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गोमा की सफाई के लिए 2500 करोड़ और मांगे, अब तक 2000 करोड़ रुपये से अधिक कर चुके हैं खर्च
Sat, 11 May 2019 01:19 AM IST
सौरभ दिक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: सौरभ दिक्षित
Updated Sat, 11 May 2019 01:19 AM IST
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15- गोमती नदी में गिर रहा नाले का पानी।
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गोमती में सीधे गिर रहे नालों और सीवरों को रोककर इन्हें प्रदूषणमुक्त करने के लिए जल निगम ने 2500 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट तैयार किए हैं। इन्हें नगर आयुक्त को भेज दिया गया है। अब इसे नमामि गंगे योजना के तहत शासन की मंजूरी को भेजा जाएगा।
निगम का दावा है कि यदि प्रोजेक्ट मंजूर हो जाते हैं तो गोमा को 2040 तक प्रदूषण मुक्त किया जा सकेगा। हालांकि अब तक नदी के सौंदर्यीकरण पर 2200 करोड़ से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन गोमती में नालों का गिरना नहीं रोका जा सका है।
जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर सौरभ श्रीवास्तव का कहना है कि चुनाव आचार संहिता के बाद प्रोजेक्ट को रफ्तार मिलेगी। जिन चार परियोजनाओं पर काम होना है, उनमें से एक का टेंडर जारी हो गया है, मगर आचार संहिता केकारण यह अटका है।
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शेष तीन को अभी शासन से मंजूरी मिलना बाकी है। जिसका टेंडर जारी हो चुका है उसके तहत 29,812 लाख की लागत से बरीकाल में एक एमएलडी का एसटीपी, दौलतगंज में 39 एमएलडी के नए एसटीपी का निर्माण और पहले से मौजूद 56 एमएलडी एसटीपी की क्षमता बढ़ाने का काम होना है।
दावा : ऐसे रोकेंगे नालों का गिरना
हाईकोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद गोमती को पूरी तरह से प्रदूषणमुक्त करने की जो योजनाएं बनाई गई हैं, उसमें नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने हैं। साथ ही उन नालों को भी टेप कर बंद किया जाएगा, जो सीधे नदी में गिर रहे हैं। सीवर और नाले के पानी को पंप कर एसटीपी तक ले जाने के लिए पंपिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। जो नए एसटीपी बनाए जाने हैं, उनका 15 साल तक मेंटेनेंस का खर्च भी प्रोजेक्ट में शमिल किया गया है, ताकि आगे इसकी समस्या न आए।
शहर में दो एसटीपी, एक और बन रहा
शहर में दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं। इनमें एक गोमती नगर विस्तार के भरवारा और दूसरा पुराने लखनऊ के दौलतगंज में है। तीसरा 120 एमएलडी क्षमता का एसटीपी लोहिया पथ पर डीजीपी ऑफिस के पीछे हैदर कैनाल की खाली पड़ी जमीन पर बनाया जा रहा है। इसके जरिये हैदर कैनाल के पानी को साफ किया जाएगा। हैदर कैनाल में अभी 180 एमएलडी सीवर आ रहा है। इसमें से 120 एमएलडी सीवर पंप कर भरवारा एसटीपी में भेजा जा रहा है। शेष 60 एमएलडी सीवर सीधे गोमती में जा रहा है, जो एसटीपी बनने से बाद रुक जाएगा।
सीवर निकल रहा ज्यादा, एसटीपी की क्षमता कम
750 एमएलडी सीवर रोज निकलता है शहर में। 438 एमएलडी सीवर का ही हो पा रहा निस्तारण।
करोड़ों खर्च, फिर भी गोमती गंदी
गोमती रिवरफ्रंट सौंदर्यीकरण पर सरकार ने 1500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। शहरवासियों के मनोरंजन के लिए पक्का पुल से गोमतीनगर तक नदी तट पर मल्टीकलर लाइटिंग, लैंडस्केपिंग, मोटर बोट और रंगीन फव्वारे भी लगाए हैं, लेकिन इस बीच गोमती में सीवर और नाले का पानी भी जा रहा है। इससे पानी में बदबू पैदा हो रही है, जिससे रिवरफ्रंट की खूबसूरती फीकी पड़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नदी के पानी में बदबू को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी। उधर, नालों को एसटीपी से जोड़ने के लिए 400 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। दौलतगंज एसटीपी पर 50 करोड़ और भरवारा एसटीपी पर 170 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
गोमती को प्रदूषण मुक्त करने को यह है प्लान
2.98 करोड़ से बरीकाल में एक एमएलडी का एसटीपी, दौलतगंज में 39 एमएलडी के नए एसटीपी का निर्माण और पहले से स्थित 56 एमएलडी एसटीपी का सुदृढ़ीकरण। 129.749 करोड़ की लागत से भरवारा में नए 64 एमएलडी एसटीपी का निर्माण। 167.99 करोड़ रुपये से घैला में 22 एमएलडी एसटीपी बनाया जाएगा। 532.24 करोड़ की लागत से बिजनौर में 80 एमएलडी एसटीपी का निर्माण।
एनजीटी ने दिया था निर्देश
गोमती तट के 100 मीटर के दायरे में कचरा न डाला जाए। नदी में गिरने वाले नालों को रोका जाए और उन्हें एसटीपी से जोड़ा जाए। नालों के मुहाने पर जाली लगाई जाए, ताकि कचरा जाने से रोका जा सके।
