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कोर्ट के एक फैसले से खुली दो हजार नौकरियां
शोभित श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Wed, 09 Oct 2013 11:41 PM IST
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उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों में नि:शक्तजन के दो हजार से अधिक पद खाली हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नौकरी में नि:शक्तों को तीन फीसदी आरक्षण देने का फैसला सुनाया है।
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लेकिन उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट पिछले जुलाई में ही इस संबंध में राज्य सरकार को सख्त निर्देश जारी कर चुका है। हाईकोर्ट ने 1997 से 2010 के बीच विभिन्न विभागों की भर्तियों में नि:शक्तजनों को नौकरी न देने पर नाराजगी जताई थी।
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इसके बाद सरकारी मशीनरी हरकत में आई और विशेष अभियान चलाकर भर्ती शुरू की गई। सितंबर तक प्रदेश के कुल 76 विभागों में नि:शक्तों के खाली 3959 पदों में से 1940 पद ही भरे जा सके हैं। खुद मुख्य सचिव जावेद उस्मानी लगातार इसकी समीक्षा कर रहे हैं।
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अब भी 40 प्रमुख विभागों में नि:शक्तों के 2019 पद खाली हैं। सबसे खराब स्थिति पंचायती राज विभाग की है। अकेले इसी विभाग में नि:शक्तों के 854 पद खाली हैं।
वहीं लोक सेवा आयोग के दायरे में आने वाले 455 पद खाली हैं। विभागों ने लोक सेवा आयोग को खाली पदों को भरने का प्रस्ताव तो भेज दिया है लेकिन अभी तक भर्तियां शुरू नहीं हो सकी हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई-कई बार विज्ञप्ति प्रकाशित करने के बावजूद पात्र अभ्यर्थी नहीं मिल रहे हैं। इस कारण भी थोड़ा विलंब हो रहा है।
वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग में कोर्ट के स्टे के कारण नि:शक्तजन कोटे में शिक्षकों के 221 पदों की भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है।
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