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अशिक्षित होते हुए भी यूपी के इस जिले की महिलाएं देश के लिए बनेंगी रोल मॉडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बहराइच
Updated Tue, 09 Jan 2018 03:22 PM IST
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- फोटो : डेमो
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बहराइच के जंगल से सटे गांवों की महिलाएं अशिक्षा के बावजूद देश के लिए रोल मॉडल बनेंगी। अशिक्षित होते हुए भी महिलाओं ने सोलर लैंप बनाने का हुनर सीखा है। अब महिलाएं प्रतिदिन सोलर लैंप तैयार कर रही हैं। उसके निर्माण और बिक्री से महिलाएं 350 से 500 रुपये प्रतिदिन कमा रही हैं।
इन महिलाओं पर भारत सरकार की पहल के बाद आईआईटी मुंबई के तकनीकी विशेषज्ञों ने डाक्यूमेंट्री फिल्म तैयार की है। यह फिल्म पूरे देश में प्रदर्शित कर महिलाओं को स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा। मिहींपुरवा विकासखंड में अशिक्षा और बेरोजगारी 80 फीसदी है।
इलाका जंगल से सटा होने से यहां पर विकास की किरणें नहीं पहुंच सकी हैं। अभाव के बीच राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण परिवार के लिए उजाला बनकर सामने आया है। मिशन की ओर से सोलर लैंप निर्माण के प्रशिक्षण की कवायद पांच माह पूर्व शुरू हुई थी। इसके तहत सोलर लैंप बनाने के उपकरण आईआईटी मुंबई की ओर से भेजे गए।
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इन महिलाओं पर भारत सरकार की पहल के बाद आईआईटी मुंबई के तकनीकी विशेषज्ञों ने डाक्यूमेंट्री फिल्म तैयार की है। यह फिल्म पूरे देश में प्रदर्शित कर महिलाओं को स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा। मिहींपुरवा विकासखंड में अशिक्षा और बेरोजगारी 80 फीसदी है।
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इलाका जंगल से सटा होने से यहां पर विकास की किरणें नहीं पहुंच सकी हैं। अभाव के बीच राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण परिवार के लिए उजाला बनकर सामने आया है। मिशन की ओर से सोलर लैंप निर्माण के प्रशिक्षण की कवायद पांच माह पूर्व शुरू हुई थी। इसके तहत सोलर लैंप बनाने के उपकरण आईआईटी मुंबई की ओर से भेजे गए।
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घर की आर्थिक स्थिति सुधरी
डेमो
ब्लॉक एंकर पर्सन नंदकिशोर ने बताया कि पांच माह में अब तक 6129 सोलर लैंप का निर्माण हो चुका है। इनमें 3807 लैंपों का वितरण किया जा चुका है। इन लैंपों के वितरण के लिए विद्यालयों को चुना जाता है, जहां विद्यार्थी 100 रुपये अदा कर लैंप खरीद सकते हैं।
निद्धीपुरवा निवासी रानी जायसवाल और गोपिया निवासी कमर जहां ने कहा कि वे चूल्हा चौका तक सीमित थी। जब अधिकारियों की मीटिंग गांव में हुई तो लगा कि अन्य योजनाओं की तरह यह योजना भी फाइलों तक सीमित रहेगी। लेकिन हिम्मत कर आगे बढ़े तो न सिर्फ हुनर मिला, बल्कि परिवार भी समृद्ध हुआ।
घर की आर्थिक स्थिति सुधरी है। गांव निवासी संगीता वर्मा और ललिता देवी ने बताया कि उनको देखकर 26 महिलाएं समूह से जुड़ीं। अब सभी सोलर लैंप निर्माण का प्रशिक्षण सीखकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकी हैं। पहलेे परिवार के लोगों ने विरोध किया, लेकिन अब सभी सहयोग कर रहे हैं।
निद्धीपुरवा निवासी रानी जायसवाल और गोपिया निवासी कमर जहां ने कहा कि वे चूल्हा चौका तक सीमित थी। जब अधिकारियों की मीटिंग गांव में हुई तो लगा कि अन्य योजनाओं की तरह यह योजना भी फाइलों तक सीमित रहेगी। लेकिन हिम्मत कर आगे बढ़े तो न सिर्फ हुनर मिला, बल्कि परिवार भी समृद्ध हुआ।
घर की आर्थिक स्थिति सुधरी है। गांव निवासी संगीता वर्मा और ललिता देवी ने बताया कि उनको देखकर 26 महिलाएं समूह से जुड़ीं। अब सभी सोलर लैंप निर्माण का प्रशिक्षण सीखकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकी हैं। पहलेे परिवार के लोगों ने विरोध किया, लेकिन अब सभी सहयोग कर रहे हैं।