फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   kgmu

दस साल से एक निजी कंपनी पर मेहरबान केजीएमयू अफसर, दवा समेत इन सबका दिया जाता है ठेका

Thu, 11 Jul 2019 02:35 PM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Thu, 11 Jul 2019 02:35 PM IST
विज्ञापन
kgmu
प्रतीकात्मक तस्वीर

केजीएमयू के अधिकारी दस साल से एक ही निजी कंपनी पर मेहरबान है। मरीजों के लिए दवा, उपकरण के साथ मेडिकल स्टोर का ठेका भी इसे ही दिया जा रहा है। इसे लेकर कई शिकायतें भी हुईं, लेकिन अफसर मामले को दबा गए।

विज्ञापन


आरोप है कि दूसरी कंपनियों में खामियां दिखाकर अफसर उन्हें बाहर कर देते हैं और हर साल एक ही कंपनी को जांच से लेकर दवा का काम सौंप दिया जाता है। इस बाबत केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि इस बार टेंडर में कई कंपनियों को शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन


दवा-उपकरण आपूर्ति में जिसकी दर कम आएगी, उसे चुना जाएगा। केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में पहले निजी कंपनी आमा का सीटी स्कैन लगा था। मरीजों का लोड बढ़ने पर डेढ़ साल पहले केजीएमयू प्रशासन ने दूसरी कंपनी का सीटी स्कैन लगाने का फैसला लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


टेंडर प्रक्रिया समेत अन्य औपचारिकताएं पूरी की गईं। विवाद होने पर मामला कोर्ट में फंस गया। इस कारण यहां दूसरी कंपनी की सीटी स्कैन मशीन नहीं लग पाई। वहीं, कंपनी आमा ने अपनी नई सीटी स्कैन मशीन दोबारा लगवा दी। इसी तरह परिसर में एक दूसरी सीटी स्कैन मशीन भी इसी कंपनी की लगी है।

पांच साल का है अनुबंध

kgmu
प्रतीकात्मक तस्वीर
इसके अलावा मेडिकल स्टोर का संचालन, दवाओं की आपूर्ति का जिम्मा भी सिर्फ इसी कंपनी को केजीएमयू ने सौंप रखा है। ऐसा करीब दस साल से चल रहा है। दवाओं से लेकर मशीन स्थापित करने का काम हर बार इसी कंपनी को सौंप दिया जाता है।

ऐसे में इस कंपनी के दवाओं की आपूर्ति न कर पाने पर कैंसर समेत दूसरी गंभीर बीमारियों के मरीजों को दस से पंद्रह दिन का इंतजार करना पड़ता है। निजी कंपनी पर मेहरबानी के पीछे कमीशन का खेल बताया जा रहा है।

दवाओं के टेंडर में दो कंपनियां आई थीं। इसमें से एक ने आपूर्ति से मना कर दिया था। मशीनें काफी समय से लगी हुई हैं। इनका अनुबंध भी पांच साल का होता है। ऐसे में बीच में किसी भी कंपनी को हटाया नहीं जा सकता है। - मो. जमा, वित्त अधिकारी, केजीएमयू

टेंडर से देते हैं काम
केजीएमयू में सीटी स्कैन लगाने आने वाली कंपनी को लिंब सेंटर में सीटी लगाने को जगह दी जा रही थी। हालांकि, वह इसके लिए तैयार नहीं थी। इसके बाद कंपनी मामले को लेकर कोर्ट चली गई। टेंडर के तहत कंपनी को काम सौंपा जाता है। - डॉ. एसएन शंखवार सीएमएस, केजीएमयू
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed