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मोबाइल व इंटरनेट के आदि हो रहे किशोरों पर शोध करेगा केजीएमयू का मानसिक रोग विभाग
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इंटरनेट और मोबाइल के लती हो रहे स्कूल के छात्रों पर शोध करेगा केजीएमयू। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
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कोरोना के दौरान किशोर इंटरनेट और मोबाइल की तरफ ज्यादा आकर्षित हुए हैं। शिक्षा पद्घति में ऑनलाइन प्रणालि का तेजी से इस्तेमाल होने से कई किशोरों को इसकी लत भी लग गई है।
उनमें कई व्यवहारिक दुश्वारियां देखने को मिल रही हैं। इसके लिए केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग शहर के जूनियर, माध्यमिक सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत किशोरों पर शोध करेगा। साथ ही मनोवैज्ञानिक व्यवहार उपचार भी देगा।
शोध के लिए मानसिक रोग विभाग की एडिशनल आचार्य डॉ. श्वेता सिंह ने जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखकर सहयोग मांगा है।
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अमर कांत सिंह ने बताया कि शोध के लिए सभी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
स्कूलों को कहा गया है कि यदि केजीएमयू की टीम ऐसे शोध के लिए परिसर पहुंचे तो सहयोग किया जाए।
मानसिक रोग विभाग आईसीएमआर द्वारा स्वीकृत परियोजना के तहत यह शोध करेगा। जूनियर, माध्यमिक सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत 11 वर्ष से 18 वर्ष की आयु के किशोरों पर इसके तहत शोध किया जाएगा।
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मानसिक रोग विभाग ने साफ किया है कि परियोजना के प्रतिभागियों पर किसी भी प्रकार का चिकित्सकीय, रक्त परीक्षण दवाई का उपयोग नहीं किया जाएगा।
प्रक्रिया का संपादन छात्रों और अभिभावकों की सहमति पर होगा। वहीं, मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने कहा कि सुरक्षा के लिहजा से यह एक सराहनीय शोध के लिए प्रयास है।
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उनमें कई व्यवहारिक दुश्वारियां देखने को मिल रही हैं। इसके लिए केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग शहर के जूनियर, माध्यमिक सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत किशोरों पर शोध करेगा। साथ ही मनोवैज्ञानिक व्यवहार उपचार भी देगा।
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शोध के लिए मानसिक रोग विभाग की एडिशनल आचार्य डॉ. श्वेता सिंह ने जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखकर सहयोग मांगा है।
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अमर कांत सिंह ने बताया कि शोध के लिए सभी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
स्कूलों को कहा गया है कि यदि केजीएमयू की टीम ऐसे शोध के लिए परिसर पहुंचे तो सहयोग किया जाए।
मानसिक रोग विभाग आईसीएमआर द्वारा स्वीकृत परियोजना के तहत यह शोध करेगा। जूनियर, माध्यमिक सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत 11 वर्ष से 18 वर्ष की आयु के किशोरों पर इसके तहत शोध किया जाएगा।
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मानसिक रोग विभाग ने साफ किया है कि परियोजना के प्रतिभागियों पर किसी भी प्रकार का चिकित्सकीय, रक्त परीक्षण दवाई का उपयोग नहीं किया जाएगा।
प्रक्रिया का संपादन छात्रों और अभिभावकों की सहमति पर होगा। वहीं, मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने कहा कि सुरक्षा के लिहजा से यह एक सराहनीय शोध के लिए प्रयास है।