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केजीएमयू: खून के काले कारोबार पर लगाम लगाने की नई रणनीति, थ्रीडी होलोग्राम वाले स्टिकर से मिलेगा ब्लड
Sat, 04 Jul 2020 01:27 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2020 01:27 PM IST
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- फोटो : डेमो
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केजीएमयू प्रशासन ने खून के काले कारोबार पर लगाम लगाने के लिए नई रणनीति अपनाई है। ऑनलाइन पर्ची का फंडा अपनाने के बाद अब तय किया गया है कि डोनर को ब्लड बैंक का थ्रीडी होलोग्राम युक्त कार्ड दिया जाएगा। केजीएमयू में कुछ समय पहले वार्ड से जारी होने वाली पर्ची पर फर्जी हस्ताक्षर करके डिमांड नोट तैयार करने का मामला सामने आया था।
इस पर ब्लड बैंक की ओर से ऑनलाइन पर्ची निकालने की रणनीति अपनाई गई। इसके साथ ही डोनर कार्ड लेकर आने वालों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हो गया। सूत्र बताते हैं कि पिछले सप्ताह डोनर कार्ड में भी घालमेल की शिकायतें मिली हैं। इसे देखते हुए अब केजीएमयू प्रशासन ने थ्रीडी होलोग्राम स्टिकर युक्त कार्ड की शुरुआत की है।
ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा के मुताबिक, दलालों को रोकने के लिए नई रणनीति बनाई गई है। डोनर कार्ड पर थ्रीडी होलोग्राम स्टिकर लगाने की शुरुआत की गई है। इसे तैयार करना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसमें केजीएमयू का लोगो लगा हुआ है। दोनों को यही कार्ड जारी किया जाएगा।
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इस पर ब्लड बैंक की ओर से ऑनलाइन पर्ची निकालने की रणनीति अपनाई गई। इसके साथ ही डोनर कार्ड लेकर आने वालों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हो गया। सूत्र बताते हैं कि पिछले सप्ताह डोनर कार्ड में भी घालमेल की शिकायतें मिली हैं। इसे देखते हुए अब केजीएमयू प्रशासन ने थ्रीडी होलोग्राम स्टिकर युक्त कार्ड की शुरुआत की है।
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ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा के मुताबिक, दलालों को रोकने के लिए नई रणनीति बनाई गई है। डोनर कार्ड पर थ्रीडी होलोग्राम स्टिकर लगाने की शुरुआत की गई है। इसे तैयार करना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसमें केजीएमयू का लोगो लगा हुआ है। दोनों को यही कार्ड जारी किया जाएगा।
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करीब ढाई सौ यूनिट खून की खपत रोज
केजीएमयू में 200 से 250 यूनिट खून की प्रतिदिन डिमांड आती है। उसे पूरा करने के लिए स्वैच्छिक रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं। इस खून को इमरजेंसी में इस्तेमाल किया जाता है। यदि कोई भी व्यक्ति खून की मांग करता है तो उसके बदले परिजनों को डोनेट करने के लिए कहा जाता है।