नाले गिरना होंगे बंद, गोमती होगी प्रदूषण मुक्त
जल निगम के महाप्रबंधक एसके गुप्ता ने बताया कि गोमती को प्रदूषण मुक्त करने के लिए प्रोजेक्ट बनाए गए हैं। यदि ये पास होकर पूरे हो गए तो 2040 तक नदी को प्रदूषण से निजात मिल जाएगी। जो भी नाले गोमती में अभी गिर रहे हैं, वे सभी बंद हो जाएंगे।
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निगम का दावा है कि यदि प्रोजेक्ट मंजूर हो जाते हैं तो गोमा को 2040 तक प्रदूषण मुक्त किया जा सकेगा। हालांकि अब तक नदी के सौंदर्यीकरण पर 2200 करोड़ से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन गोमती में नालों का गिरना नहीं रोका जा सका है।
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जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर सौरभ श्रीवास्तव का कहना है कि चुनाव आचार संहिता के बाद प्रोजेक्ट को रफ्तार मिलेगी। जिन चार परियोजनाओं पर काम होना है, उनमें से एक का टेंडर जारी हो गया है, मगर आचार संहिता केकारण यह अटका है।
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शेष तीन को अभी शासन से मंजूरी मिलना बाकी है। जिसका टेंडर जारी हो चुका है उसके तहत 29,812 लाख की लागत से बरीकाल में एक एमएलडी का एसटीपी, दौलतगंज में 39 एमएलडी के नए एसटीपी का निर्माण और पहले से मौजूद 56 एमएलडी एसटीपी की क्षमता बढ़ाने का काम होना है।
दावा : ऐसे रोकेंगे नालों का गिरना
हाईकोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद गोमती को पूरी तरह से प्रदूषणमुक्त करने की जो योजनाएं बनाई गई हैं, उसमें नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने हैं। साथ ही उन नालों को भी टेप कर बंद किया जाएगा, जो सीधे नदी में गिर रहे हैं। सीवर और नाले के पानी को पंप कर एसटीपी तक ले जाने के लिए पंपिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। जो नए एसटीपी बनाए जाने हैं, उनका 15 साल तक मेंटेनेंस का खर्च भी प्रोजेक्ट में शमिल किया गया है, ताकि आगे इसकी समस्या न आए।
शहर में दो एसटीपी, एक और बन रहा
शहर में दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं। इनमें एक गोमती नगर विस्तार के भरवारा और दूसरा पुराने लखनऊ के दौलतगंज में है। तीसरा 120 एमएलडी क्षमता का एसटीपी लोहिया पथ पर डीजीपी ऑफिस के पीछे हैदर कैनाल की खाली पड़ी जमीन पर बनाया जा रहा है। इसके जरिये हैदर कैनाल के पानी को साफ किया जाएगा। हैदर कैनाल में अभी 180 एमएलडी सीवर आ रहा है। इसमें से 120 एमएलडी सीवर पंप कर भरवारा एसटीपी में भेजा जा रहा है। शेष 60 एमएलडी सीवर सीधे गोमती में जा रहा है, जो एसटीपी बनने से बाद रुक जाएगा।
सीवर निकल रहा ज्यादा, एसटीपी की क्षमता कम
750 एमएलडी सीवर रोज निकलता है शहर में। 438 एमएलडी सीवर का ही हो पा रहा निस्तारण।
करोड़ों खर्च, फिर भी गोमती गंदी
गोमती रिवरफ्रंट सौंदर्यीकरण पर सरकार ने 1500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। शहरवासियों के मनोरंजन के लिए पक्का पुल से गोमतीनगर तक नदी तट पर मल्टीकलर लाइटिंग, लैंडस्केपिंग, मोटर बोट और रंगीन फव्वारे भी लगाए हैं, लेकिन इस बीच गोमती में सीवर और नाले का पानी भी जा रहा है। इससे पानी में बदबू पैदा हो रही है, जिससे रिवरफ्रंट की खूबसूरती फीकी पड़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नदी के पानी में बदबू को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी। उधर, नालों को एसटीपी से जोड़ने के लिए 400 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। दौलतगंज एसटीपी पर 50 करोड़ और भरवारा एसटीपी पर 170 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
गोमती को प्रदूषण मुक्त करने को यह है प्लान
2.98 करोड़ से बरीकाल में एक एमएलडी का एसटीपी, दौलतगंज में 39 एमएलडी के नए एसटीपी का निर्माण और पहले से स्थित 56 एमएलडी एसटीपी का सुदृढ़ीकरण। 129.749 करोड़ की लागत से भरवारा में नए 64 एमएलडी एसटीपी का निर्माण। 167.99 करोड़ रुपये से घैला में 22 एमएलडी एसटीपी बनाया जाएगा। 532.24 करोड़ की लागत से बिजनौर में 80 एमएलडी एसटीपी का निर्माण।
एनजीटी ने दिया था निर्देश
गोमती तट के 100 मीटर के दायरे में कचरा न डाला जाए। नदी में गिरने वाले नालों को रोका जाए और उन्हें एसटीपी से जोड़ा जाए। नालों के मुहाने पर जाली लगाई जाए, ताकि कचरा जाने से रोका जा सके।
नाले गिरना होंगे बंद, गोमती होगी प्रदूषण मुक्त
जल निगम के महाप्रबंधक एसके गुप्ता ने बताया कि गोमती को प्रदूषण मुक्त करने के लिए प्रोजेक्ट बनाए गए हैं। यदि ये पास होकर पूरे हो गए तो 2040 तक नदी को प्रदूषण से निजात मिल जाएगी। जो भी नाले गोमती में अभी गिर रहे हैं, वे सभी बंद हो जाएंगे।