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स्लॉटर हाउस बनाना सरकार की जिम्मेदारी, मांसाहार खाने से नहीं रोक सकते-हाईकोर्ट
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 12 May 2017 05:07 PM IST
सार
हाइकोर्ट की लखनऊ बेंच ने स्लॉटर हॉउसों पर बैन के बाद ये बड़ा फैसला दिया है।
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- फोटो : google
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विस्तार
स्लॉटर हाउस और मीट की दुकानों के लाइसेंस जारी करने और उनके नवीनीकरण के मसले पर कई दिनों से चल रही सुनवाई पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपना फैसला सुना दिया है।
जस्टिस एपी साही और जस्टिस संजय हरकौली की बेंच ने यूपी सरकार को नई लाइसेंस जारी करने और पुराने लाइसेंस रिन्यू करने का आदेश दिया है। बेंच ने कहा कि सरकार किसी को मांसाहार खाने से नहीं रोक सकती है।
याचिकाकर्ताओं ने शिकायत की थी कि उनके लाइसेंस का समय 31 मार्च को पूरा हो चुका है और उन्होंने रिन्यूवल के लिए आवेदन कर रखा है लेकिन सरकार अनुमति नहीं दे रही।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस कर रहे वकील ने कहा था कि सरकार अप्रत्यक्ष रूप से स्लॉटर हाउस बंद करना चाह रही है जबकि किसी भी व्यक्ति को अपनी पसंद का खाना खाने का अधिकार है चाहे वो वेज हो या नॉनवेज।
वहीं, सरकार की तरफ से महाधिवक्ता और विशेष वकील का तर्क था कि सरकार नवीनीकरण तभी करेगी जब याची सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के मुताबिक स्लॉटर हाउस और मीट की दुकान चलाएं।
बता दें कि 30 मार्च को मुख्यमंत्री ने स्लाटर हाउस संचालकों से मुलाकाता की थी और कहा था कि वे नियम- कानून के दायरे में रहकर वैध तरीके से कारोबार करेंगे तो कोई दिक्कत नहीं आएगी। उन्होंने पुराने स्लाटर हाउसों का आधुनिकीकरण कराने व नियमानुसार लाइसेंस लेकर ही चलाने की भी सलाह दी थी।
कहा था कि जो भी मीट व्यापारी नियमानुसार लाइसेंस लेना चाहता है, उसे कोई समस्या नहीं आएगी। इस बाबत अधिकारियों को निर्देश दे दिए जाएंगे।
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जस्टिस एपी साही और जस्टिस संजय हरकौली की बेंच ने यूपी सरकार को नई लाइसेंस जारी करने और पुराने लाइसेंस रिन्यू करने का आदेश दिया है। बेंच ने कहा कि सरकार किसी को मांसाहार खाने से नहीं रोक सकती है।
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याचिकाकर्ताओं ने शिकायत की थी कि उनके लाइसेंस का समय 31 मार्च को पूरा हो चुका है और उन्होंने रिन्यूवल के लिए आवेदन कर रखा है लेकिन सरकार अनुमति नहीं दे रही।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस कर रहे वकील ने कहा था कि सरकार अप्रत्यक्ष रूप से स्लॉटर हाउस बंद करना चाह रही है जबकि किसी भी व्यक्ति को अपनी पसंद का खाना खाने का अधिकार है चाहे वो वेज हो या नॉनवेज।
वहीं, सरकार की तरफ से महाधिवक्ता और विशेष वकील का तर्क था कि सरकार नवीनीकरण तभी करेगी जब याची सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के मुताबिक स्लॉटर हाउस और मीट की दुकान चलाएं।
बता दें कि 30 मार्च को मुख्यमंत्री ने स्लाटर हाउस संचालकों से मुलाकाता की थी और कहा था कि वे नियम- कानून के दायरे में रहकर वैध तरीके से कारोबार करेंगे तो कोई दिक्कत नहीं आएगी। उन्होंने पुराने स्लाटर हाउसों का आधुनिकीकरण कराने व नियमानुसार लाइसेंस लेकर ही चलाने की भी सलाह दी थी।
कहा था कि जो भी मीट व्यापारी नियमानुसार लाइसेंस लेना चाहता है, उसे कोई समस्या नहीं आएगी। इस बाबत अधिकारियों को निर्देश दे दिए जाएंगे।