यूपी में 3500 से ज्यादा दरोगाओं की नियुक्ति का रास्ता साफ, 10 दिन में नियुक्ति पत्र देने का आदेश
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उत्तर प्रदेश में 3500 से अधिक दरोगाओं की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इन लोगों की रुकी पड़ी ट्रेनिंग 10 दिन में पूरी करने और उन्हें जल्द नियुक्ति पत्र देने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति कूरियन जोसफ और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ ने मंगलवार को इन दरोगाओं के हित में यह फैसला सुनाया था। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने चयन प्रक्रिया में अनियमितता पाते हुए चयन सूची को निरस्त कर दिया था।
इससे प्रभावित अभ्यर्थियों ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे और कृष्णा एम सिंह ने पीठ से अपील की कि अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में हैं। वे मानसिक तौर पर परेशान हैं। इस पूरे प्रकरण में इन अभ्यर्थियों का कोई दोष नहीं है, लिहाजा उनकी नियुक्ति की जाए।
कोर्ट ने पूछे थे ये सवाल
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के एडिशनल एडवोकेट जनरल से पूछा था कि जिन अभ्यर्थियों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है, क्या उनकी नियुक्ति हो सकती है?
राज्य सरकार बताया कि चूंकि हाईकोर्ट ने पूरी चयन सूची निरस्त कर दी थी इसलिए नए सिरे से चयन किया जा रहा है और यह काम अंतिम चरण में है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि जिन लोगों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है या पूरी होने वाली है, उन्हें जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र दिए जाएं।
अदालत ने रुकी हुई ट्रेनिंग 10 दिन के अंदर पूरी करने और सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने का निर्देश दिया है।
मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में 19 मई 2011 को दरोगा व प्लाटून कमांडर के 4010 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। 11 दिसंबर 2011 को प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई थी और परिणाम एक जनवरी 2013 को घोषित किए गए।
23 अक्टूबर 2014 को घोषित किया गया था परिणाम
इसके बाद 14 सितंबर 2014 को मुख्य परीक्षा आयोजित की गई थी और परिणाम 23 अक्तूबर 2014 को घोषित किए गए। सफल अभ्यर्थियों को ‘ग्रुप डिस्कशन’ से होकर गुजरना पड़ा, जो 11 दिसंबर 2014 से 10 जनवरी 2015 तक चला।
इसके बाद 3784 सफल उम्मीदवारों की सूची जारी की गई। इनमें से 3533 अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग के लिए भेजा गया जो नवंबर 2016 तक चली। लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनकी नौकरी दांव पर लगी हुई थी।
सिर्फ पासिंग आउट परेड बाकी
जिन अभ्यर्थियों के बारे में कोर्ट ने फैसला सुनाया है उनकी ट्रेनिंग लगभग पूरी हो चुकी है केवल पास आउट परेड बाकी है। जिसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर हुआ ग्रुप डिस्कशन का कोई मतलब नहीं रह गया है।