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जब क्रांतिकारियों के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी ने बनाया था 'डिफेंस फंड'
Sat, 27 Apr 2019 04:56 PM IST
ishwar ashish
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 27 Apr 2019 04:56 PM IST
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गणेश शंकर विद्यार्थी
गणेश शंकर विद्यार्थी के बारे में सभी को पता है कि वह न सिर्फ प्रखर पत्रकार बल्कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। उन्होंने ‘कर्मयोगी’ और ‘स्वराज्य’ जैसे क्रांतिकारी पत्रों में भी काम किया। 1913 में उन्होंने क्रांतिकारी अखबार ‘प्रताप’ का प्रकाशन भी शुरू किया।
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इस चक्कर में उन पर कई मुकदमे हुए। गिरफ्तारी हुई। जेल भेजे गए, लेकिन वह झुके नहीं। वर्ष 1929 में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे। वह सांप्रदायिक सद्भाव के पक्षधर थे। इसी में उनकी जिंदगी भी चली गई। काकोरी केस में फंसे क्रांतिकारियों को छुड़ाने के लिए भी उन्होंने काफी प्रयत्न किया।
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क्रांतिकारियों के संबंध में कई पुस्तकें लिखने वाले सुधीर विद्यार्थी ने एक संस्मरण में लिखा है, ‘सरकार की तरफ से क्रांतिकारियों के पक्ष से पं. हरकरन नाथ मिश्रा को वकील नियुक्त किया गया। विद्यार्थी जी चाहते थे कि क्रांतिकारियों की ओर से और बड़े से बड़े वकील खड़े किए जाएं ताकि उन्हें छुड़ाया जा सके। पर, संकट धन का था।
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‘प्रताप’ प्रेस के जरिये क्रांतिकारियों की मदद का किया फैसला
गणेश शंकर विद्यार्थी
गणेश शंकर विद्यार्थी ने ‘प्रताप’ प्रेस के जरिये क्रांतिकारियों की मदद का फैसला किया। उन्होेंने क्रांतिकारियों की सहायता के लिए ‘प्रताप’ प्रेस के जरिये ‘डिफेंस फंड’ भी स्थापित किया ताकि मुकदमे के लिए धन जुटाया जा सके।
धन एकत्र भी हुआ। उस समय लखनऊ के बड़े वकील जगत नारायण मुल्ला से बात भी की। मोतीलाल नेहरू ने भी उनसे क्रांतिकारियों की पैरवी के लिए कहा, लेकिन पता नहीं किन कारणों से वह सरकार के पक्ष से वकील हो गए।’
धन एकत्र भी हुआ। उस समय लखनऊ के बड़े वकील जगत नारायण मुल्ला से बात भी की। मोतीलाल नेहरू ने भी उनसे क्रांतिकारियों की पैरवी के लिए कहा, लेकिन पता नहीं किन कारणों से वह सरकार के पक्ष से वकील हो गए।’