केंद्र ने दिया झटका तो मुश्किल में फंसे अखिलेश
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बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि पीड़ित किसानों को राहत में केंद्र सरकार से उम्मीद से कम सहयोग मिलने से प्रदेश सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सरकार के सामने सांसत वाले हालात हैं। यदि किसानों के लिए घोषित राहत के ऐलान पर प्रदेश सरकार कायम रहती है तो उसे अपने खजाने से करीब 6700 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।
दूसरी ओर यदि आधी-अधूरी राहत बांटकर छोड़ देती है तो किसान-वर्ष में आलोचना की पात्र बनेगी। वित्त व राजस्व विभाग के अफसरों की नजर मुख्यमंत्री पर टिकी है। मुख्यमंत्री के लौटते ही इस पर विचार की तैयारी है।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि केंद्र के कदम से चुनौती बढ़ गई है। दरअसल, केंद्र के नए मानक के हिसाब से किसानों को फसलों के नुकसान का मुआवजा देने के लिए करीब 7500 करोड़ रुपये चाहिए।
प्रदेश सरकार ने किसानों को केंद्र से अलग भी सहायता देने का ऐलान कर रखा है। इस वजह से करीब 2500 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए जाने हैं। इस तरह किसानों को आपदा राहत के रूप में मदद के लिए करीब दस हजार करोड़ रुपये चाहिए।
प्रदेश ने केंद्र से करीब 7600 करोड़ रुपये मांगे थे। केंद्र ने उम्मीदें तोड़ते हुए सिर्फ 2801 करोड़ रुपये देने की बात कही है। करीब 253 करोड़ रुपये राज्य आपदा राहत कोष में पहली किस्त के रूप में केंद्र से मिला। यदि दूसरी किस्त के 253 करोड़ रुपये मिला लिए जाएं तो केंद्र से कुल जमा 3317 करोड़ रुपये ही मिल पाएंगे।
कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही है राज्य सरकार
ऐसे में प्रदेश सरकार को पीड़ित किसानों को मुआवजा देने के लिए करीब 6700 करोड़ रुपये का बंदोबस्त अपने खजाने से करना होगा। बड़े बजट वाले तमाम महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को आगे लेकर बढ़ रही सरकार के सामने किसानों के लिए इस मोटी रकम का बंदोबस्त करना आसान नहीं।
इस पर प्रमुख सचिव राजस्व सुरेश चंद्रा कहते है ‘‘प्रदेश सरकार ने किसानों को मुआवजा देने के लिए राज्य आकस्मिकता निधि को बढ़ाया। प्रदेश सरकार अपने खजाने से 3500 करोड़ रुपये बांट चुकी है। राज्य आकस्मिकता निधि से 500 करोड़ रुपये और प्राप्त करने की कार्यवाही चल रही है। केंद्र से उम्मीद से बेहद कम मदद से उपजी नई स्थितियों में मुख्यमंत्री को आते ही अवगत कराया जाएगा। इसके बाद निर्णय होगा कि आगे क्या किया जाए? अभी बड़ी संख्या में किसान राहत पाने से बकाया हैं।’’
ये हैं चुनौतियां
- प्रदेश के खजाने पर एक वित्तीय वर्ष में 6700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार किस तरह से वहन किया जाए।
- सरकार ने वर्ष 2015-16 को किसान-वर्ष घोषित किया है। इसी वजह से उसने आगे बढ़कर केंद्र के अलावा अतिरिक्त सहयोग का ऐलान किया। नई परिस्थितियों में वह सभी किसानों को मदद देते हुए अपने वादे पर कायम रह पाती है या नहीं देखनी वाली बात होगी।
बेहद मुश्किल होगा बजट का बंदोबस्त करना
- प्रदेश सरकार ने किसानों को मदद पहुंचाने के लिए राज्य आकस्मिकता निधि को 600 करोड़ से बढ़ाकर 6000 करोड़ कर दिया। इस निधि से 3500 करोड़ रुपये सिर्फ इसी काम पर खर्च हो चुके हैं। प्रदेश सरकार को अनुपूरक सत्र में इस पैसे का समायोजन करना है। केंद्र से मिलने वाली रकम इसके समायोजन की जरूरत से भी बहुत कम है। सरकार को इसके लिए अलग से पैसे का जुगाड़ करना होगा।
- केंद्र ने केंद्रीय सहायता वाली योजनाओं को रीस्ट्रक्चर किए जाने के बाद राज्य में पहले से चल रही कई योजनाएं बंद कर दी हैं। प्रदेश सरकार ने अनुपूरक बजट में ऐसी योजनाओं के स्थान पर राज्य सरकार के संसाधन से कई नई योजनाओं के ऐलान का मन बना रखा है। विभागों को इसके निर्देश दिए जा चुके हैं। जानकार बताते हैं कि अब नई योजनाओं के लिए बजट का बंदोबस्त बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
- वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि यह चुनौती तिहरी है। पहला, अगले अनुपूरक में ही राज्य आकस्मिकता निधि से लिए गए पैसे का समायोजन करना होगा। इसके लिए करीब 4000 करोड़ रुपये चाहिए।
दूसरा, यदि सरकार किसानों के साथ किए वादे पर अमल करेगी तो कम से कम 6700 करोड़ रुपये राहत बांटने के लिए और चाहिए। ऐसे में नई योजनाओं के लिए पैसे के बंदोबस्त की मुश्किलों का अंदाजा लगाना कठिन नहीं है।