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यूपी में इस तरह से घूस लेकर बांटी जा रही हैं सरकार की फ्री साइकिलें

Sat, 19 Sep 2015 11:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 19 Sep 2015 11:16 AM IST
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kanpur SP leader taking money in free cycle distribution

उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से संचालित साइकिल योजना में कुछ लोग वसूली कर रहे हैं। कानपुर के रतनलाल नगर में सपा के एक तथाकथित वार्ड नेता भोले भाले श्रमिकों से एक-एक साइकिल के बदले में हजार से पंद्रह सौ रुपये तक वसूल रहे हैं।

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श्रमिकों से साइकिल फार्म के लिए भी दो-दो सौ रुपये की वसूली हो रही है। इतना ही नहीं जिन श्रमिकों ने दो (पति-पत्नी) साइकिलों के लिए फार्म भरे, उन्हें एक ही साइकिल दी जा रही है।
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जबकि हकीकत यह है कि इस योजना में श्रमिकों को साइकिल फ्री दी जाती है। अमर उजाला टीम ने जब गुजैनी सी ब्लाक बस्ती पहुंचकर श्रमिकों से साइकिल योजना के बारे में बात की तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

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दो साइकिलों के लिए 2100 रुपये

kanpur SP leader taking money in free cycle distribution

कानपुर अमर उजाला की टीम ने जब मामले की पड़ताल की तो मुन्नी ने बताया कि उसने और पति दोनों ने साइकिल के लिए नेता के पास फार्म भरा था, जिसके बदले में उसे 2100 रुपये देने पड़े थे, तब जाकर दो साइकिलें मिली हैं।

मजदूरी करने वाले विनोद कुमार उर्फ बदलू से जब पूछा गया कि साइकिल कैसे पाई तो वह तपाक से बोल पड़ा, पंद्रह सौ दीहिंन, तबै पावन हन ई साइकिल, नेताजी के हाथ में रुपइया देओ और काकादेव थाने के पास से साइकिल लइआव।

विनोद की बात सुनकर पास खड़े रामस्वरुप बाल्मिकी भी बोल पड़े कि हमार जमा है साढ़े आठि सौ रुपइया, देखित हैं कब बुलावत हैं नेताजी। रामस्वरूप की तरह श्रवण, रमेश और भोला ने भी 500 से लेकर 1000 रुपये तक एडवांस दे रखे हैं।

दो के फार्म पर मिली एक साइकिल

kanpur SP leader taking money in free cycle distribution

बस्ती निवासी राजा ने बताया कि उसके पिता प्रकाश और मां ममता दोनों ही मजदूरी करते हैं, और उनके पास अलग अलग श्रमिक कार्ड भी हैं, नेता ने दोनों कार्ड लेकर एक साइकिल पिता जी को थमाई है और मम्मी से कह दिया कि व्यवस्था बनी तो दूसरी साइकिल मिलेगी।

बस्ती वालों ने बताया कि नेता पहले 200-200 रुपये लेकर साइकिल के फार्म भरवाते हैं, फिर फाइल चार्ज के नाम पर 250-250 रुपये अलग से लेते हैं, इसके बाद साइकिल की रसीद देते वक्त 1200 से 1500 रुपये लिए जाते हैं।

साइकिलें बेचने वाले और खुद को सपा का वार्ड अध्यक्ष बताने वाले के मोबाइल नंबर 9169422514 पर दो बार फोन कर बात की गई तो उसने व्यस्तता बताकर फोन काट दिया।

वहीं उपश्रमायुक्त एसपी शुक्ल ने बताया, उप्र भवन एवं सन्निर्माण योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को साइकिलें फ्री में दी जाती हैं। श्रमिकों का रजिस्ट्रेश सिर्फ श्रम विभाग ‌में किया जाता है।

विभाग की ओर से किसी एनजीओ को कोई काम नहीं दिया गया। जो लोग रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं वो अवैध है, फर्जी है। इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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