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केजीएमयू में पर्चा लीक, डीन पर आरोप
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सीनियर रेजीडेंट भर्ती की परीक्षा का मामला, केजीएमयू दंत संकाय के डीन पर पर्चा लीक कराने का आरोप
केजीएमयू के दंत संकाय में सीनियर रेजीडेंट की भर्ती परीक्षा का पेपर लीक कराने का सनसनीखेज आरोप डीन प्रो. शादाब मोहम्मद पर लगा है।
ये आरोप ओरल पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. शालीन चंद्रा ने लगाए हैं। कुलपति प्रोफेसर एमएलबी भट्ट ने मामले को लेकर जांच बैठा दी है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. एके सिंह मामले की जांच कर रहे हैं।
इसको लेकर केजीएमयू में हलचल मची हुई है। डेंटल संकाय में 30 सीनियर रेजीडेंट के लिए 21 जुलाई को कलाम सेंटर में परीक्षा हुई।
21 जुलाई को कलाम सेंटर में परीक्षा हुई। दो घंटे की परीक्षा 100 अंकों की थी। इसमें 40 अंक के सवाल शोध पर आधारित थे, जबकि 60 अंक के अलाव विभाग से संबंधित थे।
परीक्षा के बाद शिकायत मिली की कई प्रश्न गलत हैं। इस पर पेपर बनाने वालों से उनके सेट मांगे गए। जांच के दौरान पता चला कि ओरल पैथोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर की ओर से बनाए गए प्रश्न पत्र के कुछ प्रश्न गलत हैं, लेकिन ज्यादातर सवाल उनके तैयार सेट से ही हैं।
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मोबाइल पर भेजा था प्रश्नपत्र
ओरल पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. शालीन चंद्रा ने पूरे मामले की शिकायत कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट से की। उन्होंने कुलपति को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि जांच के दौरान जब असिस्टेंट प्रोफेसर से पूछा गया कि ये सवाल उनके मोबाइल पर कैसे हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि दंत संकाय के डीन ने 17 जुलाई को ही प्रश्न पत्र मांग लिए थे। उन्हें मोबाइल पर भेजा था। इस वजह से उनके मोबाइल में यह प्रश्न पत्र हैं। शिकायती पत्र में इस बात का भी आरोप लगाया गया है कि असिस्टेंट प्रोफेसर से डीन ने प्रश्न पत्र मांगे और फिर अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया।
साजिशन लगाया जा रहा आरोप
डीन डेंटल संकाय, प्रो. शादाब मोहम्मद ने बताया कि साजिश के तहत आरोप लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता और असिस्टेंट प्रोफेसर आपस में मिले हुए हैं। जिस प्रश्नपत्र को मुझे भेजने की बात क ही जा रही है वह सोशल मीडिया पर भी वायरल हो चुका है।
जांच के बाद साफ होगी स्थिति
परीक्षा नियंत्रक, प्रोफेसर एके सिंह ने बताया कि कुलपति के निर्देश पर मामले की जांच सौंपी गई है। जांच की जा रही है। पूरी स्थितियों की पड़ताल करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। इसमें एक-दो दिन का वक्त लगेगा।
कुलपति स्तर से कार्रवाई की जाएगी
मीडिया प्रभारी केजीएमयू, डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद कुलपति ने मामले की जांच परीक्षा नियंत्रक को सौंपी है। जांच के बाद जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कुलपति स्तर से कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ी तो परीक्षा निरस्त की जाएगी।
जुगाड़ खत्म करने के लिए हुई लिखित परीक्षा
सीनियर रेजीडेंट के लिए अभी तक साक्षात्कार होता था। इसमें विभाग के कई प्रोफेसर अपने चहेतों को रखने में कामयाब हो जाते थे। इस रैकेट को खत्म करने के लिए नई व्यवस्था के तहत लिखित परीक्षा का प्रावधान किया गया। केजीएमयू के दंत संकाय में ज्यादातर सीनियर रेजीडेंट किसी न किसी प्रोफेसर अथवा प्रशासनिक पदों पर तैनात अधिकारियों के रिश्तेदार होते रहे हैं।
शिक्षक के लिए तीन साल रेजीडेंट होना जरूरी
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से यह व्यवस्था बनाई गई है कि किसी भी मेडिकल कॉलेज में शिक्षक बनने के लिए तीन साल रेजीडेंट होने का अनुभव जरूरी है। इसलिए भी मेडिकल कॉलेजों में रेजीडेंट के लिए मारामारी की नौबत रहती है।
