जीत के लिए इंदिरा, अटल और राजीव ने चूमी इन मंदिरों की चौखट

ब्यूरो/अमरउजाला, अयोध्या Updated Tue, 31 Jan 2017 02:32 PM IST
अटल बिहारी बाजपेयी
अटल ब‌िहारी बाजपेयी - फोटो : amar ujala
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चुनावी बिगुल बजते ही रामनगरी अयोध्या में नेताओं की हाजिरी बढ़ जाती है। देश-प्रदेश ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों से भी चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे नेता मंदिर की चौखट पर मत्था टेकने जरूर आते हैं।
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देश के प्रधानमंत्री रहे स्व. इंदिरा गांधी, स्व. राजीव गांधी के साथ अटल बिहारी वाजपेयी तक ने चुनाव के दौरान प्रसिद्ध मंदिरों की चौखट को चूमा है। अब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जिले के प्रत्याशियों के साथ अवध व पूर्वांचल के नेताओं का रोजाना आना-जाना लगा हुआ है।


इसके अलावा जिले के कई अन्य मंदिरों में भी दर्शन-पूजन को लोग का आधार मानकर जुट रहे हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव अब शबाब पर आ चुका है। जिले में पांचवें चरण में मतदान होना है।

लगभग सभी दलों ने पांचों विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिया है, हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने बीकापुर व गोसाईगंज विधानसभा सीटों पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

सभी दलों से घोषित प्रत्याशियों के साथ अघोषित सीटों पर दावेदार की दौड़ में शामिल नेता रामनगरी की परिक्रमा लगातार कर रहे हैं। बजरंग बली की प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी व कनक भवन मंदिर नेताओं की पहली पसंद है। चुनावी वैतरणी पार करने के लिए नेता जनता जनार्दन से पहले भगवान की चरण वंदना करना नहीं भूल रहे हैं।     

अटल का अयोध्या से रहा गहरा लगाव

डेमो
डेमो - फोटो : demo pic
वर्ष 1972 में बलरामपुर संसदीय सीट से दूसरी बार चुनाव लड़ते समय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हनुमंत लला के दरबार में मत्था टेक कर जीत का आशीर्वाद मांगा था।

उस दौरान भाजपा नगर अध्यक्ष रहे महंत मनमोहन दास बताते हैं कि अटल जी का अयोध्या और हनुमानगढ़ी से गहरा लगाव रहा है। बताते हैं कि चुनाव में दर्शन के लिए तो आए ही थे, जब भी वह जिले व आसपास से गुजरते तो उनके गुरू स्व. सत्यनारायण दास से मुलाकात करने जरूर आते थे।             
  
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी व स्व. राजीव गांधी भी अयोध्या हनुमंत लला के दरबार में हाजिरी जरूर लगाते रहे हैं। महंत गिरीश पति त्रिपाठी बताते हैं कि स्व. इंदिरा गांधी के साथ स्व. राजीव गांधी जिले में पहुंचे तो हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया। पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के साथ अन्य शीर्ष नेता भी अयोध्या दर्शन करने जरूर जाते रहे हैं।
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