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आसान नहीं है डीएचएफएल में जमा पूरी राशि की वसूली 

Fri, 22 Nov 2019 12:36 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Fri, 22 Nov 2019 12:36 PM IST
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It is not easy to recover the entire amount deposited in DHFL
dhfl - फोटो : Amar ujala

दीवान हाउसिंग फाइनेंस लि. (डीएचएफएल) में फंसे पावर कॅर्पोरेशन के 45 हजार कर्मचारियों के 2268 करोड़ रुपये की वसूली अब कॉर्पोरेशन के लिए आसान नहीं है। जानकारों का मानना है कि डीएचएफएल का बोर्ड भंग कर वहां प्रशासक नियुक्त करने और कंपनी को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया विचाराधीन होने से मामला ना केवल पेचीदा हो गया है बल्कि इस प्रक्रिया में छह महीने से दो वर्ष तक समय भी लग सकता है। 

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द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (लखनऊ रीजन) के पूर्व अध्यक्ष प्रेम खंडेलवाल का कहना है कि डीएचएफएल में प्रशासक नियुक्त होने के बाद यह देखा जाएगा कि डीएचएफएल ने पैसा कहां निवेश किया है। यदि डीएचएफएल ने पैसा असुरक्षित क्षेत्र में निवेश किया है तो वसूली बहुत मुश्किल होगी। उनका मानना है कि इसमें प्रदेश सरकार को ही हस्तक्षेप करना होगा। उनका कहना है कि डीएचएफएल की कुल चल एवं अचल संपत्ति की गणना की जाएगी। उसके बाद सबसे पहले राष्ट्रीयकृत बैंकों का बकाया लौटाया जाएगा, उसके बाद उनके कर्मचारियों का पैसा लौटाया जाएगा। उसके बाद म्युचल फंड, पेंशन फंड, नेशनल हाउसिंग बैंकों और जमाकर्ताओं को लौटाया जाएगा। 
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जानकारों का मानना है कि डीएचएफएल पर बैंकों का 38 हजार करोड़ रुपये बकाया है और उसकी कुल देनदारियां 85 हजार करोड़ के करीब हैं। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में मामला निस्तारित होने के बाद जब डीएचएफएल से वसूली गई राशि निवेशकों को लौटाई जाएगी तो उसमें पावर कॉर्पोरेशन का नंबर बहुत पीछे रहेगा। ऐसे में कॉर्पोरेशन में जमा पूरी राशि की वसूली होना मुश्किल हो सकता है। जानकार कहते हैं कि प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार मिलकर विशेष प्रयास करें तो उम्मीद से अधिक वसूली हो सकती है। 

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घाटे में रहेगा निवेशक, बैंकों को नुकसान कम

डीएचएफएल के दिवालिया होने की कार्रवाई नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के आदेश पर शुरू हो जाएगी। इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशन (आईआरपी) को ट्रिब्यूनल नियुक्त करेगा। आईआरपी की नियुक्ति के बाद कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स बनेगी। यह कमेटी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक कार्रवाई करती है। इसमें कंपनी की संपत्तियों को चिन्हित कर उनकी बिक्री से मिलने वाले फंड का आकलन किया जाता है। फंड आने के बाद सबसे पहले फाइनेंशियल क्रेडिटर्स जैसे बैंक को सबसे पहले पैसा जाएगा। इसके बाद बाकी क्रेडिटर्स को पैसा मिलेगा। बिजली विभाग के पीएफ हितधारक भी बाकी क्रेडिटर्स में आते हैं जिनको सबसे बाद में निवेश की धनराशि वापस की जाएगी। डीएचएफएल में एफ डी के रूप में निवेश करने वाले लोगों को तो सबसे बाद में पैसा मिलेगा। अपने निवेश का यह 10 प्रतिशत से भी कम हो सकता है। ऐसे में उनकी पूंजी डूब जाने जैसा हाल होगा।

- सीए संदीप भटनागर, पूर्व चेयरमैन, द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (लखनऊ रीजन)

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