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केजीएमयू के दंत संकाय में सीनियर रेजीडेंट की भर्ती परीक्षा का पेपर लीक कराने का सनसनीखेज आरोप डीन प्रो. शादाब मोहम्मद पर लगा है।
ये आरोप ओरल पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. शालीन चंद्रा ने लगाए हैं। कुलपति प्रोफेसर एमएलबी भट्ट ने मामले को लेकर जांच बैठा दी है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. एके सिंह मामले की जांच कर रहे हैं।
इसको लेकर केजीएमयू में हलचल मची हुई है। डेंटल संकाय में 30 सीनियर रेजीडेंट के लिए 21 जुलाई को कलाम सेंटर में परीक्षा हुई।
21 जुलाई को कलाम सेंटर में परीक्षा हुई। दो घंटे की परीक्षा 100 अंकों की थी। इसमें 40 अंक के सवाल शोध पर आधारित थे, जबकि 60 अंक के अलाव विभाग से संबंधित थे।
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परीक्षा के बाद शिकायत मिली की कई प्रश्न गलत हैं। इस पर पेपर बनाने वालों से उनके सेट मांगे गए। जांच के दौरान पता चला कि ओरल पैथोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर की ओर से बनाए गए प्रश्न पत्र के कुछ प्रश्न गलत हैं, लेकिन ज्यादातर सवाल उनके तैयार सेट से ही हैं।
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मोबाइल पर भेजा था प्रश्नपत्र
ओरल पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. शालीन चंद्रा ने पूरे मामले की शिकायत कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट से की। उन्होंने कुलपति को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि जांच के दौरान जब असिस्टेंट प्रोफेसर से पूछा गया कि ये सवाल उनके मोबाइल पर कैसे हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि दंत संकाय के डीन ने 17 जुलाई को ही प्रश्न पत्र मांग लिए थे। उन्हें मोबाइल पर भेजा था। इस वजह से उनके मोबाइल में यह प्रश्न पत्र हैं। शिकायती पत्र में इस बात का भी आरोप लगाया गया है कि असिस्टेंट प्रोफेसर से डीन ने प्रश्न पत्र मांगे और फिर अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया।
साजिशन लगाया जा रहा आरोप
डीन डेंटल संकाय, प्रो. शादाब मोहम्मद ने बताया कि साजिश के तहत आरोप लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता और असिस्टेंट प्रोफेसर आपस में मिले हुए हैं। जिस प्रश्नपत्र को मुझे भेजने की बात क ही जा रही है वह सोशल मीडिया पर भी वायरल हो चुका है।
जांच के बाद साफ होगी स्थिति
परीक्षा नियंत्रक, प्रोफेसर एके सिंह ने बताया कि कुलपति के निर्देश पर मामले की जांच सौंपी गई है। जांच की जा रही है। पूरी स्थितियों की पड़ताल करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। इसमें एक-दो दिन का वक्त लगेगा।
कुलपति स्तर से कार्रवाई की जाएगी
मीडिया प्रभारी केजीएमयू, डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद कुलपति ने मामले की जांच परीक्षा नियंत्रक को सौंपी है। जांच के बाद जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कुलपति स्तर से कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ी तो परीक्षा निरस्त की जाएगी।
जुगाड़ खत्म करने के लिए हुई लिखित परीक्षा
सीनियर रेजीडेंट के लिए अभी तक साक्षात्कार होता था। इसमें विभाग के कई प्रोफेसर अपने चहेतों को रखने में कामयाब हो जाते थे। इस रैकेट को खत्म करने के लिए नई व्यवस्था के तहत लिखित परीक्षा का प्रावधान किया गया। केजीएमयू के दंत संकाय में ज्यादातर सीनियर रेजीडेंट किसी न किसी प्रोफेसर अथवा प्रशासनिक पदों पर तैनात अधिकारियों के रिश्तेदार होते रहे हैं।
शिक्षक के लिए तीन साल रेजीडेंट होना जरूरी
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से यह व्यवस्था बनाई गई है कि किसी भी मेडिकल कॉलेज में शिक्षक बनने के लिए तीन साल रेजीडेंट होने का अनुभव जरूरी है। इसलिए भी मेडिकल कॉलेजों में रेजीडेंट के लिए मारामारी की नौबत रहती है।