फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   know from experts causes, symptoms and prevention of asthma On World Asthma Day

विश्व अस्थमा दिवस: दमा से हांफता देश... विश्व के मुकाबले चार गुना मृत्यु दर, इन कारणों से खराब हो रहे हालात

Tue, 06 May 2025 09:11 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Tue, 06 May 2025 09:11 AM IST
सार

विश्व के मुकाबले भारत में दमा से होने वाली मौतों की संख्या चार गुना है। आनुवांशिकता और धूम्रपान के साथ ही पर्यावरण का खराब स्तर भी लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है। आगे पढ़ें केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष द्वारा साझा की गई अहम जानकारियां...

विज्ञापन
know from experts causes, symptoms and prevention of asthma On World Asthma Day
विश्व अस्थमा दिवस - फोटो : Freepik.com

विस्तार

विश्व अस्थमा दिवस हर साल मई माह के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में अस्थमा की बीमारी और देखभाल के बारे में जागरुकता फैलाना है। इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस की थीम 'श्वसन उपचार को सभी के लिए सुलभ बनाना' है। 

विज्ञापन


भारत जैसे देश में बाकी विश्व के मुकाबले इस दिवस का महत्व और भी ज्यादा है। ग्लोबल बर्डन ऑफ अस्थमा रिपोर्ट के अनुसार विश्व में लगभग 34 करोड़ और भारत में करीब चार करोड़ लोग दमा से पीड़ित हैं। दमा से होने वाली मौत के आंकड़े इससे भी भयावह हैं। अस्थमा से होने वाली माैतों का वैश्विक आंकड़ा 13 फीसदी सालाना है, वहीं भारत में यह प्रतिशत 46 फीसदी है।
विज्ञापन


विश्व अस्थमा दिवस का आयोजन ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (जीआईएनए) द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है। सन् 1998 में, बार्सिलोना, स्पेन में पहली विश्व अस्थमा बैठक में 35 से अधिक देशों द्वारा पहला विश्व अस्थमा दिवस मनाया गया था। तब से लेकर यह दिवस बराबर मनाया जा रहा है। अस्थमा (दमा) एक आनुवांशिक रोग है जिसमें रोगी की सांस की नलियां अतिसंवेदनशील होती हैं। कुछ कारकों के प्रभाव से उनमें सूजन आ जाती है। इससे रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ेंः- UP News: अब हर सीएचसी में खुलेगा जन औषधि केंद्र, इन केंद्रों की निगरानी के लिए विकसित किया जा रहा तंत्र

Trending Videos

हिस्टामीन स्रावित होने से श्वास नलिकाएं संकुचित हो जाती हैं

धूल (घर या बाहर की) या पेपर की डस्ट, रसोई का धुंआ, नमी, सीलन, मौसम परिवर्तन, सर्दी-जुकाम, धूम्रपान, फास्टफूड, मानसिक चिंता, व्यायाम, पालतू जानवर एवं पेड़ पौधों एवं फूलों के परागकण तथा वायरस एवं बैक्टीरिया के संक्रमण आदि प्रमुख होते हैं। जब अस्थमा के कारक मरीज के संपर्क में आते है तो शरीर में मौजूद विभिन्न रसायनिक पदार्थ (जैसे हिस्टामीन) स्रावित होते हैं। इनसे श्वास नलिकाएं संकुचित हो जाती हैं। श्वास नलिकाओं की भीतरी दीवार में लाली और सूजन आ जाती है और उसमें बलगम बनने लगता है। इन सभी से दमा के लक्षण पैदा होते है तथा बार-बार कारकों के संपर्क में आने से श्वास की नलिकाओं में स्थायी रूप से बदलाव हो जाते हैं।

दो तिहाई में बचपन से शुरू होती है बीमारी

दो तिहाई से अधिक लोगों में दमा बचपन से ही शुरू हो जाता है। इसमें बच्चों को खांसी होना, सांस फूलना, सीने में भारीपन, छींक आना व नाक बहना तथा बच्चे का सही विकास न हो पाना जैसे लक्षण होते हैं। शेष एक तिहाई लोगों में दमा के लक्षण युवा अवस्था में प्रारंभ होते हैं। इस तरह दमा बच्चों या युवावस्था में ही प्रारंभ होने वाला रोग है।

इन्हेलर है सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा

दमा के इलाज में इन्हेलर चिकित्सा सर्वश्रेष्ठ है क्योकि इसमें दवा की मात्रा का कम इस्तेमाल होता है। इस तरह से दवाई दुष्प्रभाव कम से कम होता है। इसका असर सीधा सांस नलियों और फेफड़े पर होता है। इसलिए अस्थमा में इन्हेलर चिकित्सा की सलाह दी जाती है।

अस्थमा के लक्षण- 

खांसी- जो रात में और गंभीर हो जाती है, सांस लेने में कठिनाई जोकि दौरों के रूप में तकलीफ देती हो, छाती में कसाव या जकड़न, छाती में से घरघटाहट जैसी आवाज आना, गले से सीटी जैसी आवाज आना।

अस्थमा का उपचार- 

दमा के इलाज के लिए दो तरह की दवाइयां होती है। वायुमार्ग खोलने के लिए वायुमार्ग की सूजन कम करने के लिए। इलाज के लिए दो प्रमुख तरीके के इन्हेलर है। 1. रिलीवर इन्हेलर- जो जल्दी से काम करके श्वांस की नलिकाओं की मांसपेशियों का तनाव ढीला करते है और तुरन्त असर करते है। इनको सांस फूलने पर लेना होता है।

कंट्रोलर इन्हेलर श्वास नलियों में उत्तेजना और सूजन घटाकर उनको अधिक संवेदनशील बनने से रोकते हैं। इससे गंभीर दौरे का खतरा कम हो जाता है। लक्षण न होने पर भी लगातार लेना चाहिए। दमा के अन्य नये उपचार जैसे कि बायोजीकल्स का इस्तेमाल भी किया जाता है।

दमा के दौरे को रोकने के लिए उपाय-

मौसम में घटते-बढ़ते तापमान में अपना ध्यान रखें। दमें की दवा हमेशा अपने पास रखें और कंट्रोलर इन्हेलर हमेशा समय से लें। सिगरेट/सिगार व बीड़ी के धुएं से बचें। अपने फेफड़े को मजबूत बनाने के लिए सांस का व्यायाम अर्थात प्राणायाम करें। यदि बलगम गाढ़ा हो गया है, खांसी, घरघराहट और सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाये या रिलीवर इन्हेलर की जरूरत बढ़ गई हो तो तुरन्त अपने चिकित्सक से मिलें।

दमा के रोगी ये न करें-

  • धूल-गंदगी से बचें।
  • बच्चों को लंबे रोएंदार कपड़े न पहनाएं रोएंदार खिलौने खेलने को न दें।
  • पंख या रेशम के तकिये का इस्तेमाल न करें।
  • सेमल की रूई से भरे तकिए, गद्दा या रजाई का इस्तेमाल न करें।
  • घर के अंदर फूलों वाले पौधे या ताजे फूल न रखें।
  • सिगरेट/बीड़ी न पिएं, रोगी के घर में किसी अन्य को भी सिगरेट/बीड़ी न पीनें दें।
  • रोगी एयरकंडीशन या कूलर के कमरे से एकदम गर्म हवा में बाहर न जाएं।
  • यात्रा के दौरान बच्चों को लेकर वाहन की खिड़की के पास न बैठें।
  • बिना डाक्टर की सलाह के कोई दवा लंबे समय तक न खाएं।
  • धुआं, धूल, मिट्टी, वाली जगह से बिना नाक मुंह ढंके न गुजरें।
  • इत्र, परफ्यूम या डीओडेरेंट का इस्तेमाल न करें।
  • घर में जानवर न पालें।
  • मच्छरों को भागाने वाली कॉइल या अगरबत्ती के साथ ही साधारण अगरबत्ती/धूपबत्ती का भी इस्तेमाल न करें।
  • घर की सफाई, पुताई व पेंट के समय रोगी घर में न रुकें।

लेखक-
डॉ. सूर्यकांत- प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी अस्थमा एंड एप्लाइड इम्यूनोलॉजी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed