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पहले ही बेहाल भाजपा, कैसे मिलेगी जीत?

Sat, 13 Sep 2014 08:08 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 13 Sep 2014 08:08 AM IST
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lack of management in UP BJP for bypoll.

‘ज्यादा जोगी-मठ उजाड़’ यह कहावत एक बार फिर भाजपा पर लागू होती दिख रही है। उपचुनाव के लिए एक-एक सीट पर पांच से छह-सात प्रभारी बना दिए गए हैं। इसके चलते काम कम, खींचतान ज्यादा हो रही है।

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जिस अव्यवस्थित तरीके से इनकी तैनाती कर दी गई है, उसके चलते भी प्रभारियों का ज्यादातर कामकाज कागजों पर ही सिमटकर रह गया है। मतदान में सिर्फ नौ दिन बचे हैं लेकिन भाजपा का चुनाव प्रचार रफ्तार पकड़ते नहीं दिख रहा है।
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प्रभारियों की सूची और इन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी देखकर ही समझा जा सकता है कि इनकी मेहनत कितना रंग जमा पाएगी। पहले प्रभारी बनाने में ध्यान नहीं रखा गया कि भविष्य में उसे उम्मीदवार तो नहीं बना दिया जाएगा।
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इस बात का भी ध्यान नहीं रखा गया कि अलग-अलग क्षेत्र की जिम्मेदारी देने से वह दोनों में समन्वय कैसे करेगा। संगठन के क्षेत्र प्रभारियों को सीट का भी प्रभारी बना दिया गया है। इसके चलते पूरी स्थिति गड्डमड्ड हो गई है।

नेता, सांसद और विधायक सभी बनें प्रभारी

lack of management in UP BJP for bypoll.

पहले कुछ नेताओं को प्रभारी बनाया गया। फिर कुछ क्षेत्र प्रभारियों को ही उपचुनाव वाली सीटों का भी प्रभारी बना दिया गया। इसके बाद पदाधिकारियों को प्रभारी बनाकर लगा दिया गया। इससे भी संतुष्टि नहीं हुई तो सांसद व विधायकों की भी प्रभारी बना दिया गया।

सुब्रत पाठक और विपिन वर्मा डेविड को मैनपुरी संसदीय क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया। नोएडा विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी अमित अग्रवाल, बिजनौर की सुरेश राणा, सहारनपुर की अश्विनी त्यागी, ठाकुरद्वारा की अशोक कटारिया, चरखारी की अजय पटेल, हमीरपुर की राजेश द्विवेदी और जयदीप पुरोहित, लखनऊ पूरब की आशुतोष टंडन (गोपाल टंडन) व मान सिंह,  निघासन की सुभाष त्रिपाठी व लोकेंद्र प्रताप सिंह, बलहा की करण सिंह पटेल व रमाकांत तिवारी, सिराथू की देवेंद्र सिंह चौहान व रोहनियां की लक्ष्मण आचार्य व नंदलाल को जिम्मेदारी सौंपी गई।

किसकी सुनें कार्यकर्ता

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इनके अलावा बिजनौर में राजेश अग्रवाल, सहारनपुर में स्वतंत्र देव सिंह, चरखारी में समीर सिंह, हमीरपुर में नीलिमा कटियार, निघासन में अनूप गुप्ता को भी लगा दिया गया। इतने से मन नहीं भरा तो एक सीट पर कई-कई सांसद लगा दिए गए हैं।

इन्हीं के साथ एक-एक संगठन मंत्री को भी एक-एक सीट की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस स्थिति ने कार्यकर्ताओं को उलझन में डाल दिया है।

पश्चिमी यूपी के एक पदाधिकारी कहते हैं कि कई प्रभारियों के होने से कार्यकर्ता परेशान हैं कि किसका निर्देश मानें। जो क्षेत्र में पहुंच गए हैं, वे अपनी तरह से काम कराना चाहते हैं और जो नहीं पहुंचे हैं, वे भी फोन से निर्देश दे रहे हैं।

बड़ा सवालः कैसे निभाएं जिम्मेदारी

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गोपाल टंडन बृज क्षेत्र के प्रभारी थे। पार्टी ने इन्हें पहले उपचुनाव के लिए लखनऊ पूरब सीट की जिम्मेदारी सौंप दी जबकि बृज में लोकसभा की मैनपुरी सीट पर भी उपचुनाव होना था। बाद में गोपाल टंडन लखनऊ पूरब से प्रत्याशी घोषित हो गए तो शिवप्रताप शुक्ल को पूरब की जिम्मेदारी सौंपी गई।

शुक्ल अवध क्षेत्र के भी प्रभारी हैं। अवध क्षेत्र में तीन जगह बलहा (बहराइच), निघासन (खीरी) व लखनऊ में चुनाव हो रहा है। क्षेत्र प्रभारी के नाते उन्हें तीनों जगह जाना है और पूरब सीट की भी जिम्मेदारी संभालनी है।

स्वतंत्र देव सिंह पश्चिम क्षेत्र के प्रभारी हैं। यहां विधानसभा की चार सीटों पर उपचुनाव हो रहा है। अब उन्हें सहारनपुर सीट का भी प्रभारी बना दिया गया। ऐसे में बाकी की सीटों पर वे कैसे फोकस करेंगे। अन्य कुछ सीटों पर यही हाल है।

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