{"_id":"5f3bc7fd8ebc3e0744094c43","slug":"know-about-the-relation-between-pandit-jasraj-and-lucknow","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"स्मृति शेषः सुरों के सम्राट पंडित जसराज को खूब भाती थी नवाबों की नगरी, सुबह-सुबह शुरू हो जाती थी आवाज की बाजीगरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्मृति शेषः सुरों के सम्राट पंडित जसराज को खूब भाती थी नवाबों की नगरी, सुबह-सुबह शुरू हो जाती थी आवाज की बाजीगरी
Tue, 18 Aug 2020 05:55 PM IST
ishwar ashish
आरिफ, अमर उजाला, लखनऊ
आरिफ, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 18 Aug 2020 05:55 PM IST
विज्ञापन
सत्तर के दशक में यूपी एमेच्योर फोटोग्राफिक एसोसिएशन की कैमरा आउटिंग के कार्यक्रम में। (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुरों के सम्राट पंडित जसराज का लखनऊ से दिली नाता था। वे अक्सर लखनऊ आते और महानगर में पद्मभूषण कुंवर नारायण के घर विष्णु कुटी में रहा करते थे। उस दौर के कई लोगों से उनके व्यक्तिगत संबंध थे। संबंधों का लिहाज करना उन्हें बखूबी आता था। ये कहना है कला एवं शिल्प महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं संकायाध्यक्ष जयकृष्ण अग्रवाल का।
विज्ञापन
बताते हैं कि शहर वालों ने कई बार उनकी आवाज के जादू को सुना और महसूस किया। बढ़ती उम्र और अमेरिका में रहने की वजह से वो इधर काफी समय से नहीं आए। जेहन पर जोर डालते हुए जयकृष्ण अग्रवाल बताते हैं कि सत्तर के दशक में यूपी एमेच्योर फोटोग्राफिक एसोसिएशन की कैमरा आउटिंग के कार्यक्रम में उन्होंने शिरकत की थी।
विज्ञापन
उस दौर की मशहूर हस्तियां जैसे श्रीलाल शुक्ल, डॉ. सुरेश अवस्थी, पंडित सीता शरण सिंह, योगेन्द्र नाथ ‘योगी’ समेत मुझे भी उसमें हिस्सा लेने का मौका मिला। बताते हैं कि पंडितजी रोजाना सुबह रियाज करते थे। जिसको सुन पाना किसी भी संगीत प्रेमी के लिए दावत से कम नहीं था।
विज्ञापन
उसके बाद चुनिंदा लोगों के साथ लॉन में चाय की महफिल जमती, जिसमें दुनियाभर की बातें होतीं। किराना और बनारस घराने की मशहूर गायिका आस्था गोस्वामी बताती हैं कि बचपन में पंडित जसराज से मिलने को कई बार सौभाग्य मिला। मेरी शादी वृंदावन में हुई। मेरी ससुराल (पंडित राधारमण गोस्वामी) से भी पंडित जी का परिवारिक संबंध था।
वहां भी कई बार उनका आशीर्वाद मिला। बताती हैं कि वे छोटे बच्चों से बहुत स्नेह करते थे। मेरी दो साल की बेटी उनकी बहुत पक्की दोस्त थी। जाने दोनों कौन सी भाषा में बात करते, जो हमारी समझ में नहीं आती पर उन दोनों के भाव देख पता चलता कि दोनों एक दूसरे को समझे रहे हैं।
बच्चों के साथ खेलते थे क्रिकेट
गायिका आस्था गोस्वामी की बेटी के साथ। (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
एक बार कुंवर नारायण जी का बेटा अपूर्व जो उस वक्त काफी छोटा था, अपने दोस्तों के साथ लॉन में क्रिकेट खेल रहा था। उसी वक्त पंडित जसराज बाहर निकले और अपूर्व से खुद को भी उसमें शामिल कराने को कहा। नन्हें अपूर्व से पंडित जी ने शर्त रखी कि मैं बॉलिंग नहीं करुंगा, सिर्फ बैटिंग करवा लो।
एक तरफ पंडित जी बिल्कुल बच्चों की तरह जिद कर रहे और दूसरी तरफ अपूर्व। खैर.. पंडित जी की जिद काम कर गई और अपूर्व उनसे सिर्फ बैटिंग करवाने को राजी हो गया। उस वक्त हम काफी लोग खड़े थे, जो इस पूरी बहस को देख पंडितजी की इस बालसुलभ हरकत पर हंस रहे थे।
सादा खाना पसंद था
अपने जायके के लिए दुनिया भर में मशहूर लखनऊ में रहने के दौरान भी पंडितजी कभी खाने के लिए कोई खास फरमाइश नहीं करते थे। बेहद सादा खाना और सादा जीवन जीने का उनका तरीका था। जिसे उन्होंने ताउम्र कायम रखा।
हर व्यक्ति से पूछते थे हालचाल
आस्था बतातीं हैं कि संबंधों को निभाना पंडित जी को खूब आता था। हमारी ससुराल से उनके इतने गहरे रिश्ते थे कि घर में घुसते ही एक-एक व्यक्ति को तलाश कर के जब तक उसके हालचाल न पूछ लें, उन्हें चैन नहीं आता था। मेरे दादा ससुर जो भगवताचार्य और जगतगुरु की उपाधि से सुशोभित थे, उनसे पंडित जसराज जब बात करते तो बहुत इज्जत देते। लगता ही नहीं था कि वे इतने बड़े गायक हैं।
एक तरफ पंडित जी बिल्कुल बच्चों की तरह जिद कर रहे और दूसरी तरफ अपूर्व। खैर.. पंडित जी की जिद काम कर गई और अपूर्व उनसे सिर्फ बैटिंग करवाने को राजी हो गया। उस वक्त हम काफी लोग खड़े थे, जो इस पूरी बहस को देख पंडितजी की इस बालसुलभ हरकत पर हंस रहे थे।
सादा खाना पसंद था
अपने जायके के लिए दुनिया भर में मशहूर लखनऊ में रहने के दौरान भी पंडितजी कभी खाने के लिए कोई खास फरमाइश नहीं करते थे। बेहद सादा खाना और सादा जीवन जीने का उनका तरीका था। जिसे उन्होंने ताउम्र कायम रखा।
हर व्यक्ति से पूछते थे हालचाल
आस्था बतातीं हैं कि संबंधों को निभाना पंडित जी को खूब आता था। हमारी ससुराल से उनके इतने गहरे रिश्ते थे कि घर में घुसते ही एक-एक व्यक्ति को तलाश कर के जब तक उसके हालचाल न पूछ लें, उन्हें चैन नहीं आता था। मेरे दादा ससुर जो भगवताचार्य और जगतगुरु की उपाधि से सुशोभित थे, उनसे पंडित जसराज जब बात करते तो बहुत इज्जत देते। लगता ही नहीं था कि वे इतने बड़े गायक हैं।