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आपस में जुड़ी थी पेट व छाती, लिवर का एक हिस्सा भी चिपका था, आठ घंटे चली सर्जरी ने बच्चों को दी नई जिंदगी

Wed, 11 Nov 2020 12:18 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 11 Nov 2020 12:18 PM IST
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KGMU doctors give new life to two child.
इन जुड़वा बच्चों की हुई सर्जरी। - फोटो : amar ujala

केजीएमयू के डॉक्टरों ने पेट से जुड़े जुड़वां बच्चों को सर्जरी कर आंतरिक अंगों को बिना नुकसान पहुंचाए अलग करने में सफलता पाई है। अब ये अलग-अलग जिंदगी जी सकेंगे। फिलहाल बच्चे वेंटिलेटर पर हैं। कई विभागों की संयुक्त टीम निगरानी कर रही है। केजीएमयू के इतिहास में पहली बार इस तरह की सर्जरी की गई है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि करीब एक करोड़ लोगों में किसी एक में ऐसी समस्या मिलती है।

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कुशीनगर निवासी मजदूर के घर 19 नवंबर 2019 को जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ। कंज्वाइन ट्विंस बीमारी से पीड़ित बच्चों के पेट का हिस्सा आपस में जुड़ा था और अन्य हिस्से अलग-अलग थे। बच्चे बढ़ने लगे तो कई तरह की परेशानियां होने लगीं।
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कई जगह डॉक्टरों को दिखाया, जिन्होंने बताया कि साल भर बाद इन बच्चों को किसी बड़े अस्पताल में सर्जरी कर अलग किया जा सकता है। इस दौरान लॉकडाउन हो गया। परिवार के लोगों ने गोरखपुर के समाजसेवी के जरिये केजीएमयू में संपर्क किया। कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. बिपिन पुरी ने सभी विभागाध्यक्षों से विचार विमर्श करने के बाद टीम बनाई।
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पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष पद्मश्री प्रो. एसएन कुरील ने सर्जरी से संबंधित तैयारियां पूरी कराईं। केजीएमयू सूत्रों ने बताया कि करीब आठ घंटे चली सर्जरी के बाद दोनों बच्चों को सकुशल अलग-अलग कर दिया गया। 24 घंटे बाद इनकी स्थिति में मामूली सुधार है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी स्थिति के बारे में 72 घंटे बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

जन्मजात बीमारी से पीड़ित

केजीएमयू के विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों का पेट व छाती आपस में जुड़ी थी। लिवर का एक हिस्सा चिपका था। दोनों के बाकी अंग अलग-अलग थे। छाती की हड्डी भी काटी गई। डॉक्टरों ने कहा कि दोनों का दिल एक होता तो फिर एक को ही बचाया जा सकता था। लिवर अलग होने के साथ एक हिस्सा कॉमन जुड़ा था, जिसे हटा दिया गया।

ये डॉक्टर भी रहे शामिल
सर्जरी में गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के डॉ. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक, कार्डियो वैस्कुलर थोरेसिक सर्जरी विभाग के डॉ. अंबरीष कुमार, एनेस्थीसिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. जीपी सिंह, डॉ. विनीता और डॉ. सतीश वर्मा, पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. एस सिंह भी थे।

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