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केजीएमयू दवा घोटाला: ऑर्डर से मरीज तक खंगाली जा रही पूरी चेन
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केजीएमयू।
लखनऊ। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना की दवाओं में गड़बड़ी की जांच अब खरीद से लेकर मरीज तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया पर केंद्रित हो गई है। जांच समिति आरोपी चार संविदाकर्मियों की भूमिका के साथ यह भी खंगाल रही है कि अधिकारियों के हस्ताक्षर वाले दवा ऑर्डर का किस तरह इस्तेमाल किया गया और उसमें कितनी हेरफेर हुई।
जांच में सामने आया है कि संविदाकर्मी दवाओं के ऑर्डर तैयार कर अधिकारियों से उन पर हस्ताक्षर करा लेते थे। इसके बाद इन्हीं ऑर्डर के आधार पर दवाओं की खरीद और वितरण में कथित अनियमितता की जाती थी। समिति अब यह मिलान कर रही है कि ऑर्डर में दर्ज दवाओं में से कितनी की सप्लाई हुई, कितनी स्टॉक में दर्ज हुई और वास्तव में कितनी दवाएं मरीजों को दी गईं।
इसके लिए दवा के ऑर्डर, अधिकारियों के हस्ताक्षर, सप्लाई दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर, सॉफ्टवेयर में दर्ज रिकॉर्ड और मरीजों को वितरण का ब्योरा खंगाला जा रहा है। रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर मिलने पर संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
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मामले में चार संविदाकर्मियों के खिलाफ पहले ही चौक कोतवाली में जालसाजी, दवाओं के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। अब पुलिस ने केजीएमयू प्रशासन से खरीद, स्टॉक और वितरण से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। पुलिस जांच में यह भी तय किया जाएगा कि संविदाकर्मियों ने दवा खरीद और वितरण की प्रक्रिया को किस स्तर तक प्रभावित किया।
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जांच में सामने आया है कि संविदाकर्मी दवाओं के ऑर्डर तैयार कर अधिकारियों से उन पर हस्ताक्षर करा लेते थे। इसके बाद इन्हीं ऑर्डर के आधार पर दवाओं की खरीद और वितरण में कथित अनियमितता की जाती थी। समिति अब यह मिलान कर रही है कि ऑर्डर में दर्ज दवाओं में से कितनी की सप्लाई हुई, कितनी स्टॉक में दर्ज हुई और वास्तव में कितनी दवाएं मरीजों को दी गईं।
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इसके लिए दवा के ऑर्डर, अधिकारियों के हस्ताक्षर, सप्लाई दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर, सॉफ्टवेयर में दर्ज रिकॉर्ड और मरीजों को वितरण का ब्योरा खंगाला जा रहा है। रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर मिलने पर संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
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मामले में चार संविदाकर्मियों के खिलाफ पहले ही चौक कोतवाली में जालसाजी, दवाओं के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। अब पुलिस ने केजीएमयू प्रशासन से खरीद, स्टॉक और वितरण से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। पुलिस जांच में यह भी तय किया जाएगा कि संविदाकर्मियों ने दवा खरीद और वितरण की प्रक्रिया को किस स्तर तक प्रभावित किया।