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14 तहसीलदार नहीं बन पाए एसडीएम

Wed, 03 Sep 2014 02:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 03 Sep 2014 02:43 PM IST
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irresponsable behaviour costs up officials badly.

पात्र होने के बावजूद पहले वे तहसीलदार से एसडीएम बनने के लिए बरसों तक बाट जोहते रहे और 10-12 साल बाद जब एसडीएम बनने का मौका आया तो अधूरी एंट्री ने उनके अरमानों का गला घोंट डाला।

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राजस्व विभाग के 14 तहसीलदार सिर्फ इसलिए एसडीएम पद पर प्रमोशन नहीं पा सके। क्योंकि पदोन्नति के लिए होने वाली विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) में उनकी आधी-अधूरी गोपनीय प्रविष्टि भेज दी गई।
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राजस्व महकमे में पिछले दिनों रिक्त पदों के आधार पर 32 तहसीलदारों को उपजिलाधिकारी के पद पर पदोन्नति देने का फैसला हुआ था।

इसके लिए पात्र तहसीलदारों की गोपनीय प्रविष्टि जरूरी थी। जब पदोन्नति के लिए डीपीसी की बैठक हुई तो पता चला कि 14 तहसीलदारों की प्रविष्टि जिलाधिकारियों ने सीधे भेज दी थी।
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इनके साथ कमिश्नर की गोपनीय रिपोर्ट नहीं थी। ऐसे में विभागीय पदोन्नति समिति ने इन 14 तहसीलदारों की पदोन्नति के प्रस्ताव को स्थगित कर दिया।

इससे इन तहसीलदारों को बड़ी निराशा हुई है। हालांकि राजस्व परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन तहसीलदारों के संबंध में जरूरी प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करवाकर फिर से विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक तय कराने की कार्यवाही की जाएगी।

गोपनीय प्रविष्टि मशक्कत का काम
कर्मचारियों की वार्षिक प्रविष्टि पूरी तरह से गोपनीय होती है। यह कार्यवाही कर्मी के स्वमूल्यांकन आवेदन पर की जानी होती है। राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि व्यवहार में शासन से लेकर फील्ड तक यह कार्यवाही बेहद जटिल हो गई है।

बगैर पैरवी लंबे समय तक एंट्री पड़ी रह जाती है। कभी वरिष्ठ अधिकारी का मूड भांपकर संबंधित कर्मी पीछे हटता रहता है। तो ज्यादातर समय वरिष्ठ अधिकारी अपनी तैनाती तक एंट्री को टालते रहते हैं ताकि मातहत कर्मी उसके अर्दब में बना रहे।

जब फाइल बढ़ती है तो फिर संबंधित कर्मी को ही अपनी फाइल का मूवमेंट पता कर प्रविष्टि के लिए हर वरिष्ठ अधिकारी की चौखट पर दस्तक देनी होती है।

कई बार तो कर्मचारियों को ट्रांसफर हो चुके अधिकारियों के घर जाकर खुशामद कर यह प्रक्रिया पूरी करानी होती है।शायद यही वजह है कि गोपनीय प्रविष्टियों के चक्कर में भी अधिकारियों को लंबे-लंबे समय तक पदोन्नतियां नहीं मिल पाती हैं।

 राजस्व परिषद यदि चाहती तो जिन तहसीलदारों के लिए कमिश्नर की गोपनीय रिपोर्ट नहीं आई थीं। उनसे वह विशेष वाहक के जरिये मंगवा सकती थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।


ऐसी है प्रक्रिया
सरकारी कर्मियों की पदोन्नति के लिए पिछले कामों का मूल्यांकन कर उच्चाधिकारियों द्वारा गोपनीय प्रविष्टि दिए जाने की व्यवस्था है।इसके लिए सबसे पहले संबंधित कर्मी को स्व मूल्यांकन रिपोर्ट अपने नियंत्रक अधिकारी को देनी होती है। इसके बाद आगे के चैनल में जुड़े वरिष्ठ अधिकारी अपनी गोपनीय रिपोर्ट लिखते हैं।

तहसीलदार से उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के पद पर पदोन्नति के लिए एसडीएम, डीएम व कमिश्नर की गोपनीय रिपोर्ट जरूरी होती है।

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