन जैसे कामों से भी लोगों को जोड़ने की कोशिश की गई।
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