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मेट्रो बनी कंपनी, उस्मानी पहले चेयरमैन
ऋषि मिश्र/लखनऊ
Updated Tue, 26 Nov 2013 04:27 PM IST
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एलएमआरसी (लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन) को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी एक्ट का एप्रूवल मिल गया है।
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2 करोड़ रुपए का बैंक ड्राफ्ट जो कंपनी रजिस्ट्रेशन का शुल्क है, वह 16 नवंबर को जमा होने के बाद तीन दिन पहले रजिस्ट्रार के एकाउंट में कैश हो गया है।
बीती शाम रजिस्ट्रेशन का सर्टिफिकेट मेट्रो सेल के चेयरमैन राजीव अग्रवाल वाया ईमेल कंपनी रजिस्ट्रार की ओर से भेज दिया गया है।
एलएमआरसी बोर्ड की पहली मीटिंग अगले माह आयोजित की जाएगी।
एलएमआरसी के एप्रवूल की प्रक्रिया शासन से लेकर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी एक्ट (कानपुर) तक पिछले करीब डेढ़ महीने से जारी थी। अब यह प्रक्रिया समाप्त हो गई, जिससे एलएमआरसी को विधिक मान्यता मिल चुकी है।
इसमें कुल 14 निदेशक हैं। जबकि, फिलहाल चेयरमैन मुख्य सचिव जावेद हैं। केंद्र से सहमति मिलने के बाद चेयरमैन पद पर भारत सरकार का कोई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तैनात किया जाएगा।
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लखनऊ मेट्रो सेल के एक अधिकारी ने बताया कि एलएमआरसी को अधिकृत किए जाने के लिए जो फीस लगनी है, वह करीब दो करोड़ रुपए थी।
वह जमा करने और तमाम औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद यह सर्टिफिकेट मिल चुका है। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्रेशन होने के बाद अब मेट्रो सेल का पूरा काम एलएमआरसी संभाल लेगा।
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पहली बोर्ड मीटिंग के दिसंबर में होने की संभावना है। जिसमें मेट्रो से जुड़े अनेक अहम फैसले लिए जाएंगे।
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