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केजीएमयू में अब मरीजों को मिलेगा ज्यादा शुद्ध खून
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लखनऊ। केजीएमयू में ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन विभाग में पैथोजेन रिडक्शन मशीन स्थापित हो गई है। इससे अब मरीजों को पहले से ज्यादा शुद्ध खून मिल सकेगा। खासतौर से अंग प्रत्यारोपण वाले मरीजों को इसका फायदा मिलेगा, क्योंकि उनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है और जरा सी चूक से पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है। केजीएमयू का दावा है कि एशिया के किसी चिकित्सा संस्थान में स्थापित होने वाली यह पहली मशीन है। वहीं, थोरैसिक और वैस्कुलर सर्जरी के नए विभाग खुलने से मरीजों को राहत मिलेगी।
ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की विभागाध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि पैथोजेन रिडक्शन मशीन के जरिये रक्त में हर तरह के संक्रमण को दूर किया जा सकेगा। पैथोजेन रिडक्शन टेक्नोलॉजी से खून में मौजूद वायरस को निष्क्रिय करने के साथ ही बैक्टीरिया को खत्म किया जा सकेगा। ऐसे में मरीजों को ब्लड से किसी तरह का कोई संक्रमण नहीं होने पाएगा। इस मशीन के जरिये ब्लड में चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू, हेपेटाइटिस बी, सी के वायरस समेत बैक्टीरिया को हटाया जा सकेगा। डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि अंग प्रत्यारोपण वाले मरीजों को प्लाज्मा व प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। इनकी इम्यूनिटी पहले से ही कमजोर होती है। ऐसे में संक्रमण उनके लिए खतरनाक होता है और ब्लड ट्रांसफ्यूजन के समय यह खतरा सबसे अधिक होता है। इसी तरह लिवर, प्लास्टिक एनीमिया, ब्लड कैंसर आदि के मरीजों में बार-बार प्लेटलेट्स व प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में इन मरीजों को ब्लड में मौजूद वायरस व बैक्टीरिया से संक्रमण का खतरा रहता है। अब इस मशीन के लगने के बाद इस तरह के खतरों को दूर किया जा सकेगा। करीब 50 लाख कीमत की यह मशीन सबसे अत्याधुनिक है।
फेफड़े और नसों से जुड़ी समस्याओं के मरीजों को मिलेगी अत्याधुनिक सुविधा
थोरैसिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र सिंह यादव ने बताया कि इस विभाग के लिए वे करीब 15 साल से संघर्ष कर रहे थे। नया विभाग खुलने से फेफड़े से जुड़ी बीमारियों का इलाज आसान होगा। विभाग में मरीजों को भर्ती करने के लिए अलग से वार्ड की व्यवस्था है। वेंटिलेटर से लैस आईसीयू, अत्याधुनिक मशीनों वाले ऑपरेशन थियेटर, डीएसए लैब सहित अन्य सुविधाएं हैं। इससे मरीजों को उपचार मिलेगा और नए विशेषज्ञ तैयार किए जा सकेंगे। वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. अंबरीश कुमार ने बताया कि अब नसों से जुड़ी बीमारियों का इलाज आसान होगा। वैस्कुलर सर्जरी में एमसीएच कोर्स शुरू होने के बाद नए विशेषज्ञ तैयार होंगे। नसों से जुड़ी बीमारियों के मरीजों को भी लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की विभागाध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि पैथोजेन रिडक्शन मशीन के जरिये रक्त में हर तरह के संक्रमण को दूर किया जा सकेगा। पैथोजेन रिडक्शन टेक्नोलॉजी से खून में मौजूद वायरस को निष्क्रिय करने के साथ ही बैक्टीरिया को खत्म किया जा सकेगा। ऐसे में मरीजों को ब्लड से किसी तरह का कोई संक्रमण नहीं होने पाएगा। इस मशीन के जरिये ब्लड में चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू, हेपेटाइटिस बी, सी के वायरस समेत बैक्टीरिया को हटाया जा सकेगा। डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि अंग प्रत्यारोपण वाले मरीजों को प्लाज्मा व प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। इनकी इम्यूनिटी पहले से ही कमजोर होती है। ऐसे में संक्रमण उनके लिए खतरनाक होता है और ब्लड ट्रांसफ्यूजन के समय यह खतरा सबसे अधिक होता है। इसी तरह लिवर, प्लास्टिक एनीमिया, ब्लड कैंसर आदि के मरीजों में बार-बार प्लेटलेट्स व प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में इन मरीजों को ब्लड में मौजूद वायरस व बैक्टीरिया से संक्रमण का खतरा रहता है। अब इस मशीन के लगने के बाद इस तरह के खतरों को दूर किया जा सकेगा। करीब 50 लाख कीमत की यह मशीन सबसे अत्याधुनिक है।
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फेफड़े और नसों से जुड़ी समस्याओं के मरीजों को मिलेगी अत्याधुनिक सुविधा
थोरैसिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र सिंह यादव ने बताया कि इस विभाग के लिए वे करीब 15 साल से संघर्ष कर रहे थे। नया विभाग खुलने से फेफड़े से जुड़ी बीमारियों का इलाज आसान होगा। विभाग में मरीजों को भर्ती करने के लिए अलग से वार्ड की व्यवस्था है। वेंटिलेटर से लैस आईसीयू, अत्याधुनिक मशीनों वाले ऑपरेशन थियेटर, डीएसए लैब सहित अन्य सुविधाएं हैं। इससे मरीजों को उपचार मिलेगा और नए विशेषज्ञ तैयार किए जा सकेंगे। वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. अंबरीश कुमार ने बताया कि अब नसों से जुड़ी बीमारियों का इलाज आसान होगा। वैस्कुलर सर्जरी में एमसीएच कोर्स शुरू होने के बाद नए विशेषज्ञ तैयार होंगे। नसों से जुड़ी बीमारियों के मरीजों को भी लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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